मोदी कैबिनेट के नये चेहरे

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मोदी मंत्रिमंडल में 19 नये चेहरे शामिल, जावडेकर लेंगे स्मृति का स्थान

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल के तहत आज रात स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास जैसे अहम मंत्रालय से हटाकर कम अहमियत वाले कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गई। प्रकाश जावड़ेकर नए मानव संसाधन विकास मंत्री होंगे जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार छोड़ दिया है।

हैदराबाद में दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी और जेएनयू विवाद जैसे वाकयों की वजह से ईरानी का लगभग दो साल का कार्यकाल विवादों में रहा है। बहरहाल, ईरानी को महत्वहीन समझा जाने वाला कपड़ा मंत्रालय दिए जाने से यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि कहीं ऐसा इसलिए तो नहीं किया गया कि वह 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रचार का चेहरा बनाए जाने की स्थिति में वह प्रचार के लिए ज्यादा वक्त निकाल सकें।

प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिपरिषद के विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया, जिनमें एस एस आहलूवालिया, एम जे अकबर और विजय गोयल जैसे जानेमाने नाम शामिल हैं। प्रकाश जावड़ेकर को सरकार के इस दूसरे विस्तार में तरक्की देकर कैबिनेट रैंक के मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई । अकबर को विदेश राज्य मंत्री बनाया गया है। विदेश मंत्रालय में वी के सिंह एक अन्य राज्य मंत्री हैं।

शहरी विकास मंत्री एम वैंकैया नायडू को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। हालांकि, उनसे संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। यह जिम्मेदारी अब रसायन एवं उवर्रक मंत्री अनंत कुमार संभालेंगे।

मंत्रिपरिषद में हुए इस फेरबदल में डी वी सदानंद गौड़ा से कानून एवं न्याय मंत्रालय वापस ले लिया गया। कानून एवं न्याय मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अब रविशंकर प्रसाद संभालेंगे। गौड़ा को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय आवंटित किया गया है। जयंत सिन्हा को वित्त राज्य मंत्री के पद से हटाकर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री बनाया गया है। इस पद पर अब तक महेश शर्मा थे। शर्मा अब सिर्फ संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

मंत्रिपरिषद में हुए इस फेरबदल में पांच राज्य मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। पांच मंत्रियों को हटाने और आज के विस्तार के बाद अब मोदी मंत्रिपरिषद में 78 मंत्री हो गए हैं।

कैबिनेट मंत्रियों में चौधरी वीरेंद्र सिंह को ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय से हटाकर इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की जिम्मेदारी अब नरेंद्र सिंह तोमर को दी गई है। वह पहले खदान एवं इस्पात मंत्री थे। अन्य कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के प्रभार में कोई बदलाव नहीं किया गया।

बिजली, कोयला एवं अक्षय उर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को खदान मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को संचार राज्य मंत्री :स्वतंत्र प्रभार: की जिम्मेदारी दी गई है जबकि संतोष कुमार गंगवार को जयंत सिन्हा की जगह वित्त मंत्रालय में भेजा गया है । इससे पहले, गंगवार कपड़ा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। अर्जुन राम मेघवाल वित्त मंत्रालय में दूसरे राज्य मंत्री होंगे।

पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी संभाल रहे जावड़ेकर एकमात्र ऐसे मंत्री रहे, जिन्हें कैबिनेट रैंक में तरक्की दी गई, जबकि सभी नए मंत्रियों को राज्य मंत्री के तौर पर शपथ दिलाई गई । इससे पहले, ऐसी अटकलें थीं कि गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) निर्मला सीतारमण को कैबिनेट रैंक में तरक्की दी जाएगी। नए मंत्रियों में विजय गोयल को युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। असम के मुख्यमंत्री बनने से पहले इस पद पर सर्वानंद सोनोवाल काबिज थे। अनिल माधव दवे को पर्यावरण मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।

भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है जबकि डॉ. एस आर भामरे को रक्षा राज्य मंत्री बनाया गया है। आहलूवालिया को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है।

