नौकरी के साथ शिक्षा, पर्यावरण और स्वच्छता में जुटे हैं दो अफसर

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जज्बा अगर समाज सेवा का हो तो कोई भी मुश्किल आडे नहीं आती। तभी तो दो दोस्त आज भले ही सरकारी नौकरी करते हों बावजूद गरीब बच्चों की पढ़ाई हो या फिर पर्यावरण के लिये काम करना या फिर स्वच्छ भारत के मिशन से जुटना ये कभी पीछे नहीं हटते। दिल्ली में रहने वाले तरूण और अरविंद ने सामाजिक कामों के लिए ‘वन रुपी फाउंडेशन’ नाम से एक संस्था बनाई है। खास बात ये है कि इस संगठन का खर्च चलाने के लिए ये अपनी सैलरी का दस प्रतिशत हिस्सा इसमें देते हैं।

दिल्ली के रोहणी इलाके में रहने वाले तरूण और अरविंद दोनों स्कूल ही स्कूल के समय से दोस्त हैं। दोनों ने ही साथ साथ बीटेक किया है। हालांकि जब दोनों की सरकारी नौकरी लगी तो उनके विभाग अलग अलग थे। तरूण एनडीपीएल और अरविंद इनकम टैक्स विभाग में अफसर हैं। दोनों ही शुरू से गरीब बच्चों के लिए कुछ करना चाहते थे। ऐसे बच्चों को पढ़ाने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल बनाने के लिए उन्होनें 15 अगस्त साल 2015 में ‘वन रुपी फाउंनडेशन’ की स्थापना की। इसके लिए उन्होने 12 मेंबरों की एक टीम बनाई।

अपने सगंठन के जरिये उन्होने सबसे पहले रोहिणी में पौधारोपण किया जिससे की पर्यावरण स्वच्छ रह सकें। इसके बाद उन्होने शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया। इसके लिए वो रोहिणी के गरीब बस्तियों में गये और वहां से ऐसे बच्चों को ढूंढा जो की बारवीं और ग्रेजुएशन की पढ़ाई खत्म कर चुके थे, लेकिन पैसे की कमी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिए कोचिंग नहीं ले पा रहे थे। तब उन्होने और उनकी टीम ने रोहिणी के नारपुर एरिया के सेक्टर-7 के पास में ऐसे 7 बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने का फैसला किया। ऐसे बच्चों को ये दोनों खुद भी पढाते थे और कुछ विषय पढ़ाने के लिए दूसरे टीचर भी रखे। अरविंद बताते हैं कि उनकी दी हुई कोचिंग को कारण इन 7 बच्चों में से 3 बच्चे एसएससी की परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल कर चुके हैं।

अरविंद और उनकी टीम रोहिणी के छोटे बच्चों को भी पढाने का काम करती है। ये बच्चे रोहणी के आसपास के सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। जो कि कक्षा 1 से 5 तक के छात्र हैं। ऐसे बच्चों को ये बेसिक शिक्षा देते हैं। इसके लिए उनकी टीम ने एनटीटी अध्यापकों को रखा है। इनके माध्यम से वो इन बच्चों के हिन्दी, अंग्रेजी और गणित की शुरूआती जानकारी देते हैं। ये बच्चों के उच्चारण पर बहुत ध्यान देते हैं क्योंकि ये लोग देखते थे कि पढ़ना लिखना सीखने के बाद भी उन बच्चों का उच्चारण ठीक नहीं होता। लेकिन जब इन्होने ऐसे बच्चों पर ध्यान देना शुरू किया तो महीने भर के अंदर भी बच्चों में बदलाव देखने को मिला। एक समय में वो केवल 15 बच्चों को 2 महीने की ट्रेनिंग देते हैं। अपना अगला बेच वो जून में शुरू करने वाले हैं। रोहिणी के बाद अब उनका इरादा पीतमपुरा के गरीब इलाकों में जाने का है।

