अगर लाइफस्टाइल एथनिक है तो “EthnicShack” तक आपको आना ही होगा...

एथनिक लाइफस्टाइल की चाहत हो तो आइये “EthnicShack”देहाती, पारंपरिकता और आधुनिकता का अनोखा मिश्रणसितंबर, 2013 में हुई थी “EthnicShack” की स्थापना

0

कभी-कभी हमें दिल की भी सुन लेनी चाहिए। सृजता भटनागर ने भी अपने दिल की आवाज सुनी। यही वजह है कि जहां वो पहले नौकरी करती थी आज खुद अपने पैरों पर खड़े होकर दूसरों के लिए राह बना रही हैं। सृजता भटनागर ने ईएसपीएन क्रिकइंफो के ऑनलाइन उत्पाद प्रबंधन में शानदार काम किया था लेकिन अपने दिल की सुनने वाली सृजता हथकरघा में अपना हुनर आजमाना चाहती थीं। इसके लिए वो शिल्पकारों और कारीगरों को साथ मिलाकर एक मुहिम चलाने की ख्वाहिश रखती थीं। सृजता का EthnicShack उद्यम उनकी इसी ख्वाहिश को हकीकत में बदल रहा है। ये वो उद्यम है जिसमें देहाती, पारंपरिक और आधुनिकता का मिश्रण है।

सृजता भटनागर का जन्म यूं तो पश्चिम बंगाल में हुआ था लेकिन उनके पिता का अकसर तबादला होता रहता था इस कारण उनको आस पड़ोस और दोस्तों का वो साथ नहीं मिला जिसको ज्यादातर लोग अपने आसपास हासिल करते हैं। बावजूद इसके वो हर वक्त नई जगह पर मिलने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहती थीं। इससे उनमें एक तरह का आत्मविश्वास पैदा होता। सृजता का कहना है कि ऐसे माहौल में आप ना सिर्फ खुले दिमाग के साथ बढ़े होते हैं बल्कि सामने वाली चीजों को निष्पक्ष होकर देखते हैं। वो बताती हैं कि उनकी दादी ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी और वो कई बार उनसे किताब मांगकर पढ़ती थीं। जबकि उनके दादाजी एक जाने माने डॉक्टर थे। परिवार ने उनको परवरिश के दौरान सिखा दिया था कि अपने हक के लिए कैसे लड़ा जाता है और दूसरों की सेवा करना कितना जरूरी है।सृजता कहती हैं कि उनके पिता बचपन में कहते थे कि “जब तुम 18 साल की हो जाओगी तो मैं तुमको घर से बाहर निकाल दूंगा ताकि तुम खुद दुनिया से लड़ सको।” और उन्होने ऐसा ही किया। वो बताती हैं कि 12वीं के बाद पढ़ाई के लिए उनको हॉस्टल भेज दिया गया जहां पर वो अकेली रहती थी। यही वजह है कि पहले वो कोलकाता रही, फिर चेन्नई और बाद में बेंगलौर। चेन्नई में जब वो एमबीए करने के बाद नौकरी कर रही थी उसी दौरान उन्होने शादी कर ली। शादी के बाद उनके पति बेंगलौर में नया काम तलाश रहे थे। इस वजह से उनको अपने पति के साथ बेंगलौर आना पड़ा।