राव इंदरजीत सिंह अब रक्षा राज्य मंत्री नहीं रहेंगे लेकिन योजना मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री के तौर पर बने रहेंगे। उन्हें शहरी विकास राज्य मंत्री की भी जिम्मेदारी दी गई है। हरिभाई चौधरी को गृह राज्य मंत्री के पद से हटाकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री के पद पर भेजा गया है। गृह मंत्रालय में चौधरी की जगह अब हंसराज गंगाराम अहिर लेंगे जो रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री के पद पर थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना दूसरा मंत्रिपरिषद विस्तार मई 2014 में सत्ता की बागडोर संभालने के दो साल से थोड़े अधिक समय बाद किया। कई दलित और ओबीसी नेताओं को अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जगह दी गई है।


अजय टम्टा (उत्तराखंड), अर्जुन राम मेघवाल (राजस्थान), कृष्णा राज (उप्र), अठावले (महाराष्ट्र), रमेश सी जिगाजिनागी (कर्नाटक) उन दलित चेहरों में शामिल हैं जिन्हें राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, मोदी, उनकी मंत्रिपरिषद के सहयोगी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, सहयोगी दलों के नेताओं समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। कांग्रेस का कोई भी नेता मौजूद नहीं था। जिन अन्य लोगों को शपथ दिलाई गई उनमें पी पी चौधरी, सी आर चौधरी (राजस्थान), ए एम दवे, फग्गन सिंह कुलस्ते (मध्य प्रदेश), महेंद्र नाथ पांडेय (उत्तर प्रदेश), पुरषोत्तम रूपाला, जे भाभोर और मनसुखभाई मंडाविया (गुजरात), राजन गोहैन (असम) और एस आर भामरे (महाराष्ट्र) शामिल हैं।

अकबर को हाल में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुना गया था जबकि गोयल उच्च सदन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। अहलूवालिया दार्जिलिंग से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे जबकि अनुप्रिया पटेल उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर से निर्वाचित हुई थीं। मंत्रिपरिषद से जिन मंत्रियों को हटाया गया उसमें निहालचंद, रामशंकर कठेरिया, सांवरलाल जाट, मनसुखभाई डी वासव और एम के कुंदरिया शामिल हैं। गोयल और फग्गन कुलस्ते को छोड़कर शेष नए चेहरे हैं। वहीं, कुछ अन्य भाजपा शासित राज्य सरकारों में मंत्री रह चुके हैं।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि ये पसंद दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में पार्टी के मत आधार को बढ़ाने के भाजपा के प्रयासों को रेखांकित करते हैं। जिन राज्यों में लोकसभा चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया और जहां राज्य विधानसभा चुनाव होने हैं उन्हें अब पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है। भगवा पार्टी उत्तर प्रदेश में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव से पहले समाज के कमजोर तबके को लुभाने का प्रयास कर रही है।

 सुभाष रामराव भामरे ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। महाराष्ट्र के धुले से भाजपा सांसद भामरे की गिनती देश के नामी कैंसर विशेषज्ञों में होती है। भामरे 2014 में पहली बार सांसद बने।

 पीपी चौधरी राजस्थान के पाली सांसद हैं। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट चौधरी 2014 में पहली बार सांसद बने। 12 जुलाई 1953 को जन्में पीपी चौधऱी राजस्थान के पाली निर्वाचन क्षेत्र से हैं। पी.पी. चौधरी : खेतों की जुताई से लेकर अधिवक्ता और सांसद होने तक आरएसएस में रहे। एक गरीब परिवार में जन्मे 62 वर्षीय चौधरी 1961 में आठ साल की उम्र में ही ‘बाल स्वयंसेवक’ के रूप में आरएसएस से जुड़ गए थे। राजस्थान के जोधपुर जिले के भावी से ताल्लुक रखने वाले चौधरी ने कानून के अध्ययन के लिए कठिन परिश्रम किया और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बने। भाजपा ने उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में पाली से टिकट दिया था। चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की। संवैधानिक मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले चौधरी का दावा है कि उन्होंने लगभग चार दशक के अपने व्यावसायिक करियर में लगभग 11,000 मामलों में जिरह की है। वह 1990 में केंद्र सरकार के स्थाई अधिवक्ता भी थे। उन्होंने किसानों और भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामलों तथा जनहित याचिकाओं से जुड़े मामलों को भी देखा है। उन्होंने राजस्थान के अर्ध-शिक्षकों से संबंधित मामले को भी उच्चतम न्यायालय तक लड़ा और वसुंधरा राजे सरकार ने सत्ता में आने के बाद इन शिक्षकों को नौकरी प्रदान की। वह राजग द्वारा लाए गए विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक को देखने वाली संयुक्त संसदीय समिति का भी हिस्सा थे। बाद में वह इस समिति से हट गए। चौधरी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों, खासकर लड़कियों के शैक्षिक स्तर को बेहतर बनाने के लिए भी काम किया।

