'वायु हाईब्रीड चिलर' ठंडक एसी जितनी, बिजली की खपत कूलर के बराबर

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गर्मियों के मौसम में राहत पाने के लिए अगर आपको अपने कमरे में तापमान एयर कंडीशनर का मिले और बिजली का बिल कूलर के खर्चे के बराबर आए तो आप कैसा महसूस करेंगे। जाहिर है ऐसे में जहां ठंडक का अहसास हो होगा वहीं आपकी जेब भी गर्म रहेगी। कुछ ऐसी ही कोशिश की है इंदौर में रहने वाले एक दंपत्ति डॉक्टर प्रियंका मोक्षमार और उनके पति प्रणव मोक्षमार ने। ‘वायु’ नाम की ये मशीन रिवॉल्यूशनरी तकनीक से बना एक अनूठा उत्पाद है। जो ना तो कूलर है और ना ही ये एयर कंडीशनर। लेकिन ये बिजली की बचत के साथ बेहतरीन कूलिंग परफारमेंस भी देता है।

डॉक्टर प्रियंका मोक्षमार कभी प्रोफेसर थीं जो एमबीए के छात्रों को मार्केटिंग के गुर सिखातीं थीं तो वहीं उनके पति प्रणव ने 14 साल तक एयर कंडीशनर बनाने वाली मल्टीनेशनल कंपनियों के लिये काम किया। प्रणव चाहते थे कि वो अपना कुछ काम करें, इसलिए वो जयपुर में नौकरी छोड़ इंदौर आ गये। यहां रहकर उन्होने एयर कंडीशनर का कारोबार करना शुरू किया। ये काम उन्होने अपने घर से ही किया। तब इन्होने महसूस किया कि घर में ऑफिस होने के कारण हर वक्त एयर कंडीशनर चलता रहता था इस वजह से बिजली का बिल काफी ज्यादा आने लगा। तो इन्होने कूलर का इस्तेमाल करना शुरू किया और पानी में बर्फ डालकर उससे ठंडी हवा लेने की कोशिश की, लेकिन उनकी ये तरकीब ज्यादा काम नहीं आई, क्योंकि इसमें दिक्कत थी कि पानी में बार बार बर्फ डालनी होती थी इसके अलावा उनके पास इतना वक्त नहीं था कि वो कूलर के लिये अलग से बर्फ जमा कर सकें। इसलिए एक दिन प्रणव मोक्षमार ने अपने एक कर्मचारी से कहा कि वो एक कंप्रेसर और कॉपर पाइप का इंतजाम करे, ताकि कूलर के अंदर ही बर्फ बनाई जा सके। प्रणव की कोशिश का प्रियंका मोक्षमार ने हल्का विरोध किया और उनसे कहा कि वो ऐसा कर अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं, बावजूद प्रणव ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। इस तरह कुछ दिन प्रणव अपनी इस कोशिश में लगे रहे और एक रात उन्होने अपनी पत्नी प्रियंका को आधी रात में उठाया और उनसे कहा कि बच्चों के कमरे में चलो और देखो की उन्होने जो मशीन बनाई है उससे कमरे का कितना तापमान है। पति की जिद्द के आगे प्रियंका को झुकना पड़ा और जब वो बच्चों के कमरे में गई तो वहां पर कूलर चल रहा था और कमरे का तापमान 18 डिग्री के आसपास था। ये देख प्रियंका हैरान रह गई। इसके बाद प्रणव अपने इस उत्पाद के सुधार में जुट गये। साथ ही उन्होने एक कंसल्टेंट की सलाह पर इसके पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया और साल 2014 इनको पेटेंट मिल गया। इस बीच पति पत्नी की इस जोड़ी ने अपने इस उत्पाद पर कई तरह के टेस्ट किये, कुछ छोटे-छोटे डीलरों के पास अपने उत्पाद को रखा और ग्राहकों से उनकी राय ली ताकि उसमें और सुधार किया जा सके।

