'M.I.S.S.I.N.G' को ढूंढने में 'लीन' कैमरा, सिर्फ अभिव्यक्ति नहीं उससे बढ़कर....


मानव तस्करी और यौन व्यापार के दलदल में फंसी लड़कियों के लिए वरदान है लीना केजरीवाल का " M.I.S.S.I.N.G. प्रोजेक्ट"

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लीना केजरीवाल एक छायाकार और अधिष्ठापन कलाकार हैं. बड़े पैमाने पर उनके छायाचित्र प्रतिष्ठान दुनिया भर के कई शहरों, जैसे- कोलकाता, दिल्ली, तेहरान, बर्लिन और वेइमर तक में प्रसिद्ध हो रहे हैं. उनके यह छायाचित्र शहरों की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संरचना पर केंद्रित रहे हैं.

लीना केजरीवाल
लीना केजरीवाल

युवा लड़कियों से संबंधित मुद्दों की दिशा में काम रहे, कई गैर सरकारी संगठनों से भी लीना संबद्ध हैं. उन्होंने कई प्रदर्शनी भी की हैं और अपने छायाचित्रों के माध्यम से पुस्तकों के आवरण बना कर उन्होंने कई पुस्तकों को भी जीवंत कर दिया है.

कोलकाता एक ऐसा शहर है जो लीना के दिल के करीब रहता है और लीना ने इस शहर और इसकी आभा को अपने कैमरे के लेंस के माध्यम से कैद किया है.

स्टार होटलों से लेकर पुस्तक आवरणों तक, लीना ने कला जगत में अपनी उपस्थिति का एहसास करवाया है. उन्होंने कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण कारणों के लिए अपने काम का प्रयोग किया है और एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देने के लिए कला का इस्तेमाल किया है.

"हर स्टोरी" ने लीना केजरीवाल से उनके काम, और विशेष रूप से उनकी वर्तमान परियोजना M.I.S.S.I.N.G. के विषय में बात की. प्रस्तुत हैं उनसे हुए बातचीत की प्रमुख अंश:

हर स्टोरी: आप अपनी परियोजना की बारे में बताएं और आपकी इस की माध्यम से क्या करने की योजना है?

लीना: M.I.S.S.I.N.G. पृथ्वी के चेहरे से गायब हो जानेवाली लाखों लड़कियों के मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक सार्वजनिक कला परियोजना है. यह मुहिम सेक्स के अवैध व्यापार के मुद्दे और इस व्यापार में गायब हो जाने वाली अनेकों लड़कियों पर एक कला और जागरूकता अभियान है.

सेक्स के अवैध व्यापार के आंकड़े बहुत चौंकाने वाले हैं और यौन शोषण में गायब इन लड़कियों की औसत आयु भारत में 9 और 12 के वर्ष के बीच है. यह मुद्दा हमारे लिंग आधारित आँकड़े को प्रभावित कर रहा है और हम यह कल्पना कर सकते हैं कि यह स्थिति हमारी कल्पना से भो पहले हमारी भावी पीढ़ी को खतरे में डाल देगी.

यह काम जीवंत से वृहत फाइबरग्लास की बनी संरचनाओं से जुड़ा है, जो आसमान के सामने शहर की प्रमुख ऊँची इमारतों पर लगायी जाती हैं. ये इन खोयी लड़कियों की छायाकृति होती हैं, और जब इन्हें खुले आसमान के नीचे ऊँचाई पर लगाया जाता है तो यह एक तीखे कट-आउट जैसी दिखाई देती हैं. यह लड़कियों की छाया-आकृति है, जिसे एक बार आकाश के सामने रख दिया जाय तो वो भी आसमान में एक तीखे कट आउट जैसा ही प्रतीत होगा. वास्तव में यह बहुत विस्तृत है. ये ऐसे रहस्यमय ब्लैक होल्स जैसे हैं जिनमें इस पृथ्वी की लाखों लड़कियाँ गायब हो जाती हैं.

हमने इस प्रकार के छाया-चित्र भारत के कम से कम ८-१० शहरों में लगाएं है. एक एप्प के माध्यम से हम यह काम करते हैं. यह एप्प आपको एक संवर्धित वास्तविकता एनीमेशन पर ले जाता है, जो लड़की के बारे में आपको और ज्यादा जानकारी देता है. आखिरी स्क्रीन आपको वर्तमान याचिकाओं की एक सूची एक पर ले जाता है जिस पर हस्ताक्षर कर के आप कानूनों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते है. साथ ही आप आसपास की संस्थाओं की सूची भी देख सकते हैं, किसी भी प्रकार की सहायता के लिए इन से संपर्क किया जा सकता है. इसके साथ ही इस मुद्दे से संबंधित जागरूकता और कार्रवाई में मदद करने वाले अन्य लिंक भी हैं.

इस परियोजना की शुरुआत भारत कला मेले में हुयी थी और इसके प्रति अभी तक लोगों की प्रतिक्रिया बहुत अच्छी रही है. जैसे कि यह एक सार्वजनिक कला और जागरूकता अभियान है इस लिए मैंने प्रारंभिक चरण से ही वित्त पोषण के लिए क्राउड फंडिंग के माध्यम को चुना है. मुद्दे की जरूरत के मुताबिक भविष्य में मैं इसे एक आंदोलन बन जाने की उम्मीद कर रही हूँ.

