समाज की दकियानूसी सोच को चुनौती दे रहा है इंडियन एयरफोर्स का ये वीडियो

इंडियन एयरफोर्स का नया वीडियो: 'वो लड़की जो घर बनाती है, अब घर बचाएगी'

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देश की लड़कियों को उस वक्त एक नया हौसला मिला था, जब साल 2015 में महिला दिवस के मौके पर इंडियन एयरफोर्स ने तीन महिला अधिकारियों को लड़ाकू पायलट के तौर पर शामिल करने की घोषणा की थी और फिर वो दिन भी आ गया जब वे तीनों महिला पायलट लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए तैयार हो गईँ। एडवर्टाइजिंग एजेंसी ग्रे ग्रुप मीडिया ने इंडियन एयरफोर्स की इन बहादुर महिलाओं की शक्ति का अंदाजा कराने के लिए एक वीडियो बनाया है, जिसकी आखिरी लाइन कुछ इस तरह है, 'वो लड़की जो घर बनाती है, अब घर बचाएगी'

फोटो साभार: youtube
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1991 में पहली बार महिला पायलटों को इंडियन एयरफोर्स में हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट प्लेन उड़ाने का मौका मिलना शुरू हुआ था। तब से अब तक लगभग 26 साल बाद महिलाएं लड़ाकू विमान के जरिए अपनी ताकत का लोहा मनवाएंगी। आपको जानकर हैरानी होगी, कि पड़ोसी मुल्क चीन और पाकिस्तान में 3 साल पहले 2013 में ही एयरफोर्स में महिला फाइटर पायलटों को शामिल किया गया था।

काफी कड़ी ट्रेनिंग और मेहनत के बाद पिछले साल 18 जून को तीन महिला फाइटर पायलट भावना कांत, अवनि चतुर्वेदी और मोहना सिंह को एयरफोर्स में फाइटर प्लेन उड़ाने के लिए कमीशन दिया गया था। एयरफोर्स में फाइटर प्लेन उड़ाने के मामले में अभी तक पुरुषों का एकाधिकार था। महिला पायलट होती जरूर थीं, लेकिन उन्हें केवल ट्रांसपोर्ट एयर प्लेन और हेलीकॉप्टर ही उड़ाने को दिया जाता था। लेकिन इस बार तीन महिलाओं को ये जिम्मेदारी देने की योजना बनाई गई। इन तीनों महिला पायलेट्स ने फाइटर प्लेन उड़ाने के साथ ही देश की उन तमाम लड़कियों को हौसला और उनके सपनों को उड़ान दी है, जिन्हें समाज की पुरुषवादी सोच के कारण से आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता।

ये महिलाए अब जंग के मैदान में तेज रफ्तार से उड़ने वाले तेजस और सुखोई जैसे फाइटर प्लेन में कलाबाजियां करेंगी। इंडियन एयरफोर्स के इतिहास में इसे बेहद अहम माना जा रहा है। इन्हें ट्रेनिंग के पहले चरण के लिए हैदराबाद भेजा गया था। उसके बाद एडवांस ट्रेनिंग के लिए इन्हें कर्नाटक के बीदर में एक साल गुजारना पड़ा। इस विडियो में कही गई पंक्तियां कुछ इस तरह हैं,

"एक लड़की हूं मैं,
धमाकों से डरना मेरी फितरत है
पटाखों से छुपना मेरी आदत है
इस तेज रफ्तार में कहीं पीछे रह जाऊंगी
आसमान की ऊंचाइयों से घबरा जाऊंगीं
नौकरी का वजन कहां उठा पाऊंगी
एक लड़की हूं न हार मान जाऊंगी
अपनी हसरतों को मारकर एक लड़का जन्मूंगी
किसी और की खुद्दारी पर पलकें झपकाऊंगी
बराबरी के सपने देखूंगी, तो तोड़ दिए जाएंगे
ख्वाहिशों को पर लगाऊंगी, तो काट दिए जाएंगे
एक लड़की ही तो हूं
वो लड़की जो घर बनाती है
अब घर बचाएगी..."