पेटेंट मिलने के बाद प्रणव नहीं जानते थे कि उनको क्या करना है, क्योंकि प्रियंका एमबीए छात्रों का पढ़ाकर खुश थीं वहीं प्रणव भी अपने एयर कंडीशनर के कारोबार में बढ़िया काम कर रहे थे। इसलिये इन्होने सोचा कि क्यों ना अपने इस उत्पाद का पेटेंट बेच दिया जाए। जिसके बाद प्रणव ने कई कंपनियों से बातचीत की तो कूलर बनाने वाली एक नामी कंपनी ने इनको अपने उत्पाद का प्रेजेंटेशन देने को कहा। इस तरह जब प्रणव और प्रियंका अपने उत्पाद की जानकारी दे रहे थे तो प्रियंका ने देखा कि वहां पर बैठे लोग उनके उत्पाद में गहरी रूची दिखा रहे हैं। इससे प्रियंका को महसूस हुआ कि उनके उत्पाद में काफी दम है। इसके बाद उन्होने अपने पति से कहा कि वो उत्पाद के पेटेंट को बेचने की ना सोचें और खुद ही कंपनी बनाकर इसे बेचने का काम करे। प्रणव इसके लिये तैयार हो गये और प्रियंका ने भी अपनी नौकरी छोड़ पति का साथ देने का फैसला लिया।

काम बड़ा था लिहाजा इनको पैसे की कमी का सामना करना पड़ा तो दोनों ने फैसला लिया कि वो फंडिग हासिल करने के लिए बड़े कारोबारियों से बात करेंगे, लेकिन इनको इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद इन्होने किसी तरह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से बात की और उनको अपने प्रोजेक्ट की जानकारी दी। जिससे वो काफी प्रभावित हुए और इनको आसान शर्तों पर 1 करोड़ रुपये का लोन देने का फैसला लिया। इसके अलावा इन दोनों ने अपनी जमीन जायदाद को बेच कर साथ ही बचत का पैसा जुटाया और अपनी कंपनी खड़ी की। इस तरह 5 लोगों से शुरू हुई उनकी इस कंपनी में आज करीब चालीस लोग काम करते हैं। इनकी अपनी फैक्टरी है जहां पर इनके अपने उत्पाद तैयार किये जाते हैं। 'वायु' नाम से बिकने वाले ये उत्पाद ना सिर्फ मध्यप्रदेश में बल्कि बेंगलुरू, दिल्ली, नागपुर, भिलाई सहित दूसरे खूब बिक रहे हैं। प्रियंका का कहना है कि उनका नेटवर्क हर दिन बढ़ रहा है। एक शहर में एक डिस्ट्रीब्यूटर रखा गया है। प्रियंका के मुताबिक "'वायु हाईब्रीड चिलर' ये ना तो कूलर की श्रेणी में आता है और ना ही एयरकंडीशनर की। वायु इन दोनों के बीच की श्रेणी का है इसलिये इसे ये नाम दिया गया है।" 

'वायु हाईब्रीड चिलर' का सबसे छोटा उत्पाद दो सौ वर्ग मीटर को आसानी के ठंडा कर देता है और ये केवल ढाई सौ वॉट ही बिजली लेता है, जबकि इतनी ही जगह को ठंडा करने के लिए एयर कंडीशनर कम से कम 21सौ वॉट बिजली खर्च करता है। इस उत्पाद की कीमत साढे 23 हजार रुपये से शुरू होती है। जबकि 10 टन का "'वायु हाईब्रीड चिलर' करीब 95 हजार रुपये का मिल जायेगा। "'वायु हाईब्रीड चिलर' के बाजार में फिलहाल चार मॉडल हैं जबकि दो और दूसरे मॉडल जल्द ही बाजार में आने वाले हैं। "'वायु हाईब्रीड चिलर' का इस्तेमाल घरों के अलावा इंडस्ट्रियल इलाकों में भी हो सकता है। चार महीनों के दौरान इनके पास एक हजार से भी ज्यादा "'वायु हाईब्रीड चिलर' की मांग आ चुकी है, जबकि इनकी योजना दूसरे पेटेंट उत्पादों को भी जल्द ही बाजार में उतारने की है। ताकि देश में उर्जा की ज्यादा से ज्यादा बचत की जा सके। 

वेबसाइट : www.vaayuindia.com

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