अगले दो साल में 50 प्रतिशत किसानों को फसल बीमा योजना से जोड़ना चाहते हैं प्रधानमंत्री

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हाल ही में घोषित फसल बीमा योजना के फायदों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज लोगों से पूरे देश में इसकी जानकारी फैलाने में सहयोग का आग्रह किया ताकि अगले दो वषरे में कम से कम 50 प्रतिशत किसान इसके दायरे में लाये जा सके ।

आकाशवाणी पर प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने खादी को लोकप्रिय बनाने की दिशा में अपने प्रयासों पर भी बल दिया, साथ ही बालिकाओं को बचाने के बारे में जागरूकता फैलाने एवं स्टार्ट अप कार्यक्रम का भी जिक्र किया । उन्होंने फरवरी माह में विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू सहित कुछ अन्य मुद्दों के बारे में भी लोगों से अपने विचार साझा किये ।

मोदी ने कहा, ‘‘ हमारे देश में किसानों के नाम पर बहुत-कुछ बोला जाता है, बहुत-कुछ कहा जाता है। खैर, मैं उस विवाद में उलझना नहीं चाहता हूं । लेकिन किसान का एक सबसे बड़ा संकट है, प्राकृतिक आपदा में उसकी पूरी मेहनत पानी में चली जाती है। उसका साल बर्बाद हो जाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ उसको सुरक्षा देने का एक ही उपाय अभी ध्यान में आता है और वह फसल बीमा योजना है। 2016 में भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा तोहफा किसानों को दिया है - प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना। ’’ मोदी ने कहा, ‘‘ इस योजना की तारीफ हो, वाहवाही हो, प्रधानमंत्री को बधाईयां मिले, ..यह इसके लिये नहीं है । हमारा प्रयास है कि संकट में पड़े किसान को इसका भरपूर फायदा मिले ।’’ किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि इतने सालों से फसल बीमा की चर्चा हो रही है, लेकिन देश के 20-25 प्रतिशत से ज्यादा किसान उसके लाभार्थी नहीं बन पाए हैं, उससे जुड़ नहीं पाए हैं। ‘‘ क्या हम संकल्प कर सकते हैं कि आने वाले एक-दो साल में हम कम से कम देश के 50 प्रतिशत किसानों को फसल बीमा से जोड़ सकें? प्रधानमंत्री ने कहा कि खादी एक राष्ट्रीय प्रतीक और युवा पीढ़ी के आकषर्ण का केंद्र बन गया है। इसके जरिये भारतवासियों को स्वाबलंबी बनाने के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपने को उनकी सरकार आगे बढ़ा रही है और विभिन्न सरकारी संस्थान आगे बढ़कर खादी के उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खादी में नयापन लाने के लिए भरपूर प्रयास किया है। अर्थव्यवस्था में बाजार का अपना महत्व है। खादी का भावात्मक जगह के साथ-साथ बाजार में भी जगह बनाना अनिवार्य हो गया है। जब मैंने लोगों से कहा कि अनेक प्रकार के परिधान आपके पास हैं, तो एक खादी का भी तो होना चाहिये। और ये बात लोगों के गले उतर रही है कि हम खादीधारी तो नहीं बन सकते, लेकिन अगर दसों प्रकार के वस्त्रों में खादी भी एक और हो जाए। मोदी ने कहा कि बहुत साल पहले सरकार में खादी का भरपूर उपयोग होता था । लेकिन धीरे धीरे आधुनिकता के नाम पर ये सब खत्म होता गया और खादी से जुड़े हुए हमारे गरीब लोग बेरोजगार होते गए। उन्होंने कहा कि खादी में करोड़ों लोगों को रोजगार देने की ताकत है।

प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में राजस्थान के दौसा से गीता देवी, कोमल देवी और बिहार के नवादा जिले की साधना देवी के पत्रों का जिक्र किया जिसमें उन्होंने चरखे के कारण उनके जीवन में आए परिवर्तन के बारे में बताया ।

मोदी ने कहा कि सरदार पटेल ने कहा था कि हिन्दुस्तान की आजादी खादी से जुड़ी है, हिन्दुस्तान की सहायता भी खादी से जुड़ी है, हिन्दुस्तान में जिसे हम परम धर्म मानते हैं, वह अहिंसा खादी से ही जुड़ी है और हिन्दुस्तान के किसान, जिनके लिए आप इतनी भावना दिखाते हैं, उनका कल्याण भी खादी में ही है। सरदार साहब सरल भाषा में सीधी बात बताने के आदी थे और बहुत बढ़िया ढंग से उन्होंने खादी का महत्व बताया है।


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