 सीआर चौधरी,  राजस्थान के नागौर से लोकसभा सदस्य सीआर चौधरी  मेवाड़ यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके हैं साथ ही राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं

अनुप्रिया सिंह अपना दल की 35 वर्षीय अनुप्रिया सिंह पटेल यूपी के मिर्जापुर से सांसद हैं। वह इससे पूर्व वाराणसी के रोहनिया से विधायक रही हैं। उनके पिता सोन पटेल ने अपना दल की स्थापना की थी। वह साइकोलॉजी और प्रबंधन में स्नातकोत्तर की उपाधि रखती हैं। अनुप्रिया पटेल अपनी पार्टी के अंदर ही उपजी चुनौतियों पर विजय प्राप्त करके आगे बढ़ी हैं। और उन्होंने उत्तर प्रदेश के मजबूत कुर्मी नेता के तौर पर पहचान बनायी है। अनुप्रिया की मां ने उन्हें तथा छह अन्य लोगों को पिछले साल पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में दल से निकाल दिया था। ऐसी खबरें हैं कि कृष्णा ने भाजपा से कहा था कि अगर वह अनुप्रिया को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल करती है तो वह उससे नाता तोड़ लेंगी, लेकिन भगवा दल के नेता अपने रुख पर कायम रहे और अनुप्रिया को काबीना में जगह दी।

मनसुख मंडविया गुजरात से राज्य सभा के सदस्य हैं।1972 में जन्में मनसुख वेटरनरी लाइव स्टाक इंस्पेक्टर सर्टिफिकेट की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। किसान परिवार से हैं। 2002 से 2007 तक गुजरात विधान सभा में रहे हैं। गुजरात एग्रो इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन के अध्यक्ष रहे हैं।

कृष्णा राज उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर से सांसद हैं। 2014 में पहली बार सांसद बनीं। 49 वर्षीय राज इससे पूर्व कृष्णा वर्ष 1996 और 2007 में मोहम्मदी सीट से भाजपा की विधायक रह चुकी हैं। अवध विश्वविद्यालय से परास्नातक कृष्णा एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ कृषि के क्षेत्र में भी महारत रखती हैं। पहली बार सांसद चुने जाने के बाद वह काफी सक्रिय रही हैं। वह संसद की उर्जा सम्बन्धी स्थायी समिति तथा ग्राम्य विकास, पंचायतीराज तथा पेयजल एवं साफसफाई मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की सक्रिय सदस्य भी हैं।

अजय टम्टा उत्तराखंड के अलमोड़ा से सांसद अजय टम्टा पहली बार 2014 में सांसद बने। वे 2012 में अलमोडा से विधायक रह चुके हैं। जिला पंचायत सदस्य से राजनीति की शुरुआत कर राष्ट्रीय कैबिनेट तक पहुंचने वाले अजय टम्टा उत्तराखंड में भाजपा के युवा चेहरे के साथ-साथ दलित नेता के रूप में उभर कर सामने आएं हैं। टम्टा भाजपा संगठन में अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अल्मोड़ा जिले के दुगालखोला के एक दलित परिवार में 16 जुलाई, 1972 को जन्में अजय टम्टा के राजनीतिक सफर की शुरुआत जिला पंचायत सदस्य के रूप में हुई। अजय टम्टा ने सबसे पहले जिले के तल्ला तिखून से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद वे 1996 जिलापंचायत उपाध्यक्ष बने। 2007 में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर खण्डूरी कैबिनेट में राज्य और कैबिनेट मंत्री बने। 2012 में टम्टा एक बार फिर विधायक बने। 2014 में लोकसभा के लिए चुने गये।