हर स्टोरी: अपने प्रारंभिक वर्षों के बारे में बताएं और ऐसा क्या था जिसने आपको छायाचित्र प्रतिष्ठान की दिशा में प्रेरित किया?

लीना: मैं कोलकाता के एक पारंपरिक मारवाड़ी परिवार से हूँ. मैंने अपने प्रारंभिक वर्ष, जयपुर में एक बोर्डिंग स्कूल महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक स्कूल में बिताए थे. यह बिना किसी लक्ष्य के एक बहुत ही गैर-महत्वाकांक्षी और लापरवाह जीवन था. इसके बाद मैं अपनी स्नातक स्तर की पढ़ाई करने लगी.

इसके बाद मेरी शादी तक पूरे तीन साल का अंतराल था. ईश्वर को इन वर्षों के लिए धन्यवाद, जब मैंने छाया-चित्रण का एक बुनियादी पाठ्यक्रम और विज्ञापन में एक डिप्लोमा किया लेकिन फिर विासे बिना किसी मकसद के.

मेरी शादी भी एक हमारे जैसे पारंपरिक परिवार में ही हुयी थी. मुझे लगता है कि इन वर्षों में, बोर्डिंग में मेरी लापरवाह जिंदगी और आजादी, कठोर पारिवारिक ढांचे के भीतर मेरी इस रचनात्मकता के उद्भव के लिए जिम्मेदार थी. मैं सोचती हूँ यह एक बुलबुले की तरह था जिसेकि अभी या बाद में सतह पर चोट करनी ही थी.

शादी के 5 साल के भीतर ही मेरे दोनों बच्चे हो गए थे. और वे जब छोटे थे तभी मुझे शहर में एक अच्छे चित्र स्टूडियो की कमी का एहसास हो गया था. मैं ने अपनी निजी बचत के पैसों से घर पर एक बुनियादी स्टूडियो की स्थापना की. और फिर मैंने मुड़ कर नहीं देखा. मैं ने चुने हुए ग्राहकों को कला चित्रों की पेशकश के साथ अपने पेशेवर जीवन की शुरूआत की.

अपने इस छोटे स्टूडियो की स्थापना से कुछ वर्ष पहले मुझे एक हिंदी पुस्तक का आवरण बनाने के लिए कहा गया था. अलका सरावगी द्वारा लिखित किताब " कालीकथा वाया बाईपास" को उस वर्ष साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. शहर के सुस्त इतिहास को समेटते इस पुस्तक के आवरण को अद्भुत स्वीकृतियां और प्रशंसा मिली थी, जोकि दिल को छू लेने वाली थी.

इस परियोजना ने मुझे अपने शहर भर में मेरी पहली मनोरंजक यात्रा की शुरुआत की और मेरे लिए अनुभव के नए द्वार खोले. इसके बाद मैंने मेरी पहली प्रदर्शनी, फ्रांस में मेरी कलाकार रेजीडेंसी और मेरी सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक "कलकत्ता: रिपोसेसिंग द सिटी" पूरी की.

हर स्टोरी: किस चीज ने आपको फोटोग्राफी की ओर आकर्षित किया?

लीना: मैं हमेशा से कलापरक थी घर पर कॉलेज के बाद तेल चित्रकला सीखती थी. मैं अपने बड़े भाई को उनके कैमरों के साथ देखा करती थी, लेकिन उन्हें छूने या इस्तेमाल करने का कोई सवाल ही नहीं था. उसी दौरान मेरा छोटा भाई अपनी एक स्कूल यात्रा से एक कैमरे के साथ वापस आया और मुझे लगा कि अगर वह यह कर सकता हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकती हूँ? फिर मैंने उसके कैमरे से पहली मूल बातें सीखी.

हर स्टोरी: फोटोग्राफी कैसे आपके व्यक्तित्व का ही एक विस्तार हो जाता है?

लीना: जब मैंने पहली बार शहर के एक लाल बत्ती के क्षेत्र में प्रवेश किया, मैंने जो देखा उसे देखकर मैं अभिभूत हो गयी. मेरा कैमरा मेरा स्वाभाविक विस्तार बन गया. जब से मैंने अपना शहर तलाशना शुरू किया मेरा कैमरा मेरे लिए कलात्मक अभिव्यक्ति का एक उपकरण बन गया. मेरे कैमरे ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में, मेरे आँखों ने जो देखा उस विवरण को कैद करने में और उन रंगों को पकड़ने और साझा करने में जिसे मैंने देखा, मेरी मदद की है. यह मैं जो कहूँ वो करने के लिए सदैव तैयार रहता है.

M.I.S.S.I.N.G.के लिए भी, मैंने एक लड़की की सहायता से छाया-आकृति के लिए छायांकन किया है.

हर स्टोरी: आज की तिथि तक आपको किस सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है और आप ने उस से कैसे पार पाया.

लीना: मेरी सबसे बड़ी चुनौती एकदम बाहर से कला की दुनिया में प्रवेश करना था, लेकिन सही कदम उठाते हुए और तालमेल रखते हुए मुझे कला की दुनिया के अंदर और बाहर आगे बढ़ने में मदद मिली है.

हर स्टोरी: आप किस चीज से प्रेरित रहती हैं ?

लीना: कुछ नया सृजित करने की ख़ुशी. एक नई कहानी, और एक नए माध्यम का प्रयोग, यह एक बहुत ही रोमांचक दुनिया है.

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