संदीपन भट्टाचार्य को ये वीडियो बनाने में करीब 8 महीने लग गए। उन्हें कई तरह की मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन वे कहते हैं, कि ये ऐसा काम था जिससे उन्हें प्यार हो गया था।

इस वीडियो के आइडिया के बारे में बात करते हुए ग्रे ग्रुप के चीफ क्रिएटिव ऑफिसर संदीपन भट्टाचार्य कहते हैं, कि 'हम ऐसे वक्त में जी रहे हैं जहां देश की बड़ी आबादी अभी भी ये मानती है कि लड़कियों को घर के भीतर ही रहना चाहिए। उन्हें घर के काम करने चाहिए और शादी होने के बाद बच्चों की जिम्मेदारियां संभालनी चाहिए। लेकिन इस विडियो के जरिए हम समाज की उस दकियानूसी सोच को चैलैंज करना चाहते हैं।' साथ ही संदीपन ये भी कहते हैं, कि 'आपने देखा होगा कि पिछले एक दशक में जेंडर इक्वलिटी के बारे में लोगों की सोच काफी बदली है। कई सारे ब्रैंड्स ने इस पर सोचना शुरू किया है और तमाम ऐड ऐसे बने भी जिनमें महिलाओं को पुरुषों से कंधा मिलाते हुए दिखाया गया।' वे आगे कहते हैं, 'लेकिन उन तमाम वीडियो और इस वीडियो में फर्क ये है, कि उसमें लड़कियां मॉडल्स होती हैं जबकि इस वीडियो में वही महिला फाइटर पायलट हैं जो प्लेन उड़ायेंगी।' संदीपन को ये वीडियो बनाने में करीब 8 महीने लग गए। उन्हें कई तरह की मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन वे कहते हैं, कि ये ऐसा काम था जिससे उन्हें प्यार हो गया था।

1991 में पहली बार महिला पायलटों को इंडियन एयरफोर्स में हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट प्लेन उड़ाने का मौका मिलना शुरू हुआ था। तब से अब लगभग 26 साल बाद महिलाएं लड़ाकू विमान के जरिए अपनी ताकत का लोहा मनवाएंगी। आपको जानकर हैरानी होगी कि पड़ोसी मुल्क चीन और पाकिस्तान में 3 साल पहले 2013 में ही एयरफोर्स में महिला फाइटर पायलटों को शामिल किया गया था।

भारत की उन तीन महिला पायलट्स के बारे में जानना भी बेहद जरूरी है, जो वीडियो में दिखाई दे रही हैं। फ्लाइट कैडेट अवनी चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के सतना जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने राजस्थान की बनस्थली यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। वहीं फ्लाइट कैडेट मोहना सिंह राजस्थान के झुनझूनू में पैदा हुई थीं। उनके पिता भी वायुसेना में हैं। मोहना की पढ़ाई दिल्ली के एयरफोर्स स्कूल से हुई और उन्होंने अमृतसर से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में बीटेक की डिग्री हासिल की है। फ्लाइट कैडेट भावना कांत पिछड़े कहने जाने वाले राज्य बिहार के बेगूसराय से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता इंजीनियर हैं। भावना ने भी बीटेक किया है।

इन तीनों महिला पायलट्स को पहले 6 महीने में 55 घंटे की ट्रेनिंग दी गई उसके बाद अगले 6 महीने 87 घंटे की किरन ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद इन्हें कमीशंड कर दिया गया। लेकिन कमीशंड होने के बाद एक साल की एडवांस ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है। इनसे पहले साल 2012 में 2 महिला फ्लाइट लेफ्टिनेंट अल्का शुक्ला और एमपी शुमाथि ने लड़ाकू हेलिकॉप्टर्स के लिए ट्रेनिंग पूरी की थी।

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