एक महारथी जिसने की हॉकी से शादी और दिए कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी

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40 सालों से दे रहे हैं हॉकी की ट्रेनिंग...

65 साल के हैं मर्जबान पटेल...

गरीबों को देते हैं मुफ्त में प्रशिक्षण...


एडरिन डिसूजा, गेविन पेरेरा, विरेन रास्किन्हा...ये हॉकी के वो सिकंदर हैं जो अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन कर चुके हैं। इनकी एक और खासियत भी है और वो है कि इन लोगों ने हॉकी जिस शख्स से सीखी उसका नाम है मर्जबान पटेल। करीब 65 साल के मर्जबान पटेल ऐसे कई खिलाड़ियों को हॉकी की उस बुलंदी तक पहुंचा चुके हैं जहां पहुंचना हर खिलाड़ी का सपना होता है। हॉकी का ये महारथी आज भी उन बच्चों को हॉकी सिखाते हैं जो इस खेल से प्यार करते हैं और उसको अपना करियर बनाना चाहते हैं। ये मर्जबान पटेल ही हैं जिनकी बदलौत भारतीय हॉकी टीम में ना सिर्फ सीनियर वर्ग के लिए बल्कि जूनियर वर्ग के लिए भी कई खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं।

मर्जबान पटेल का जन्म मुंबई में हुआ। मुंबई के भायखला की रेलवे कॉलोनी में रहने वाले मर्जबान ने अपनी पढ़ाई दसवीं क्लास तक ही की, क्योंकि ये पढ़ाई में ज्यादा अच्छे नहीं थे लेकिन हॉकी इनको बचपन से ही बेहद पसंद थी। मर्जबान बताते हैं कि वो जिस कॉलोनी में रहते थे वहीं पर इनके एक दोस्त के पिता हॉकी के अच्छे खिलाड़ी थे। जिनको वो अक्सर हॉकी खेलते हुए देखते थे। हॉकी के प्रति ये लगाव उन्हीं की देन है। मर्जबान ने शुरूआत में उनको देखते देखते हॉकी सीखी, इसके बाद उन्होने अपनी गली में ही हॉकी खेलना शुरू किया। हॉकी खेलते खेलते वो इस की बारीकियों को जानने और समझने लग गये थे।

जिस इलाके में मर्जबान का घर था उसी के पास हॉकी का एक क्लब था जिसका नाम था ‘रिपब्लिकन स्पोर्टस क्लब’। इसकी स्थापना साल 1963 में हुई थी जहां पर नौजवान खिलाड़ी प्रशिक्षण लेने के लिए आते थे। मर्जबान पटेल ने भी धीरे धीरे इस क्लब में आना शुरू कर दिया। हालांकि उस क्लब के पास संसाधनों की काफी कमी थी, ऐसे में मर्जबान पटेल हॉकी से लगाव होने के कारण क्लब के दूसरे काम भी करने लगे। इस दौरान वो हॉकी भी सीखते और क्लब का काम भी देखते। मर्जबान पटेल बताते हैं कि 

“इस दौरान मैं जान गया था कि खिलाड़ियों को कैसे अपने साथ जोड़ा जाता है और उनको अच्छा खेल दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।”

धीरे धीरे मर्जबान पटेल क्लब में आने वाले खिलाड़ियों को हॉकी की कोचिंग देने लगे। इस दौरान वो खिलाड़ियों को ना सिर्फ प्रशिक्षण देते बल्कि अपनी देखरेख में उनमें खेल के प्रति अनुशासन और समर्पण की भावना को भी पैदा करते। पिछले चालीस सालों से हॉकी खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे मर्जबान देश को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी दे चुके हैं। जो हॉकी के मैदान में अपना नाम कमा रहे हैं। जिस क्लब में कभी मर्जबान हॉकी सीखने जाते थे आज वो उसी क्लब का संचालन कर रहे हैं। आज उनके क्लब में जो भी गरीब बच्चे हॉकी खेलने आते हैं उनको ये खेलने के लिए हॉकी, जूते और दूसरी चीजें देते हैं। इन सब का इंतजाम करते हैं क्लब और हॉकी से जुड़े सीनियर खिलाड़ी।

आज युवराज वाल्मीकि और देवेंद्र वाल्मीकि भारतीय हॉकी टीम की शान हैं। इन दोनों खिलाड़ियों ने मर्जबान पटेल से ही हॉकी की बारीकियां सीखी हैं। इनके अलावा भारतीय जूनियर एशिया कप विजेता टीम में गोलकीपर रहे सूरज को इन्होंने ही बताया कि विरोधी टीम का सामना कैसे किया जाता है। आज इनके क्लब में करीब 30 खिलाड़ी ट्रेनिंग ले रहे हैं जो आने वाले समय में देश का नाम रोशन करने की ताकत रखते हैं। मर्जबान पटेल आज 65 साल के हैं लेकिन उन्होने शादी नहीं की। उनका कहना है कि 

"मेरी शादी तो हॉकी से हो गई है इसलिए दूसरी शादी करने का कोई मतलब नहीं था।" 

उनके मुताबिक इस काम को करने में काफी वक्त लगता है और शादीशुदा आदमी के लिए इतना वक्त निकालना मुश्किल होता है।

मर्जबान पटेल का हॉकी सीखाने का सफर इतना भी आसान नहीं रहा। वो बताते हैं कि पैसे की तंगी के कारण उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके क्लब में ज्यादातर गरीब लोग ही हॉकी सीखने आते थे। बावजूद इसके इन्होंने किसी के लिए अपने क्लब के दरवाजे बंद नहीं किये। उनके मुताबिक 

"कई बार ऐसे हालात बने की क्लब चलाने के लिए ब्याज पर दूसरों से कर्जा भी लेना पड़ा, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। आज भी इस क्लब को चलाने में कई मुश्किलें आती हैं लेकिन अब पुराने खिलाड़ी क्लब को अपनी ओर से जितना बन पड़ता है उतनी मदद करते हैं।" 

इसके अलावा मर्जबान पटेल का कहना है कि “पहले के मुकाबले हॉकी का सामान काफी महंगा हो गया है, ऐसे में हॉकी के प्रति लोगों का रूझान काफी कम हो गया है।” बावजूद ये मुफ्त में हॉकी सिखाते हैं।

मर्जबान पटेल हर रोज बॉम्बे हॉकी एसोसिएशन ग्राउंड में शाम 5 बजे से लेकर 7 बजे तक अपने खिलाड़ियों को प्रैक्टिस कराते हुए मिल जाएंगे। इसके अलावा छुट्टी के दिन भी ये अपने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देते हैं। क्लब के अलावा मर्जबान पटेल कुछ स्कूल में भी हॉकी की ट्रेनिंग देते हैं। उनका कहना है कि कई बच्चे हॉकी खेलना शुरू करते हैं लेकिन कोई स्कूल में तो कोई कॉलेज में जाकर हॉकी को छोड़ देता है इससे उनको थोड़ी निराशा तो होती है लेकिन साथ ही उनका मानना है कि जिस प्रकार पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती तो वैसे ही हर कोई हॉकी को अपना लक्ष्य नहीं बना सकता। भविष्य की योजनाओं के सवाल पर मर्जबान पटेल का कहना है कि “जब तक शरीर में जान है तब तक वो ये काम करते रहेंगे।”


अगर आप भी मर्जबान पटेल की इस मुहिम से जुड़ना चाहते हैं और उनकी मदद करना चाहते हैं तो आप ईमेल के जरिये संपर्क कर सकते हैं-

conroyblaise@yahoo.co.in