सृजता भटनागर
सृजता भटनागर

सृजता बताती हैं कि उनके परिवार में कभी कोई उद्यमी नहीं रहा और वो अपनी पीढ़ी की पहली सदस्य थीं जिन्होने इस क्षेत्र में कदम रखा था। क्योंकि उनके पिता या तो सरकारी नौकरी में थे या फिर पीएसयू में, जबकि मां घर संभालती थी। इस कारण शुरूआत में उनको कॉरपोरेट कल्चर को समझने में परेशानी भी हुई। सृजता का कहना है कि आज हम उस मोड़ पर खड़े हैं जहां पर हमारी विरासत और पारंपरिक कुटीर उद्योग खतरे में हैं। मशीन की ताकत से आज हम हस्तकला को कोई भी डिजाइन, प्रिंट नकल कर सस्ते में बना सकते हैं। इतना ही नहीं इन मशीन बने उत्पादों को कई लोग 'हस्तनिर्मित' के रूप में बेच रहे हैं। बावजूद इसके हस्तकला का कोई तोड़ नहीं है। हाथ से बना कोई भी उत्पाद ना सिर्फ बेजोड़ और खास होता है बल्कि इसका निर्माण प्यार से किया जाता है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए सृजता के कुशल कारीगर बहुत शानदार काम कर रहे हैं। इनके बनाये उत्पाद ना सिर्फ आज के फैशन के मुताबिक हैं बल्कि असली और प्रामाणिक भी हैं। उनके मुताबिक ग्राहक भी समझ जाता है कि कौन सा उत्पाद हस्तनिर्मित है और कौन सा मशीन से बना। वो बताती हैं कि हस्तकला में प्राकृतिक रंग और सामान का इस्तेमाल होता है जो की ईको फ्रेंडली तो है ही आपकी त्वचा के लिए भी अच्छा है। सृजता कहती हैं कि जीवन से जुड़ी हर जरूरत की चीज हस्तशिल्प उद्योग के पास है। यही वजह है कि हम इस क्षेत्र में हैं। वो चाहती हैं कि आज की पीढ़ी को इनके फायदे बताये जाएं ताकि वो इनका इस्तेमाल कर खुश रहें। सृजता का कहना है कि “हम अपने कारीगरों और कलाकारों को संरक्षण देना चाहते हैं उनके लिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार के मौके पैदा करना चाहते हैं, हम चाहते हैं कि उनके जीवन में भी खुशियां हों। साथ ही हम उनको बताना चाहते हैं कि वो जो काम करना रहे हैं वो अचंभित करने वाला है और उनको उसे बनाये रखना चाहिए।”

सृजता का कहना है कि वो दिल से विद्रोही स्वभाव की रही हैं। यही वजह है कि मल्टिनेशनल कंपनी में काम करने के बावजूद उनमें संतुष्टी का भाव नहीं रहा। EthnicShack से जुड़ाव स्वभाविक रूप से हुआ क्योंकि उनको हाथ से तैयार हुए कपड़े, हाथ से सिले कपड़े काफी पसंद थे। इसलिए मैं चाहती थी कि इतने अच्छे काम के लिए शिल्पकारों और कारीगरों के कुछ किया जाए। इस तरह उन्होने सितंबर, 2013 में www.ethnicshack.com की शुरूआत कर दी। इसके बाद उन्होने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। सृजता का कहना है कि EthnicShack शुरूआत से पहले हमने लोगों से ये समझने की कोशिश की कि क्या उनको हाथ के बने समान पसंद हैं और अगर पसंद हैं तो ठीक ठाक दाम पर अगर वो मिले तो क्या वो इसे खरीदेंगे। ये सब जानने के लिए 15 अगस्त 2013 को एक प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें उनको जबरदस्त समर्थन मिला और उनमें विश्वास पैदा हुआ कि उनको इस क्षेत्र में कदम रखना चाहिए और ई-कामर्स के माध्यम से उन्होने इस क्षेत्र में दस्तक दी।

सृजता ने अपना ये मिशन तीन हिस्सों में बांटा है पहला है स्टीरियोटाइप हस्तनिर्मित समान को रोकना। दूसरा है हस्तनिर्मित उत्पादों को रोजमर्रा के इस्तेमाल लायक बनाने के लिए फैशन के मुताबिक बनाना और तीसरा है कुटीर उद्योग के बनाये समान को प्रसिद्ध करना और इसे फैशन के साथ जोड़ना। EthnicShack ने अपने काम की शुरूआत बेंगलौर से की क्योंकि यहां का ईकोसिस्टम इस काम के लिए काफी अनुकूल है। दूसरा ये कि सारा बिजनेस ई-कामर्स पर आधारित है इसलिए बेंगलौर से बेहतर और कोई जगह नहीं हो सकती थी। EthnicShack नाम के बारे में उनका कहना है कि Ethnic का मतलब परम्परागत है जहां पर वो अपने ग्राहकों को शुद्ध माल देते हैं। तो वहीं Shack से बेहतर शब्द इस नाम के साथ जोड़ने के लिए और कोई नहीं था। इसके अलावा जो भी माल तैयार होता है वो झोपड़ी या छोटे कमरों में होता है।

कहते हैं दान की शुरूआत घर से होनी चाहिए। इसलिए कंपनी के लिए बाहर से सहसंस्थापक ढूंढने से बेहतर सृजता को ये लगा कि क्यों ना इसके लिए अपने पति अनीश से बात की जाए। जो कई टेक्नोलॉजी कंपनियों, मीडिया कंपनियों में काम कर चुके थे। वो इस काम के लिए झटपट तैयार हो गए। आज ये दोनों मिलकर EthnicShack को चलाते हैं। इसके अलावा इन लोगों की नजर समान विचारधारा वाले लोगों पर भी रहती है जो इस मुहिम को आगे ले जाने में इनकी मदद कर सकते हैं। सृजता बताती हैं कि उन्होने अपने काम की शुरूआत साड़ियों के साथ की थी लेकिन जल्द ही उन्होने महिलाओं के लिए सलवार कमीज, दुपट्टे, स्टॉल, हैंडबैग, कंबल और दूसरी कई चीजों को बनाना शुरू किया। अब उनकी जल्द ही छोटे बच्चों के लिए कपड़े लेकर आने की योजना है।

