ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग इंडस्ट्री में छोटे शहरों के ये स्टार्टअप्स बना रहे 'बड़ा नाम'

छोटे शहरों के बड़े स्टार्टअप्स...

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 अब शहर छोटा हो या बड़ा, सभी जगहों पर लोग ग्रॉसरी शॉपिंग के लिए ऑनलाइन स्टोर्स को ही प्राथमिकता देने लगे हैं। बिग बास्केट और ग्रॉफ़र्स कुछ ऐसे नाम हैं, जिन्हें टियर I शहरों में बड़ा कस्टमर बेस मिला है। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे स्टार्टअप्स हैं, जिन्होंने टियर II और टियर III शहरों में अपनी विश्वसनीयता बनाई है और उन्हें पर्याप्त उपभोक्ता भी मिल रहे हैं।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
आज हम कुछ ऐसे स्टार्टअप्स के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो मध्यम स्तरीय और छोटे शहरों में ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग के क्षेत्र में अपनी पैठ जमाकर यह साबित कर चुके हैं, इस इंडस्ट्री में अभी और कितनी संभावनाएं बाक़ी हैं।

आज से कुछ सालों पहले तक किराने या फिर राशन के सामान के लिए उपभोक्ता, घर के आस-पास की दुकानों पर ही भरोसा करते थे। इसकी एक बड़ी वजह यह भी रही कि मध्यम-वर्गीय परिवारों को उधार पर सामान मिल जाया करता था। लेकिन अब शहर छोटा हो या बड़ा, सभी जगहों पर लोग ग्रॉसरी शॉपिंग के लिए ऑनलाइन स्टोर्स को ही प्राथमिकता देने लगे हैं। बिग बास्केट और ग्रॉफ़र्स कुछ ऐसे नाम हैं, जिन्हें टियर I शहरों में बड़ा कस्टमर बेस मिला है। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे स्टार्टअप्स हैं, जिन्होंने टियर II और टियर III शहरों में अपनी विश्वसनीयता बनाई है और उन्हें पर्याप्त उपभोक्ता भी मिल रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है, इंटरनेट और लगातार बढ़ती मोबाइल यूज़र्स की संख्या।

आपको बता दें कि पेपरटैप, आस्क मी ग्रॉसरी और लोकल बनिया, कुछ ऐसे स्टार्टअप्स रहे हैं, जिनकी असफलता ने साबित किया कि भारत में ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग इंडस्ट्री में ग्राहकों को आकर्षित करना बेहद टेढ़ी खीर है। पेटीएम जैसी बड़ी कंपनी ने भी 2015 में पेटीएम ज़िप नाम की सर्विस के साथ ग्रॉसरी सेक्टर में कदम रखा था, लेकिन इस वेंचर को 3 महीनों के भीतर ही बंद करना पड़ा। फ़्लिपकार्ट के साथ भी कुछ ऐसी ही कहानी रही।

भारत का ऑनलाइन ग्रॉसरी मार्केट 1 बिलियन डॉलर का है और टियर II शहर, ऑनलाइन शॉपिंग के मामले में मेट्रो शहरों से पीछे नहीं हैं। बिग बास्केट और ग्रॉफ़र्स अब मेट्रो शहरों के साथ-साथ छोटे शहरो में भी अपना नेटवर्क फैला रहे हैं। आज हम कुछ ऐसे स्टार्टअप्स के बारे में बात करने जा रहे हैं, जो मध्यम स्तरीय और छोटे शहरों में ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग के क्षेत्र में अपनी पैठ जमाकर यह साबित कर चुके हैं, इस इंडस्ट्री में अभी और कितनी संभावनाएं बाक़ी हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ स्टार्टअप्स के बारे में:

फ़्लिपफ़्रेश, (हुबली, कर्नाटक)

हुबली, बेंगलुरु के बाद कर्नाटक का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यहीं से शानदार ई-कॉमर्स प्राइवेट लि. के अंतर्गत फ़्लिपफ़्रेश की शुरूआत हुई। फ़्लिपफ़्रेश अपने उपभोक्ताओं को सब्ज़ियों, फलों, ग्रॉसरी और घरेलू ज़रूरत के अन्य सामानों की ऑनलाइन शॉपिंग की सर्विस देता है। अमृतशवा टी., सुरेश नेक्कंटी और मंजुनाथ नजलाडिन्नी ने मिलकर इस स्टार्टअप की शुरूआत की थी। यह स्टार्टअप इनवेन्टरी मॉडल पर चलता है और हुबली के आस-पास के किसानों से उत्पाद ख़रीदकर, उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। इससे किसानों को भी पर्याप्त मुनाफ़ा मिलता है और ग्राहकों को ताज़े फल और सब्ज़ियां।

