सावधान: इस गर्मी में शोध-सर्वे के गंभीर संकेत

शोध और सर्वे रिपोर्ट ने किए चौंकाने वाले इशारे, इस गर्मी में हो जायें सतर्क...

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घर-मकान के भट्ठी की तरह तपने के दिन आ गए। हौले-हौले मौसम खौलने लगा है। पर्यावरण से ताल्लुकात रखने वाले संस्थान-संगठन एवं मौसम विज्ञानी आगाह कर रहे हैं कि मौसमी संवेदनशीलता को देखते हुए ऊर्जा उत्पादन में होने वाले बदलावों के जोखिम, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए इस बार गर्मी में सावधान हो जाएं! शोध और सर्वे रिपोर्ट खतरनाक इशारे कर रही हैं।

जानलेवा गर्म हवाएं चलने से भारत की 30 फीसदी आबादी को खतरनाक तापमान का सामना करना पड़ सकता है। तीन साल पहले ऐसी ही गर्म हवाओं ने साढ़े तीन हजार लोगों की जान ले ली थी। अब फौरी जरूरत तो इस बात की है कि इस गर्मी का कैसे सामना किया जाए!

आ गया आग का मौसम। सीमेंट-कांक्रीट की छतों वाले घर भट्टी की तरह तपने के इन दिनों में देर रात तक तो सांस लेना भी असहज होने लगा है। पानी की खपत भी बढ़ रही है। मौसम खुशनुमा हो तो अपने हवादार बसेरे का लुत्फ ही कुछ और होता है लेकिन जब गर्मियां जान लेने पर आमादा हो जाएं तो? सवाल गंभीर है क्योंकि अभी पिछले सप्ताह ही एचएसबीसी बैंक ने दुनिया के 67 देशों के जलवायु परिवर्तन संबंधी एक रिसर्च निष्कर्ष में खुलासा किया है कि सबसे ज्यादा भारत की आबोहवा खतरे में है। मौसमी आपदाओं के लिए संवेदनशीलता, ऊर्जा उत्पादन में होने वाले बदलावों के जोखिम और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता को इस मूल्यांकन का आधार बनाया गया। एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भविष्य में गर्मी इतनी बढ़ सकती है कि जीना दुश्वार हो जाएगा।

तापमान, नमी और मानव शरीर ठंडा करने की क्षमता को मिलाकर वेट बल्ब टेम्प्रेचर बनाया जाता है। किसी भी व्यक्ति के लिए 35 डिग्री तक तापमान सरवाइवल थ्रेसहोल्ड हो सकता है। जानलेवा गर्म हवाएं चलने से भारत की 30 फीसदी आबादी को खतरनाक तापमान का सामना करना पड़ सकता है। तीन साल पहले ऐसी ही गर्म हवाओं ने साढ़े तीन हजार लोगों की जान ले ली थी। अब फौरी जरूरत तो इस बात की है कि इस गर्मी का कैसे सामना किया जाए! हाल ही में नेशनल सेंटर ऑफ एटमास्फिरिक रिसर्च और नासा के वैज्ञानिकों के शोध निष्कर्ष में बताया गया है कि अगर छत को सफेद कर दिया जाए तो कार्बन डाइऑक्साइड को कम किया जा सकता है। दिन में छत सोलर विकिरण अवशोषित कर काफी गर्म हो जाती हैं। इससे तापमान 80 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है।

गर्म छत से उत्सर्जित सोलर विकिरण का सबसे गंभीर असर खासकर शहरी जीवन पर पड़ रहा है। इससे पर्यावरणीय अस्थिरता के साथ न्यूनतम तापमान भी बढ़ रहा है। छत सफेद कर सोलर रेडिएशन से बचाव किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे सोलर विकिरण परावर्तित होकर वापस स्पेस में लौट जाता जाता है। भवन का तापमान घटने से ठंडा करने के उपायों में कम बिजली लगती है साथ ही कार्बन गैसों का उत्सर्जन घट जाता है।

आजकल के मौसम में हर व्यक्ति के दिमाग में एक ही सवाल सबसे ज्यादा तैरता है कि वह अपने बसेरे को कैसे ठंडे रखे? शहरी निर्माण कार्यों के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि छत और दीवारों को जितना ज्यादा हो सके, इस मौसम में पौधों या छांव से ढंक कर रखें। इससे घर के तापमान का उतार-चढ़ाव तुरंत थम जाएगा। घर के अंदर तरह-तरह के प्रदूषण और ज्यादा रोशनी से भी बचाव होगा। पेंट का घर को इकोफ्रेंडली बनाने और घर के तापमान को नियंत्रित करने में बड़ा रोल होता है। ज्‍यादातर लोग घर में ऑयल-बेस्ड पेंट करवाना पसंद करते हैं, जो महंगा भी पड़ता है। तापमान को कम रखने के लिए वाटर बेस्ड पेंट का इस्तेमाल करना चाहिए। वाटर बेस्ड पेंट ऊर्जा को रिफलेक्‍ट करता है।