फिलहाल EthnicShack ने अपना सारा ध्यान टीयर 1 और 2 में रहने वाली शहरी महिलाओं पर लगाया हुआ है। इसके अलावा कंपनी की नजर उन पुरूषों पर भी है जो अपने चाहने वालों को तोहफा देते रहते हैं। हालांकि EthnicShack का ज्यादातर ध्यान घरेलू बाजार पर है बावजूद इसके कंपनी ने अमेरिका, कतर और यूएई जैसे देशों में भी अपना सामान भेजा है। फिलहाल ये सृजता का उद्यम ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे पैमाने पर और जमीनी स्तर पर कारीगरों की मदद कर रहा है। इनमें आंध्र-प्रदेश,गुजरात, राजस्थान, मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। जहां पर कंपनी अपने डिजाइन इन राज्यों में भेजती है और अपने लिए उत्पाद तैयार कर है। इसके अलावा कंपनी इस साल अपने कारीगरों की संख्या भी बढ़ाने जा रही है जिनसे वो नियमित रूप से काम कराती है। इसके लिए अब कंपनी की नजर उत्तर पूर्वी राज्यों, राजस्थान, केरल और दूसरी जगहों पर है। साथ ही साथ कंपनी इस साल अपनी आय को तीन गुणा करने का लक्ष्य रखा है।

EthnicShack की पहुंच सीधे कारीगरों तक होती है इनके बीच में कोई बिचौलिया नहीं होता।सृजता का कहना है कि कारीगर हमारे पॉर्टनर हैं और हम लोग उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि दोनों लोग एक दूसरी की दिक्कतों को समझ सकते हैं। बाजार में इस वक्त कई बड़े खिलाड़ी भी हैं जैसे फैब इंडिया, इंडियन रूट्स तो दूसरी ओर आईटोकरी जैसे भी। इनमें से ज्यादातर बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। बावजूद सृजता का मानना है कि इस क्षेत्र में भले ही कितने लोग हों लेकिन हर किसी पर इस बात का दबाव बना रहता है कि वो दूसरों से मुकाबले ज्यादा बेहतर काम करे। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत ही यही है कि यहां पर मिलजुल कर काम करना होता है और दूसरों की मदद करनी पड़ती है। सृजता के मुताबिक ये उनकी जिम्मेदारी है कि जो ग्राहक इन उत्पाद को पाने के लिए बेहतर गुणवत्ता और सही मूल्य की तलाश कर रहे हैं वो पूरी हो। तो दूसरी ओर वो ये भी चाहते हैं कि जिन लोगों ने ये कृतियां बनाई हैं उनको प्यार और प्रशंसा तो मिले ही उनके काम मान्यता भी मिले। सृजता बड़ी साफगोई से बताती है कि फिलहाल उनको कोई मुनाफा नहीं हो रहा है लेकिन जल्द ही ऐसे हालात भी बनेंगे जब उनको मुनाफा होगा। फिलहाल उनके काम की चर्चा मीडिया में खूब हो रही है। फिर चाहे वो “प्लान यूअर वेडिंग” जैसी पत्रिका हो या फिर दूसरी पत्र पत्रिकाएं।

सृजता के परिवार में उनके पति और 5 साल की एक बेटी है। वो अपने पति को अच्छा दोस्त मानती हैं। जिनको वो पिछले 12 सालों से जानती हैं। उनका कहना है कि उनके पति और उनकी बेटी ही सबसे बड़े आलोचक हैं। यो दोनों निष्पक्षता से अपनी राय रखते हैं जो उनके काम को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होता है। वो अपने को इस बात के लिए भाग्यशाली मानती है कि उनकी बेटी कला और शिल्प में रूझान रखती है। सृजता का कहना है उनके पास पीछे मुड़कर देखने का समय नहीं हैं उनके मुताबिक हर चीज अच्छे के लिए होती है और उसका कोई मतलब होता है। उनके मुताबिक उद्यमशीलता बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम है और जब आप इसमें डूब नहीं जाते तब तक आप उन चुनौतियों से निकल नहीं सकते। ये क्षेत्र उन लोगों के लिए नहीं है जो सुकून से और बिना अवरोध के जीना चाहते हैं।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...