शॉप इट डेली (इंदौर, मध्य प्रदेश)

अगस्त 2014 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप इंदौर और वड़ोदरा में अपनी सर्विसेज़ देता है। हर महीने इस स्टार्टअप के पास 1 लाख से भी ज़्यादा ऑर्डर्स आते हैं। हाल ही में, इसे बेंगलुरु में भी लॉन्च किया गया है। शॉप इट डेली, शहर के 25 किमी. के दायरे में 90 मिनट में डिलिवरी की सुविधा देता है। रीटेलिंग के साथ-साथ स्टार्टअप, कैंटीन्स और कॉर्पोरेट ऑफ़िसों के ऑर्डर्स भी लेता है। पोर्टल के अलावा, वॉट्सऐप और फोन कॉल करके भी उपभोक्ता अपना ऑर्डर दे सकते हैं। अभिषेक भट्ट और सौरव श्रीवास्तव ने मिलकर इस स्टार्टअप की शुरूआत की थी। फ़िलहाल शॉप इट डेली का लक्ष्य है कि भोपाल, उदयपुर, उज्जैन, सूरत, राजकोट और जयपुर जैसे शहरों तक भी अपने ऑपरेशन्स बढ़ाए जाएं।

पिंक सिटी किराना (जयपुर, राजस्थान)

अप्रैल 2014 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप एक ई-कॉमर्स और फोन-कॉमर्स वेंचर है, जो किचन से लेकर बाथरूम में इस्तेमाल होने वाले सामान अपने ग्राहकों को उपलब्ध कराता है। सुदेश पटोदिया और संदीप अग्रवाल ने इस स्टार्टअप की शुरूआत की थी। ये दोनों ही सॉफ़्टवेयर इंजिनियर्स हैं, जबकि संदीप के भाई राहुल अग्रवाल, एक कॉमर्स ग्रैजुएट हैं। जो इस स्टार्टअप के शुरू होने से पहले ही जयपुर के ग्रॉसरी बिज़नेस का अनुभव ले चुके थे।

इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्राहकों को न्यूनतम 800 रुपए का सामान ऑर्डर करना पड़ता है। प्लेटफ़ॉर्म पर ऑनलाइन पेमेंट, कैश ऑन डिलिवरी और कार्ड पेमेंट, सभी ऑपशन्स मौजूद हैं।

घर बैठे बाज़ार (लखनऊ, उत्तर प्रदेश)

नवंबर 2015 में सुरेंद्र चौहान ने इसकी शुरूआत की थी। यह स्टार्टअप, स्वीट्स, ग्रॉसरी, फ़्रूट्स, वेजिटेबल्स और डेयरी प्रोडक्ट्स आदि की विस्तृत रेंज अपने ग्राहकों को उपलब्ध कराता है। उपभोक्ता, वॉट्सऐप, पोर्टल या फिर फोन के ज़रिए अपना ऑर्डर दे सकते हैं। यह स्टार्टअप कई किराना स्टोर्स के साथ जुड़ा हुआ है और 60 मिनट के अंदर अपने उपभोक्ताओं को सामान पहुंचाता है।

कडा (तिरुवनंतपुरम, केरल)

कृष्णा प्रसाद, अनूप जी. कुमार, शान एम. हनीफ़, शिनोज एस. और जेनु जोसेफ़ ने मिलकर 2012 में इस स्टार्टअप की शुरूआत की थी। इस स्टार्टअप को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित प्रदेश के सबसे बड़े आईटी कैंपस टेक्नोपार्क से जुड़े लोगों की ग्रॉसरी संबधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए शुरू किया गया था। फ़िलहाल यह स्टार्टअप पूरे ज़िले में अपनी सुविधाएं मुहैया करा रहा है। कडा, ताज़े फल और सब्ज़ियों के साथ-साथ बेकरी प्रोडक्ट्स, ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स और ताज़ा मीट आदि भी उपलब्ध कराता है। कंपनी इनवेन्टरी मॉडल के तहत 10 से ज़्यादा प्रोडक्ट्स की रेंज ऑफ़र करती है।

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