 महेंद्र नाथ पांडे ने भी राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पाण्डे हिंदी में एम ए डॉक्टरेट कर चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश की कैबिनेट भी मंत्री रह चुके हैं। महेन्द्रनाथ पाण्डेय काशी क्षेत्र के प्रमुख ब्राहमण चेहरा हैं। पेशे से कृषि विशेषज्ञ पाण्डेय की गिनती भाजपा के अतिवरिष्ठ नेताओं में की जाती है। अपने छात्रजीवन से ही भाजपा की युवा शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सक्रिय रूप से जुड़े रहे पाण्डेय पार्टी के काशी क्षेत्र के अध्यक्ष भी रहे हैं। काशी क्षेत्र के प्रमुख ब्राहमण चेहरों में गिने जाने वाले पाण्डेय वर्ष 2014 में चंदौली सीट से पहली बार सांसद चुने गये। पाण्डेय पूर्वी उत्तर प्रदेश में खासा प्रभाव रखते हैं, और उन्हें सांगठनिक मामलों की खासी जानकारी और व्यापक अनुभव भी है। पाण्डेय वर्ष 1991 और 1996 में विधायक भी चुने गये थे और 1997 में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया था। एक साल बाद ही उन्हें पदोन्नति देकर स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री नियुक्त किया गया था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर चुके पाण्डेय ने पत्रकारिता में परास्नातक की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा वह हिन्दी में डाक्टरेट भी कर चुके हैं।

जसवंतसिंह भाभोर गुजरात के दाहोद से भाजपा सांसद जसवंतसिंह भाभोर की पहचान पर्यावरण प्रेमी किसान के रूप में है। भाभोर ने बीए बीएड की शिक्षा प्राप्त की है। वे गुजरात की विधान सभा के लिए पाँच बार चुने गये हैं और यहाँ पर मंत्री भी रह चुके हैं।

अर्जुनराम मेघवाल, राजस्थान के बीकानेर से सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पहली बार 2009 में सांसद चुने गए। मेघवाल रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं। अर्जुन राम अपने संसदीय क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए जाने जाते हैं। उन्हें सांसद महारत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। वे पार्टी के व्हीप हैं। पेट्रोल बचाने की मुहिम छेड़ने के लिए भी वे जाने जाते हैं। कई बार वे अपनी साइकिल से संसद आते हैं। नौकरशाह से नेता बने अर्जुनराम मेघवाल, लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक, साइकिल से संसद जाने के लिए जाने जाते हैं। मेघवाल का जन्म बीकानेर जिले के किशमिदेसर गांव में बुनकर परिवार में हुआ था। उन्होंने एलएलबी करते हुए अपने करियर की शुरआत एक टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में की थी और दो बार के असफल प्रयास के बाद वह राजस्थान लोकसेवा में शामिल हुए। बाद में उनकी पदोन्नति भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में हो गई। दो बार के सांसद 61 वर्षीय मेघवाल 2009 में बीकानेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार निर्वाचित हुए थे।

एमजे अकबर ,  पत्रकार एमजे अकबर ने राज्यमंत्री राज्यसभा से सांसद हैं और भाजपा के प्रवक्ता भी हैं। मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होना पत्रकार और लेखक एमजे अकबर के राजनैतिक करियर में उल्लेखनीय बदलाव है। वे 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से नजदीकी के चलते बतौर कांग्रेसी सांसद राजनीति में आए थे। हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए 65 वर्षीय अकबर भाजपा का स्पष्टवादी और आधुनिक मुस्लिम चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने बड़ी चतुराई से हिंदुत्व अतिवाद की आलोचनाओं को मोदी के विकास के एजेंडे के तले दबाया इसलिए बचाव के मौकों पर पार्टी उन पर भरोसा करती है। पार्टी के प्रवक्ता रहते हुए उन्होंने कई बार सरकार की विदेश नीति पर चर्चा भी की है। वे जाने माने संपादक रह चुके हैं और जवाहरलाल नेहरू की जीवनी समेत कई चर्चित पुस्तकें भी लिख चुके हैं। 1980 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीब आने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया था। उन्होंने 1989 में बिहार के किशनगंज से लोकसभा चुनाव जीता था लेकिन उस साल कांग्रेस बुरी तरह हार गई थी। 1991 में गांधी की मौत के बाद वे पार्टी से अलग हो गए और फिर से पूर्णकालीक पत्रकार बन गए थे। भाजपा को उम्मीद है कि अकबर पार्टी में एक धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाले मुस्लिम व्यक्ति की कमी को पूरा करेंगे।

