सड़क पर रिज्यूम बांटकर नौकरी मांगने की नई तरकीब

एक झटके में मिले दो सौ कंपनियों के ऑफर

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वह पहले तो अपनी कंपनी खोलना चाहता था। सफल नहीं हुआ। नौकरी करने लगा। वह भी चली गई तो जॉब के लिए दर-दर भटकता रहा। किसी ने नहीं सुनी। एक दिन वह सड़क पर रिज्यूम बांटने लगा। खबर ट्विटर पर वायरल हुई। एक झटके में गूगल, नेटफ्लिक्स, लिंक्डइन जैसी दो सौ बड़ी कंपनियों के ऑफर आ धमके।

भले ही परिस्थितियों ने साथ नहीं दिया हो और असफलता मिलती रही हो, लेकिन सफल वही होता है, जो आगे बढ़ने का जुनून पाले रहता है। यह साबित किया है, डेविड कैसारेज ने।

हाल ही में जॉब पाने का दुनिया में एक नया ट्रेंड चला है अमेरिका से। बेरोजगारी से आजिज आकर डेविड कैसारेज ने चौराहे पर अपना रिज्यूम क्या लहराया, वाकया वायरल होते ही उस पर नौकरियों की बरसात होने लगी। वह भी कोई मामूली ऑफर्स नहीं, गूगल जैसी कंपनियां उसे नौकरी पर बुलाने लगीं। लाजवाब तरकीब क्या खूब चल निकली। संभव है आने वाले दिनो में अन्य देशों के बेरोजगार भी कुछ ऐसा ही रवैया अपनाएं, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। अगर कुछ करने का माद्दा हो और आउट ऑफ द बॉक्स सोचा जाए, तो मेहनत रंग लाती है।

भले ही परिस्थितियों ने साथ नहीं दिया हो और असफलता मिलती रही हो, लेकिन सफल वही होता है, जो आगे बढ़ने का जुनून पाले रहता है। यह साबित किया है, डेविड कैसारेज ने। कैलिफोर्निया में टेक्सास की यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके जो डेविड एक नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा था, उसको कुछ ही दिनो में दो सौ नौकरियों के ऑफर मिल गए। डेविड कैसारेज की नौकरी जा चुकी थी। कोई भी कंपनी उसका रिज्यूम सिलेक्ट करने को तैयार नहीं तो डेविड ने एक अनोखी तरकीब निकाली। उन्होंने साल 2014 से 2017 तक जनरल मोटर्स में काम काम किया लेकिन हाल ही में एक दिन उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उसके बाद उन्हें कोई भी कंपनी नौकरी देने को तैयार नहीं थी।

एक दिन डेविड ने कंपनियों को रिज्यूम भेजने की बजाए सड़क पर ही लोगों को अपना रिज्यूम बांटना शुरू कर दिया। लोग उसे भिखारी न समझ लें, इसके लिए उसने अपने साथ एक पोस्टर भी हाथों में उठा रखा था। पोस्टर पर लिखा था- 'बेघर लेकिन सफलता का भूखा, रिज्यूम ले लीजिए (अनूदित)।' उस समय डेविड की सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी। रहने, खाने भर को भी उसके पास पैसे नहीं रह गए थे। लंबे वक्त से वह अपनी कार में ही रह रहा था। जब डेविड चौराहे पर अपना पोस्टर लहरा था, उसी वक्त वहां से जैसमीन स्कॉफील्ड नाम की एक महिला गुजर रही थीं। उन्होंने उसकी तस्वीर और रिज्यूम लेकर ट्विटर पर शेयर कर दिया।

फिर क्या था, देखते ही देखते ये पोस्ट 'गेट डेविड अ जॉब' (डेविड को नौकरी दिलाओ) हैशटैग के साथ वायरल हो गया और डेविड को गूगल, नेटफ्लिक्स, लिंक्डइन जैसी दो सौ बड़ी कंपनियों के ऑफर आ धमके। ट्विटर पर डेविड की काफी तारीफें होने लगीं। लिंक-शेयरिंग साइट रेडडिट पर भी पसंद किया जाने लगा। डेविड की तस्वीर लेने वाली महिला ने कुछ क्लोज-अप फोटोज भी लिए थे, लिहाजा डेविड के रिज्यूमे में लिखी डिटेल्स भी साफ दिख रही थीं। उनके लिए ट्विटर पर #GetDavidAJob की-वर्ड वायरल होने लगा।

डेविड को जहां-जहां से नौकरियों की पेशकश हुई, उनमें से कई स्थानीय स्टार्ट-अप्स की तरफ से थीं। तभी गूगल की तरफ से भी नौकरी की पेशकश मिली। अपनी खुद की टेक कंपनी खड़ी करने से पहले डेविड ऑस्टिन में एक वेब डेवलपर के रूप में भी काम कर चुका था मगर, उसकी टेक कंपनी के विफल होने की वजह से पास के पार्क में एक बेंच पर सोने तो कभी अपनी कार में दिन काटता रहा। डेविड का कहना था कि नौकरी तलाशते-तलाशते मेरे सारे पैसे खत्म हो चुके थे। मैं घर नहीं लौटना चाहता था। सिलिकॉन की गलियों में अपना रिज्यूम बांटने लगा। ‘get David job’ वायरल होने के बाद उसने जैसमीन से भी संपर्क किया। वायरल होने के बाद कई दिनो तक उनके पास भी नौकरियों की पेशकश आने लगी थीं। जैसमीन ने ट्विटर पर लिखा था- Today I saw this young homeless man asking for people to take a resume rather than asking for money. If anyone in the Silicon Valley could help him out, that would be amazing. Please RT so we can help David out!

एक तरफ डेविड जैसे शख्स को चौराहे पर रिज्यूम बांटना फलित हो गया। इधर हमारे देश में नौकरियां दिलाने के नाम पर आए दिन ठगी की वारदातें हो रही हैं। अभी-अभी उत्तर प्रदेश के शामली जिले से ऐसा ही एक ताजा मामला उजागर हुआ है। जिले के बाबरी थानाक्षेत्र में रेलवे की नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय एक गिरोह ने लगभग एक दर्जन युवाओं को निशाना बनाया है। जालसाजों ने युवाओं से नौकरी लगवाने के नाम 14 लाख की ठगी की है। नौकरियों के लिए इससे अलग मिजाज की एक सूचना और। एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में एशिया के दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा लोगों को नौकरियां मिलने वाली हैं। पिछले दो साल से तुलना करें तो भारत में हायरिंग प्रक्रिया में बढ़ोतरी हुई है. चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में कुछ सेक्टर्स की बहुत सी कंपनियां ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को हायर कर रही हैं। साल 2017 के अक्टूबर-मार्च के दौरान नेट एमप्लॉयमेंट आउटलुक 91 फीसदी था, जबकि इस साल इसी समयावधि अक्टूबर-मार्च 2017-18 में अब तक एमप्लॉयमेंट आउटलुक 95 प्रतिशत रहा है। एमप्लॉयमेंट आउटलुक में 4 प्वॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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