बाबा रे बाबा! इतना भयानक!!

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पंचकूला दंगों के करीब 10 दिन बाद डेरा सच्चा सौदा सिरसा के सैनिटाइज़ेशन की सरकार को मिली मंजूरी पर, यानी डेरा सच्चा सौदा के सिरसा हेडक्वॉर्टर की सर्च में देरी पर बीजेपी के ही सांसद राजकुमार सैनी ने एक गंभीर और सही सवाल उठाया है कि यह सब इतने देर से क्यों शुरू हुआ है? ऐसा सर्च अभियान आखिर किस काम का?

सांसद राजकुमार सैनी का मानना है कि देरी से राम रहीम के डेरे में किसी भी संदिग्ध सामान और तथ्यों के खुर्द-बुर्द हो चुके होने की आशंका है। उन्होंने गुरमीत राम रहीम के दरबार में नतमस्तक होने वाले नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि जो राजनेता बाबाओं के दरबार में जा कर झुकते दिखाई देते हैं, दरअसल, वे जनता को मूर्ख बनाकर उन्हें भ्रमित कर रहे होते हैं।

ये सब अपनी समानांतर सेना रखते रहे हैं। भुजबल, सत्ताबल की आड़ लेकर अकूत धनबल के मालिक बने बैठे हैं। मथुरा, काशी, अयोध्या, कहीं भी ऐसे तीर्थ स्थलों पर चले जाइए, वहां की हकीकत खंगालिए, तो पता चलता है कि इतनी संगठित मुस्टंडई तो अपराधी भी नहीं कर सकता है।

अवकाशप्राप्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एकेएस पवार की निगरानी में आज सिरसा (हरियाणा) में राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय की तलाशी हो रही है। इसलिए आज सिरसा में कर्फ्यू लगा दिया गया है। आश्रम के ताले तोड़ने के लिए 22 एक्‍सपर्ट के अलावा सेना के 5000 जवान और 50 बम स्‍क्‍वॉयड दस्‍ते वाले मौके पर जमा हैं। 800 एकड़ से ज्यादा बड़े इलाके में फैले इस परिसर की पूरी तलाशी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो रही है। इस दौरान अर्धसैनिक बल, ड्यूटी मजिस्ट्रेट, कार्यकारी मजिस्ट्रेट, राजस्व अधिकारी, जिले में चौकसी के लिए अर्धसैनिक बलों की 41 कंपनियां भी तैनात हैं। पंचकूला दंगों के करीब 10 दिन बाद डेरा सच्चा सौदा सिरसा के सैनिटाइज़ेशन की सरकार को मिली मंजूरी पर, यानी डेरा सच्चा सौदा के सिरसा हेडक्वॉर्टर की सर्च में देरी पर बीजेपी के ही सांसद राजकुमार सैनी ने एक गंभीर और सही सवाल उठाया है कि यह सब इतने देर से क्यों शुरू हुआ है? ऐसा सर्च अभियान आखिर किस काम का?

सिरसा स्थित राम रहीम के आश्रम की फाइल फोटो
सिरसा स्थित राम रहीम के आश्रम की फाइल फोटो

सांसद राजकुमार सैनी का मानना है कि देरी से राम रहीम के डेरे में किसी भी संदिग्ध सामान और तथ्यों के खुर्द-बुर्द हो चुके होने की आशंका है। उन्होंने गुरमीत राम रहीम के दरबार में नतमस्तक होने वाले नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि जो राजनेता बाबाओं के दरबार में जा कर झुकते दिखाई देते हैं, दरअसल, वे जनता को मूर्ख बनाकर उन्हें भ्रमित कर रहे होते हैं। जनता को लगता है कि इतने बड़े-बड़े लोग भी कुछ पाने के लिए यहां फरियाद कर रहे हैं, जबकि ऐसे नेताओं को बाबा के प्रति कोई श्रद्धा नहीं होती। उनकी नजर बाबा के भक्तों की शक्ल में वहां मौजूद वोट बैंक पर टिकी होती है।

