बिना किसी बाहरी सहायता के समुद्र में 30,000 मील का सफर करेंगे नेवी के कमांडर अभिलाष टोमी

गोल्डन ग्लोब रेस में हिस्सा लेने वाले एकमात्र एशियाई नाविक अभिलाष टोमी...

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भारतीय नौसेना के कमांडर अभिलाष टोमी एक अनूठी और अनोखी समुद्री यात्रा करने के लिए तैयार हैं। इंडियन नेवी के अधिकारी टोमी गोल्डन सम्मानित ग्लोब रेस (जीजीआर) में भाग लेने के लिए आमंत्रित एकमात्र एशियाई है।

 यह यात्रा 1 जुलाई को फ्रांस में लेस सैबल्स डी ओलोन हार्बर से आरंभ हुई। इस रेस में 13 देशों के 18 नाविक शामिल हैं जो कि अगले 10 महीनों तक लगभग 30,000 मील का सफर तय करेंगे।

भारतीय नौसेना के कमांडर अभिलाष टोमी एक अनूठी और अनोखी समुद्री यात्रा करने के लिए तैयार हैं। इंडियन नेवी के अधिकारी टोमी गोल्डन सम्मानित ग्लोब रेस (जीजीआर) में भाग लेने के लिए आमंत्रित एकमात्र एशियाई हैं। यह यात्रा 1 जुलाई को फ्रांस में लेस सैबल्स डी ओलोन हार्बर से आरंभ हुई। इस रेस में 13 देशों के 18 नाविक शामिल हैं जो कि अगले 10 महीनों तक लगभग 30,000 मील का सफर तय करेंगे।

खास बात यह है कि इस सफर में किसी नाविक को किसी भी प्रकार की बाहरी मदद नहीं मिलेगी। यानी उसे बिना रुके लगातार 30,000 मील समुद्री यात्रा करनी पड़ेगी। यह यात्रा हर एक नाविक के लिए एक निजी चुनौती की तरह है। इस रेस में प्रतिभाग करने वाले सभी नाविकों को मौसम के हिसाब से अपना रास्ता स्वयं चुनना होगा। भारत की तरफ से प्रतिभाग करने वाले टोमी को भारतीय सेना की तरफ से कीर्ति चक्र भी मिल चुका है। वे 2012 में साहसिक 'सागर परिक्रमा-2' भी संपन्न कर चुके हैं।

गोल्डन ग्लोब रेस का परिचालन ब्रिटेन के सर रॉबिन नॉक्स जॉनसन द्वारा 1968 में आरंभ किए गए विश्व के पहले नॉन स्टॉप सरकमनेविगेशन की याद में किया जा रहा है। कमांडर अभिलाष टोमी भारत के सर्वाधिक प्रमुख नाविकों में से एक हैं। उन्होंने सेल के भीतर 2012-13 में ग्लोब की सोलो नॉन स्टॉप सरकमनेविगेशन समेत 53,000 नॉटिकल माइल कवर किया है। वह कीर्ति चक्र, मैक ग्रेगर एवं तेनजिंग नॉर्गे पुरस्कारों के विजेता भी हैं। कमांडर अभिलाष टोमी सहैली की प्रतिकृति पर यात्रा करते हुए भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस रेस के अप्रैल 2019 में लेस सैबल्स डी ओलोन में संपन्न हो जाने की उम्मीद है।

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