अपने आसपास की सड़कों पर कूलसील तकनीक से खास पेंट कर भी तामपान घटाया जा सकता है। इमारत को छांव देने के लिए नई तकनीकी का धूपी चश्मा जैसा एक सिस्टम लगाया जाने लगा है, जिससे सूर्य की 20 फीसदी ऊर्जा थम जाती है और भवन ठंडा रहता है। घर में हवा और रोशनदान न होने से गर्मी बढ़ जाती है। इसलिए घर को हवादार रखना जरूरी है। घर ठंडा रखने के लिए पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। घर के अंदर भी नैसर्गिक प्रकाश जरूरी है। ऊंची छत भी घर को ठंडा रखने में मदद करती है। किचन की खिड़कियां खुली रखें, इससे घर के अंदर की घुटन और गर्मी कम होगी। प्राकृतिक संसाधनों से सहयोग लें, न कि घर को हर वक्त वातानुकूलित रखें। रसोई में धुआं न थमने दें। इस मौसम में मॉड्यूलर किचन ज्यादा मुफीद रहता है।

मौसम की प्रतिकूलता बर्दाश्त करने के लिए भवन निर्माण के समय विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। मसलन, खिड़कियों को दक्षिण और पश्चिम दिशा में लगवाएं क्योंकि सूर्य पूरब में उगता और पश्चिम में अस्‍त होता है। इन दोनों दिशा में खिड़की होने पर घर के अंदर गर्मी स्वतः बढ़ जाती है। दक्षिण और पश्चिम दिशा खिड़की होने पर सूर्य की रोशनी अंदर 77 फीसदी तक कम आती है। घर को सुखद रखने के लिए हैदराबाद के 'बम्बू हाउस इंडिया' के संचालक प्रशांत और अरुणा लिंगम लगभग एक दशक से बांस के घर बनाने का अभियान चला रहे हैं। जब वह गांवों में भवन निर्माण में बांस की अहमियत लोगों को समझाते थे तो ग्रामीण कहते थे कि बांस के ढांचे के साथ मिट्टी की दीवारें बनाना संभव नहीं। फिर उन्होंने पता किया कि सीमेंट की एक ईंट 15 रुपए में और मिट्टी की ईंट तीन चार रुपए में मिल जाती है। एक दिन उन्होंने एक आदमी को पानी पीकर खाली बोतल फेंकते देखा तो आइडिया मिल गया कि क्यों न खाली बेकार पड़ी खाली बोतलों में गोबर मिश्रित मिट्टी भरकर बांस के साथ मकान बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाए। इस तकनीक से मात्र पचहत्तर हजार में एक घर का निर्माण हो गया। इस तरह के घर प्राकृतिक रूप से गर्मी में ठंडे और जाड़े में गर्म रहते हैं क्योंकि मिट्टी और बोतलें से बनी दीवार बाहरी मौसम के दबाव को अंदर घुसने नहीं देती हैं।

बढ़ते तापमान में खुद को कूल रखने के लिए विशेषज्ञ कई और उपाय भी सुझा रहे हैं। गर्मी इतना अशांत कर देती है कि इसका गंभीर असर मस्तिष्क पर पड़ने से आत्महत्या की सबसे ज्यादा घटनाएं मई से अगस्त के बीच होने लगी हैं। पिछले कुछ सालों से सबसे ज्यादा मरीज मई और जून के महीनों में मानसिक चिकित्सालयों में भर्ती हो रहे हैं। आयुर्वेद विशेज्ञों का कहना है कि गर्मी पित्त का सीजन है। इस मौसम में शरीर में पित्त बढ़ जाती है। इससे व्यक्ति अवसाद में चला जाता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार दिमागी रसायन गर्मियों में ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जो मानसिक बीमारियों का कारण बनता है। 

मेलाटोनिन ऐसा ही एक रसायन है जो गर्मियों में सामान्य से ज्यादा मात्र में हमारे दिमाग में बनता है। इन सब स्थितियों से गर्मी में बचाव के लिए सौंफ आदि ऐसे मसाले खाने चाहिए, जो पित्त को संतुलित रखें। लहसुन और एलोवेरा जूस भी शरीर और दिमाग को ठंडा रखता है। दिन में दो कप ग्रीन टी जरूर पीएं। इन दिनों में प्रतिदिन कम से कम आठ गिलास पानी पीएं। दिमाग का 80 प्रतिशत लिक्विड होता है। इसे पानी की दरकार होती है। इस मौसम में दूध और गेहूं से परहेज करें, जो शरीर में पित्त को बढ़ाता है। भोजन में चावल, जौ और काले चने का तथा सलाद में धनिया और पोदीने की चटनी का अधिकाधिक इस्तेमाल करें। 

गर्मियों के मौसम में हाइली रिफाइंड मैदा, सूजी आदि के कार्बोहाइड्रेट से परहेज करें। गर्मी के दिनों में इनसे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। भोजन में पानी वाली सब्जियों और फलों का ज्यादा इस्तेमाल करें। यौगिक क्रियों में मेडिटेशन गर्मियों में दिमाग के लिए सबसे फायदेमंद है। खुशबुओं से भी दिमाग को तरोताजा रखा जा सकता है। गर्मी में नारियल की खुशबू सबसे ज्यादा मुफीद रहती है। पालक का विटामिन बी और फोलिक एसिड, साथ ही तरबूज दिमागी रसायन सेरटोनिन को संतुलित रखता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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