अब आइए, भजन-भक्ति के ढकोसलों की आड़ में कुछ और आश्रमों की लठैती, धनबल-शस्त्रबल पर एक नजर दौड़ाते हैं। मथुरा (उ.प्र.) के जवाहर बाग में एक ऐसा ही आश्रम बाबा जयगुरुदेव का है। अतीत में वहां की हिंसक घटना ने भी पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। धर्म और समाज सेवा के नाम पर सरकारी जमीनें घेरकर बनाए गए आश्रमों और मठों को जिस तरह कुछ अपराधी किले में तब्दील कर रहे हैं, संगठित गिरोहों की तरह नेताओं की सांठगांठ से अकूत संपत्ति खड़ी कर ले रहे हैं, यह पूरे देश के लिए एक बड़ी चिंता का सबब है। दिल्ली कूच के बहाने एक स्वाधीन भारत संगठन ने मथुरा के जवाहर बाग में सिर्फ चंद घंटे के लिए ऐसा डेरा डाला कि दो साल से भी ज्यादा बीत गए, लेकिन डेरा नहीं हटा। जवाहर बाग पर कब्जा कर लिया गया। संगठन सामानांतर सरकार चलाने लगा। और एक दिन आमने-सामने की खूनी टक्कर के बाद जब जवाहर बाग खाली हुआ, तो पीछे हथियारों का इतना बड़ा जखीरा मिला कि खुद पुलिसवालों की आंखें फटी की फटी रह गईं।

राम रहीम और गुजराती आसाराम की तरह ही हरियाणा में एक साम्राज्य रामपाल ने खड़ा किया। तब रामपाल और उसके गुंडों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों को कई दिनों तक कार्रवाई करनी पड़ी। जयगुरुदेव के करोड़ों समर्थक हैं। उनके धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता लेकिन जिस तरह से उनके शिष्यों पर किसानों की जमीन हथियाने के आरोप हैं, उससे क्या उनकी धार्मिक आस्था सवालों में नहीं घिर जाती है। किसान नेता इन आश्रमों के अवैध कब्जों को लेकर सत्ता के सिरहाने बैठे मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, आला अफसरों तक को मौके-दर-मौके पत्र भेजते रहते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता है। आसाराम बापू और रामपाल द्वारा जमीनों पर कब्जे के खिलाफ भी प्रदर्शन होते रहे हैं। इसी तरह आगरा में एक जमाने में किसानों की सैकड़ों एक जमीन हथिया चुके राधास्वामी आश्रम के खिलाफ किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत, मजदूर नेता जार्ज फर्नांडीज तक को धरने देने पड़े, लेकिन रत्ती भर धूल भी किसानों को हासिल नहीं होने दी गई। 

सचमुच के संतों की बात करें तो, गोस्वामी तुलसीदास, संत तुकाराम, सूरदास, मीरा बाई, चैतन्य महाप्रभु, कबीरदास जैसे महापुरुषों ने तो कहीं अपना कोई आश्रम नहीं बनाया, जिसके पास किसानों, गृहस्थों, गरीबों से छीनी हुई अथवा धोखेबाजी से हासिल की गई सैकड़ों एकड़ जमीन हो, हथियारों का जखीरा हो, गुंडों, मवालियों की फौज हो। दरअसल, आज के आसाराम बापू, राम रहीम जैसे लोग धार्मिक आस्था, श्रद्धा, धर्मांधता की आड़ में अथाह धन-संपत्ति का साम्राज्य खड़ा करते जा रहे हैं। देश के हर राज्य में ऐसा हो रहा है। उन्हें जनविरोधी गंदी राजनीति का भी पूरा-पूरा संरक्षण मिल रहा है। इन पाखंडी बाबाओं और उनके साथ जुटे अपराधी तत्वों से राजनेताओं की भी गहरी छनती है ताकि जनता उनकी करतूतों पर आंख न उठा सके।

समय-समय पर होने वाली इन घटनाओं से साफ हो चुका है कि धर्म और समाज सेवा की आड़ में अवैध कब्जे कर आश्रम बनाने वाले कितने दुराग्रही, हिंसक और कपटी हैं। व्यभिचारी राम रहीम के आश्रम से तो एके-47 तक बरामद हो जाता है। सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर बाबा बने रामपाल के सतलोक आश्रम से नकदी, हथियार, बुलेट प्रूफ जैकेट, कमांडो परिधान, पेट्रोल बम, तेजाब और मिर्ची बम, पेट्रोल बम, तेजाब और मिर्ची बम पाए जाते हैं। ऐसा ही किस्सा आसाराम बापू नामक महा ढोंगी का है। ये सब अपनी समानांतर सेना रखते रहे हैं। भुजबल, सत्ताबल की आड़ लेकर अकूत धनबल के मालिक बने बैठे हैं। मथुरा, काशी, अयोध्या, कहीं भी ऐसे तीर्थ स्थलों पर चले जाइए, वहां की हकीकत खंगालिए, तो पता चलता है कि इतनी संगठित मुस्टंडई तो अपराधी भी नहीं कर सकता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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