रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद करने सिख वॉलंटियर पहुंचे बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर

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इन शरणार्थियों के पास न तो रहने के लिए छत है और न पेट भरने के लिए खाना। यहां तक कि इनके पास पहनने को कपड़े भी नहीं हैं। इन्हें खाने का एक पैकेट कहीं से मिलता है तो उस पर भीड़ टूट पड़ती है।

फोटो साभार: ट्विटर
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 खालसा इंटरनेशनल ने शरणार्थियों के लिए यहां लंगर लगाया है। वहीं बरसात से बचाने के लिए इन्हें टेंट भी दिए जा रहे हैं। 

खालसा इंटरनेशनल ने लोगों से भी रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद करने की अपील की है। यूनाइटेड नेशन ने रोहिंग्या मसले पर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए म्यांमार की निंदा की है। 

इन दिनों पूरी दुनिया में म्यांमार से भागकर बांग्लादेश और भारत के कुछ इलाकों में शरण ले रहे रोहिंग्या मुसलमानों की काफी चर्चा हो रही है। म्यांमार में जारी नरसंहार के कारण वहां से भागकर आए हजारों रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश और भारत के उत्तर पूर्वी हिस्सों में शरण ली है। इन शरणार्थियों के पास न तो रहने के लिए छत है और न पेट भरने के लिए खाना। यहां तक कि इनके पास पहनने को कपड़े भी नहीं हैं। इन्हें खाने का एक पैकेट कहीं से मिलता है तो उस पर भीड़ टूट पड़ती है। इसी वजह से इन रोहिंग्या मुसलमानों को बदतर जिंदगी में जीना पड़ रहा है।

लेकिन भारत के सिख संगठन, खालसा ऐड इंटरनेशनल बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पहुंचकर वहां उन शरणार्थियों को राहत एवं सहायता सामग्री मुहैया करवा रहा है। म्यांमार के रखाइन राज्य से करीब तीन लाख रोहिंग्या, जुल्म से बचने के लिए बांग्लादेश में पनाह ले चुके हैं। खालसा इंटरनेशनल की एक टीम बीते 10 सितंबर को बॉर्डर पह पहुंची और इन लोगों ने शरणार्थियों को भोजन व राहत सामग्री वितरित की। संगठन के मैनेजिंग डायरेक्टर अमरप्रीत सिंह ने कहा, 'हमने एक बड़ा राहत व बचाव अभियान शुरू किया है हमें आपके मदद की जरूरत है।'

अमरप्रीत सिंह ने बताया, 'आज हमारा पहला दिन था। हमने राहत व बचाव का काम शुरू करने से पहले यहां के हालात पर नजर डाली। हम करीबन 50000 लोगों की सहायता के लिए सहायता सामग्री लाये थे लेकिन यहाँ 2 लाख से ज्यादा लोग हैं।' खालसा इंटरनेशनल ने शरणार्थियों के लिए यहां लंगर लगाया है। वहीं बरसात से बचाने के लिए इन्हें टेंट भी दिए जा रहे हैं। मगर शरणार्थियों की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई है। ऐसे में संस्था को खाने-पीने और तंबू का इंतजाम करने में परेशानी आ रही है। लंगर चालू रखने के लिए संस्था को सामान लाने में भी परेशानी हो रही है, क्योंकि ये गांव ढाका से दस घंटे की दूरी पर है।

खालसा इंटरनेशनल ने लोगों से भी रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद करने की अपील की है। यूनाइटेड नेशन ने रोहिंग्या मसले पर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए म्यांमार की निंदा की है। पिछले वर्ष के अंत में भी ऐसे ही उग्रवादी हमले के बाद वहां हुई हिंसा के बाद लगभग 80,000 रोहिंग्या वहां से भागकर बांग्लादेश आए थे। रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों पर भारत में भी कई जगहों पर प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारी रोंहिग्या शरणार्थियों को भारत में पनाह देने की वकालत कर रहे हैं। वहीं भारत सरकार का कहना है कि रोंहिग्या मुसलमानों को उनके देश वापस भेज दिया जाएगा।

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