शिक्षा के साथ साथ ये दोनों दोस्त स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काम करते हैं। इसके लिए वो ब्लड डोनेशन कैम्प लगाते हैं। हाल ही में उन्होने 14 मई को रोटरी क्लब के साथ मिलकर रोहिणी में एक ब्लड डोनेशन कैम्प लगाया। जिसके जरिये उन्होंने 55 यूनिट ब्लड इकट्ठा किया है। इसके अलावा डेंटल अवेयरनेस कैम्प में वो बच्चों को 15 दिन का एक चार्ट देते हैं जिसमें कि बच्चों को सुबह और शाम अपने दांत साफ करने के लिए एक चार्ट पेपर दिया जाता है जिसमें वो बच्चे जब भी अपने दांत साफ करते हैं तो उसमें उनको निशान लगाना होता है। इस तरह ऐसा करने से उन बच्चों में दांत साफ करने की आदत पड़ जाती है। साथ ही ये लोग उन बच्चों को साफ सफाई के बारे में भी जानकारी देते हैं। जैसे खाना खाने से पहले साबुन से हाथ धोने चाहिए, साफ धुले हुए कपड़े पहनने चाहिए।

बात अगर स्वच्छता अभियान की करें तो इनका संगठन एक खास तरह की मुहिम पर भी काम कर रहा है। ये स्ट्रीट फूड बेचने वालों को ना सिर्फ हाइजीन तरीके से काम करने के लिए कहते हैं। अरविंद बताते हैं कि “मैं और तरूण अक्सर जब घूमने जाते तो हमारा मन स्ट्रीट फूड खाने को करता जैसे की पानी पूडी,चाट आदि। हम देखते थे कि वो लोग बिना दस्ताने पहने ही इस काम को करते थे। जिससे की सफाई ना रहने के कारण बीमारी का डर रहता था।” ये देखकर तरूण और अरविंद ने निश्चय किया कि वो लोग ऐसे लोगों को दस्ताने देगें। अपनी इस मुहिम के माध्यम से वो अब तक करीब 2 हजार दस्ताने बांट चुके हैं। जब कुछ समय बाद वो ऐसे स्ट्रीट वेंडर के पास दोबारा जाते हैं जिन्हें उन्होने दस्ताने दिये थे तो वो लोग इन्हें बताते हैं कि दस्ताने पहनने के बाद से उनकी बिक्री में इजाफा हुआ है। वो और उनकी टीम जहां कहीं भी ऐसे लोगों को बिना दस्ताने के काम करते हुए देखती है तो वो लोग इन लोगों को उसी समय दस्ताने उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए इनकी टीम अपने साथ दस्ताने लेकर चलती है।

अरविंद और उनकी टीम स्वच्छ भारत अभियान से भी जुड़ी है। शनिवार और रविवार को इनकी टीम आसपास के गंदे इलाके को भी साफ करती है। ये बस्तियों में रहने वाले लोगों और स्ट्रीट वेंडर को सफाई के महत्व के बारे में भी बताते हैं। अपनी फंडिग के बारे में अरविंद का कहना हैं कि “अभी कहीं से भी हमें किसी प्रकार की कोई फंडिग नहीं मिल रही है। इसके लिए मैं और तरूण अपनी सैलरी का 10 प्रतिशत इस फाउंडेशन को देते हैं।” साथ ही इस काम के लिए फंड जुटाने के लिए वो और उनकी टीम हर हर रोज एक दूसरे से 1 रूपये लेती है।इसके साथ ही अभी हाल ही में इन्होने रोहिणी के केन्द्रीय विद्धालय में वृक्षारोपण का काम किया है। अपने काम के विस्तार को लेकर इनका कहना है कि रोहिणी, पीतमपुरा के बाद इनका ध्यान पूर्वी दिल्ली पर है। तरूण और अरविंद हरियाणा के मूल निवासी हैं इसलिए भविष्य में इनकी योजना हरियाणा में भी काम करने की हैं। वहां ये गर्ल चाइल्ड सेक्स रेश्यो के लिए काम करना चाहते हैं, जो कि हरियाणा में सबसे कम है।

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