सेक्स वर्कर के बच्चों को 'नानी का घर' दे रही हैं गौरी सावंत

'नानी का घर' के माध्यम से गौरी पेश कर रही हैं इंसानियत की नई मिसाल... 

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ट्रांस 'माँ' कही जाने वाली गौरी सावंत ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए सेक्स वर्कर्स के कई बच्चों को 'नानी का घर' उपलब्ध कराने का फैसला किया। अपने इस मुंबई स्थित निवास पर वह न केवल बच्चों को प्यार और देखभाल करती हैं बल्कि मूल शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल भी प्रदान करती हैं। 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति का यहां स्वागत है।

ट्रांसजेंडर गौरी सावंत 'नानी का घर' के माध्यम से पेश कर रही हैं इंसानियत का बेहतरीन उदाहरण।

देश में सेक्स वर्कर और ट्रांसजेंडर किस हालात में जी रहे हैं ये किसी से छिपा नहीं है। हालांकि इन लोगों के साहस और जज्बे ने हमेशा ही मिसालें पेश की हैं। एक ऐसी ही ट्रांसजेंडर हैं गौरी सावंत। वो समाज से लड़ी और एक सेक्स वर्कर की बच्ची गायत्री को गोद लेकर परंपराओं को तोड़ा। गौरी सावंत ने गायत्री की अपनी बेटी की तरह परवरिश की। ट्रांस 'माँ' कही जाने वाली गौरी सावंत ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए सेक्स वर्कर्स के कई बच्चों को 'नानी का घर' उपलब्ध कराने का फैसला किया। 

गायत्री की परवरिश और सही देखभाल को याद करते हुए गौरी कहती हैं कि सही परवरिश और देखभाल का हर बच्चा हकदार है। और इसी ने "नानी का घर" विचार को पैदा किया। वे कहती हैं "अपनी दादी के घर में किसी बच्चे का स्वागत करने से अधिक और क्या हो सकता है।" दरअसल गौरी बच्चों को अपनी दादी के घर में रखती हैं। एक ऐसा स्थान जहां हर बच्चे को लाड़ प्यार और जिस चीज के वे लायक हैं उन्हें मिलता है।" इस मुंबई स्थित निवास पर वह न केवल बच्चों को प्यार और देखभाल करती हैं बल्कि मूल शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल भी प्रदान करती हैं। 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति का यहां स्वागत है।

हालांकि घर के लिए जमीन दान की गई है। आपको बता दें कि गौरी ने पहले ही अमिताभ बच्चन का क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति जीता था। जिससे मिला हुआ पैसा उन्होंने अपने इस घर में लगाया है। वह वर्तमान में क्राउड फंडिंग के माध्यम से घर के लिए अधिक धन जुटाती हैं।

जरूरत

गौरी (जन्म के समय गणेश सुरेश सावंत) पुणे में एक रूढ़िवादी परिवार में पैदा हुईं और वहीं परवरिश हुई। एक बच्चे के रूप में, वह हमेशा महिला लिंग के प्रति अधिक इच्छुक थी। हमसफर ट्रस्ट की मदद से, वह गणेश से गौरी बन गईं। गौरी के लिए बच्चों के घर बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस पहल के माध्यम से वह अन्य बच्चों के बचपन में क्रूरता को खत्म करने की उम्मीद करती हैं जो उन्होंने खुद के बचपन में सही हैं। और साथ ही मुम्बई की सड़कों में एक ट्रांस-वुमन के रूप में अपने वयस्क जीवन को आश्रय देने की उम्मीद करती है। वे कहती हैं कि सेक्स वर्कर कमजोर हैं। उनके बच्चे और भी अधिक संवेदनशील हैं, क्योंकि उनका परिवेश बिल्कुल अलग है।

गौरी कहती हैं कि "गुणवत्ता की शिक्षा के लिए कोई गुंजाइश न होने के चलते जीवन के विकल्प और अवसर सीमित या शून्य हैं। उनकी माताओं को देखकर बड़ी हुई हूं जिसने एक सेक्स वर्कर के जीवन का नेतृत्व करने पर विवश किया। एक बहुत ही कम उम्र में उन्हें व्यापार के बंधन में घसीटा जा रहा है। इन बच्चों, विशेष रूप से लड़कियों के लिए बाहरी दुनिया में कलंक की लड़ाई लड़ना बहुत मुश्किल लगता है। अक्सर, वे एक ही स्थान पर समाप्त हो जाती हैं।"

