11 साल की गीतांजलि ने जीता अमेरिका का टॉप यंग साइंसटिस्ट अवॉर्ड

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दो साल पहले हुए फ्लिंट जल संकट ने गीतांजलि राव नाम की किशोरी को सोचने पर मजबूर कर दिया। गीतांजलि को जलस्तर में बढ़ रहे सीसा संदूषण के बारे में चिंता हो रही थी। तब से उसने एक आईडिया पर काम करना शुरू किया।

साभार: ट्विटर
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उन्होंने पानी में सीसा की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक त्वरित, कम लागत वाले परीक्षण का आविष्कार किया है। इस आविष्कार के लिए, उन्हें हाल ही में 'अमेरिका के शीर्ष युवा वैज्ञानिक' शीर्षक के साथ सम्मानित किया गया। 

गीतांजलि अब इस डिवाइस पर आगे काम करना चाहती हैं और उसे बाजार के लिए तैयार करने के लिए इसे संशोधित करना चाहती हैं। भविष्य में, वह खुद को एक एपिडेमियोलॉजिस्ट या आनुवंशिकीवादी के रूप में देखना चाहती हैं।

दो साल पहले हुए फ्लिंट जल संकट ने गीतांजलि राव नाम की किशोरी को सोचने पर मजबर कर दिया। गीतांजलि को जलस्तर में बढ़ रहे सीसा संदूषण के बारे में चिंता हो रही थी। तब से उसने एक आईडिया पर काम करना शुरू किया। उन्होंने पानी में सीसा की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक त्वरित, कम लागत वाले परीक्षण का आविष्कार किया है। इस आविष्कार के लिए, उन्हें हाल ही में 'अमेरिका के शीर्ष युवा वैज्ञानिक' शीर्षक के साथ सम्मानित किया गया था। गीतांजलि 11 साल की हैं। गीतांजलि वहां स्टेम स्कूल हाइलैंड्स रैंच में पढ़ती हैं।

क्या था प्लिप संकट-

संकट 2014 में शुरू हुआ जब लेड के उच्च स्तर की वजह से शहर के जल स्रोत को फ्लिंट नदी में बदल दिया गया। पानी के अनुचित उपचार के कारण जीवन खतरे में थे। सारे नागरिक काफी परेशान थे। गीतांजलि के दिमाग में एक जरूरी बात आई कि हो न हो, फ्लिंट इस समस्या का सामना करने वाला एकमात्र स्थान नहीं है, जरूर बाकी जलस्रोत भी प्रदूषित होंगे। उन्होंने रिसर्च की। गीतांजलि के मुताबिक, संयुक्त राज्य भर में करीब 5000 वॉटर सिस्टम हैं जो लेड से दूषित हैं। उन्होंने लेड की मात्रा मापने वाला यंत्र बना डाला। 

उसी दरम्यान उन्हें डिस्कवरी एजुकेशन 3 एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज के बारे में सुना। ये एक ऐसी राष्ट्रीय प्रतियोगिता थी जो कि रोज़ाना समस्याओं के लिए नए समाधानों के साथ आने के लिए आयोजित की जाती थी। उनके लेड-डिटेक्शन डिवाइस ने उन्हें प्रतियोगिता में जिता दिया और उन्हें 25,000 डॉलर पुरस्कार राशि भी मिली।

साभार: ट्विटर
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कैसे काम करता है ये डिवाइस-

बिजनेस इनसाइडर से बात करते हुए गीतांजलि ने कहा, यह विचार मेरे पास तब आया जब मैंने अपने माता-पिता को पानी में लेड का परीक्षण करते देखा। मुझे लगा कि ये एक विश्वसनीय प्रक्रिया नहीं है और मुझे इसे बदलने के लिए कुछ करना होगा। गीतांजलि ने थीथिस के बाद अपनी डिवाइस का नाम दिया है, ताजे पानी की ग्रीक देवी। गीतांजलि ने पांच महीने की अवधि में अपनी परियोजना पूरी कर ली। यह डिवाइस लेड की पहचान के लिए कार्बन नैनोट्यूब का इस्तेमाल करती है। डिवाइस के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कोलोराडो सार्वजनिक रेडियो को बताया, इसमें तीन मुख्य भाग शामिल हैं। एक कोर डिवाइस, एक ब्लूटूथ विस्तार के साथ एक आवास प्रोसेसर, एक नौ वोल्ट की बैटरी, और एक डिस्पोजेबल कारतूस में प्रवेश करने के लिए एक स्लॉट। और यह सब एक स्मार्टफोन से जोड़ जाता है।

गीतांजलि अब डिवाइस पर आगे काम करना चाहती हैं और उसे बाजार के लिए तैयार करने के लिए इसे संशोधित करना चाहती हैं। भविष्य में, वह खुद को एक एपिडेमियोलॉजिस्ट या आनुवंशिकीवादी के रूप में देखना चाहती हैं।

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