पुरुषोत्तम रूपाला गुजरात से राज्य सभा सदस्य हैं। वे गुजरात सरकार में मंत्री रह चुके हैं। पार्टी में वरिष्ठ नेता हैं। गोवा में पार्टी के  प्रभारी भी हैं।

अनिल दवे,  मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद अनिल दवे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वे एम कॉम की उपाधि रखते हैं। 2009 वें राज्य सभा के लिए चुने गये थे।हिंदी और अंग्रेज़ी के लेखक के रूप में उनकी 8 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

राजन गोहेन,  असम से भाजपा सांसद राजन गोहेन  का जन्म 26 नवंबर 1950 को हुआ। नौगां लोकसभा से व 1999 से लगातार चुने जाते रहे हैं। भाजपा नेता गोहेन गुवाहाटी विश्वविद्यालय से बी ए एल एल बी की उपाधि रखते हैं। 

रामदास आठवले, आरपीआई सांसद रामदास आठवले को मंत्री के रूप में शपथ दिलाई। महाराष्ट्र के प्रमुख दलित नेता रामदास अठावले ट्रेड यूनियन नेता रहे हैं और संसद तथा संसद के बाहर अपनी धारदार टिप्पणियों और हास्य पैदा करने वाला भाषण देने के लिए लोकप्रिय हैं। वह राजग के सहयोगी दल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं। वह राकांपा-कांग्रेस गठबंधन से हटने के बाद से 2011 से ही राजग का हिस्सा हैं। वह फिलहाल राज्यसभा में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और तीन बार लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। आरपीआई नेता ने पिछली बार 2004 से 2009 तक मुंबई उत्तर मध्य संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वह 1998 में पहली बार निचले सदन के लिए निर्वाचित हुए थे। अठावले पिछले कुछ समय से केंद्र सरकार में मंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे थे। खुद को ‘भारत का निडर चीता’ बताते हुए 56 वर्षीय नेता ‘दलित पैंथर मूवमेंट’ का नेतृत्व करने का दावा करते हैं। यह आंदोलन पूरी दुनिया में समानता, न्याय और मानवाधिकारों के लिए एक सामाजिक आंदोलन है। अठावले ने यह कहकर विवाद पैदा किया जब उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय में एक दलित शोधार्थी के आत्महत्या की पृष्ठभूमि में आत्मरक्षा के लिए दलितों के लिए आग्नेयास्त्रों की मांग कर डाली। महाराष्ट्र के सांगली जिले में अगलगांव से स्नातक अठावले को 1990 में महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए निर्वाचित किया गया था और वह 1990 में कैबिनेट मंत्री बने। अठावले ने मराठवाड़ा विद्यापीठ नामांतरण में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। यह मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम अंबेडकर के नाम पर रखने के लिए एक दलित आंदोलन था। अंबेडकर स्मारक के निर्माण के लिए मुंबई में इंदु मिल की जमीन दिए जाने के लिए चलाए गए आंदोलन में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी। अठावले ने मुंबई से निकलने वाली साप्ताहिक पत्रिका ‘भूमिका’ का संपादन भी किया। वह परिवर्तन प्रकाशन के लिए प्रकाशक रहे हैं। उन्होंने मराठी फिल्म ‘अन्य याचा प्रतिकार’ और ‘जोशी की कांबले’ जैसी फिल्मों में भी भूमिका निभाई। उन्होंने मराठी ड्रामा ‘एकचा प्याला’ और कुछ अन्य में भी अभिनय किया।