कामठीपुरा में एक बार गौरी एक छोटे बच्चे के पास गईं जो अपनी मां के दुपट्टा के साथ झोपड़ी में खेल रहा था। वह जब करीब पहुंची तो चौंक गईं। उन्होंने देखा कि उस बच्चे की मां किसी आदमी के साथ है जबकि वो बच्चा भी उसी रूम में था। दरअसल उस मां के पास काम करते समय अपने बच्चे को छोड़ने के लिए कोई जगह नहीं थी। गौरी यह सोचकर बहुत परेशान थीं कि इन परिस्थितियों में बच्चे आगे बढ़ रहे हैं। जिसके बाद उन्होंने इन बच्चों के जीवन को बदलने के लिए कुछ करने का फैसला किया है। गौरी कहती हैं कि "बच्चे, विशेष रूप से लड़कियां इस माहौल में असुरक्षित हैं। जहां वे बहुत छोटे घरों या खोलियों के कारण काम पर अपनी मां को देखकर बड़े होते हैं।"

एक मां

जैसे उसने गायत्री को पालापोशा वैसे ही गौरी को अन्य सेक्स वर्कर के बच्चों के लिए बेहतर जीवन बनाने की उम्मीद है। गौरी जब गायत्री से मिली तो वह बहुत कम उम्र की थी। गौरी को डर था कि कहीं गायत्री को कोलकाता के राड लाइट एरिया सोनागाची में बेच तो नहीं दिया जाएगा। इसी डर से उसने 2001 में गायत्री को अपनाने का निर्णय लिया और शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और सबसे महत्वपूर्ण, एक आश्रय से देने का फैसला लिया।

गौरी ने 17 वर्षीय गायत्री को अब पढ़ने के लिए एक बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया है। गौरी गर्व से कहती हैं "गायत्री एक मजबूत, स्वतंत्र-दिमाग वाली लड़की है। जो दूसरों की मदद करने की स्थिति में है। उसके आगे का मौका उन अवसरों से भरा है, जिन्होंने एक बार उसे नकार दिया गया था।" हालांकि गायत्री को अक्सर एक ट्रांसजेन्डर व्यक्ति की बच्ची होने के नाते तंग किया जाता है। लेकिन गौरी ने गायत्री को सिखाया है कि उसे हिजरा समुदाय से होने पर गर्व करना चाहिए। और अन्य सेक्स वर्कर के बच्चों के साथ ऐसा करने की योजना है। गौरी कहती हैं कि वे (सेक्स वर्कर के बच्चे) अपनी मां के पेशे पर गर्व करें और इस लायक बनें कि वे इसे ग्रेस के साथ संभाल सकें।

घर

'नानी का घर' गौरी के जीवन के उद्देश्य का प्रतीक है। वह इस घर को बच्चों के लिए स्वर्ग बनाने के लिए अपने सभी प्रयासों को समर्पित कर रही है। गौरी का मानना है कि वह इन बच्चों के लिए प्यार, स्नेह, सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा प्रदान करके एक सुरक्षित भविष्य और बेहतर अवसर प्रदान कर सकती हैं। 'नानी का घर' का निर्माण शहर और उन झोपड़ियों से दूर किया जाएगा जहां बच्चे पैदा हुए हैं।

अपने सपने की परियोजना का ब्यौरा देते हुए, वह कहती हैं, "जब आप सुविधाओं के बारे में बात करते हैं, तो बुनियादी जरूरतों के लिए सुरक्षा, भोजन और कपड़े, सुरक्षा और मानसिक और भावनात्मक कल्याण के अलावा आश्रय भी होता है। हमारे ट्रांसजेंडर्स में से एक डॉक्टर है, और जब जरूरत पड़ने पर घर में चिकित्सा देखभाल प्रदान कर सकते हैं।"

गौरी ने अपने आर्किटेक्ट के साथ घर की योजना शुरू कर दी है। प्रस्तावित योजना एक दो मंजिला घर की है। पहली मंजिल में रसोई और सामान्य क्षेत्र होगा। दूसरी मंजिल बच्चों के लिए एक छोटा "मेडीसिन" रूम के साथ, छात्रावास और शौचालयों का घर होगा।" पोलियो खुराक और समय पर टीकाकरण हमारे द्वारा पूरी तरह से नियंत्रित किया जाएगा।" अंत में गौरी कहती हैं कि "शिक्षा के संबंध में, हम प्राथमिक शिक्षा से शुरू करने की योजना बना रहे हैं। भविष्य में, हम कुछ व्यवसायिक पाठ्यक्रम पेश करेंगे, जो इन बच्चों को नौकरियों को हासिल करने में सक्षम बना सकते हैं।"

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