विजय गोयलदिल्ली के भाजपा नेता विजय गोयल वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रहे हैं। दिल्ली में दरकिनार कर दिए गए विजय गोयल ने शानदार वापसी की। केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में विजय गोयल का शामिल होना एक तरह से उनकी वापसी है, क्योंकि दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद संजोए गोयल को राजस्थान से राज्यसभा में आना पड़ा। तीन बार लोकसभा सदस्य रहे गोयल पिछले दो विधानसभा चुनावों में दरकिनार किए जाने से पहले राष्ट्रीय राजधानी के कद्दावर नेता थे। वे अटल बिहारी वाजपेयी की पहली राजग सरकार में प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री थे। मीडिया में पैठ रखने वाले गोयल की पहचान एक कुशल नेता के बतौर होती है। पार्टी के एक हिस्से का मानना है कि उनका इस्तेमाल आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की काट के लिए किया जाएगा। राज्यमंत्री के रूप में 62 वर्षीय गोयल पहले भी युवा मामले और खेल तथा संसदीय मामलों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने पहली बार 2014 में राजस्थान से राज्यसभा में प्रवेश किया। राज्यसभा के उनके बायोडेटा के मुताबिक उन्होंने लाटरी पर प्रतिबंध लगाने के लिए देशव्यापी मुहिम चलाई थी। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान के खिलाफ भी उन्होंने आंदोलन छेड़ा था।

रमेश चंदप्पा ,कर्नाटक के बीजापुर से सांसद रमेश चंदप्पा मोदी सरकार में राज्यमंत्री मंत्री बने।

एसएस आहलूवालियादार्जिलिंग से सांसद एसएस आहलूवालिया दिल की बात कहने के लिए मशहूर हैं।  पी वी नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में मंत्री से लेकर प्रमुख विधेयकों पर भाजपा के लिए ‘शोधकर्ता’ की जिम्मेदारी निभा चुके सुरेंद्रजीत सिंह आहलूवालिया के पार्टी लाइन से हटकर सभी दलों से संपर्क हैं और शब्दों को तौलकर बोलने के लिए पहचाना जाता है। पटना के इस राजनीतिज्ञ को किसी भी मुद्दे पर अपनी एक ठोस राय कायम करने के लिए जाना जाता है फिर भले उनकी राय पार्टी के रूख से अलग हो। संसद की प्रमुख लोक लेखा समिति में उन्हें नामित नहीं किया गया था। विवादित भूमि विधेयक में संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में आहलूवालिया ने यह सुनिश्चित किया कि समिति में मौजूदा राजनीतिक विभाजन से कार्यवाही बाधित न हो। भाजपा में शामिल होने के बाद आहलूवालिया पार्टी के लिए बहुत उपयोगी साबित हुए। भाजपा के विपक्ष में रहने के दौरान उन्होंने 2जी घोटाले पर बनी जेपीसी के सदस्य के रूप में एक अहम भूमिका निभाई और कागजों के ढेर को पढ़कर, उनमें से जरूरी बातें लिखना और फिर प्रतिद्वंद्वी पर हमला बोलने के लिए तर्कों के हथियार ढूंढ निकालना उनकी खासियत मानी जाती है। जब वह सांसद नहीं भी थे, तब भी उन्हें विभिन्न स्थायी समितियों की सिफारिशों को देखने के लिए कहा गया था। आहलूवालिया चटख रंग की पगड़ी पहनना पसंद करते हैं। वह पंजाबी के अलावा बंगाली, भोजपुरी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा पर खास पकड़ रखते हैं। दार्जीलिंग से लोकसभा सदस्य आहलूवालिया 1986-92, 1992-98, 2000-06 और 2006-12 में राज्यसभा में बिहार और झारखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2012 में झारखंड से अपनी सीट खोने से पहले तक वह राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता भी रहे।

फग्गन सिंह कुलस्ते  मध्यप्रदेश से सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी मंत्री के रूप में शपथ ली।

प्रकाश जावड़ेकर का प्रमोशन, ली कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ। अभी वन और पर्यावरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। (पीटीआई )