आप लीजिए शॉर्ट ब्रेक, ‘LifeIsOutside’ बनाएगा प्लान

LifeIsOutside बना रहा है छुट्टियों को मजेदारभाई-बहन मिलकर बता रहे हैं कहां जाएं और क्योंशॉर्ट ब्रेक में घूमने के हैं कई ऑप्शन

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घूमना फिरना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन हम भारतीय इस मामले में थोड़े कंजूस हैं। एक्सपेडिया ने साल 2012 में छुट्टी के अभाव पर एक अध्ययन किया। दुनिया के 22 देशों में किए गए उस अध्ययन के मुताबिक हमारा देश चौथे नंबर पर था जहां पर लोग घुमने के लिए ज्यादा छुट्टियां नहीं लेते। जैसा कि अमेरिका, यूरोप और दूसरे विकसित देशों में लोग करते हैं। इस अध्ययन के मुताबिक गिनती के भारतीय ऐसे थे जो साल भर में 15 दिनों से लेकर 1 महिने की छुट्टी लेते थे। लेकिन वक्त के साथ इसमें बदलाव आया और एक्सपेडिया के साल 2013 के सर्वे में ये बात सामने आई है कि लोग अपने काम से हफ्ते भर से लेकर 10 दिनों का ब्रेक घुमने के लिए लेने लगे हैं। यही वजह रही कि दोबार हुए इस अध्ययन में भारत का स्थान चौथे से दसवें पर आ गया।

भारत में अपने काम से छुट्टी ना लेने की काफी सारी वजहें हैं। जैसे योजना ना बनाना, महंगाई, काम का दबाव, कड़ा मुकाबला और घुमने फिरने को जरूरत से ज्यादा लक्जरी मानना है। बावजूद भारतीयों में बदलाव आ रहा है जैसे वो लंबा ब्रेक लेने से भले ही गुरेज करें लेकिन 3 से 4 दिनों का ब्रेक को लेकर उनकी सोच बदली है। लेकिन छोटे से ब्रेक के लिए बाजार में ऑफर की काफी कमी है और जो हैं उनको किसी आम इंसान के लिए ढूंढ पाना मुश्किल है। बेंगलौर मे रहने वाले एक भाई बहन को भी साल 2010 में ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ा था तब उन्होने फैसला लिया कि वो इस समस्या का हल निकालेंगे।

विपुल और यामिनी कसेरा यात्रा से जुड़ा कोई काम नहीं करना चाहते थे क्योंकि उनके पास इसको लेकर कोई तजुर्बा नहीं था। यामिनी आईआईएम बेंगलौर से इंजीनियरिंग कर इंफोसिस, Goldman Sachs और Asklaila जैसी कंपनियों में काम कर चुकी हैं। तो उनके भाई विपुल ने इंजीनियरिंग के साथ साथ इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया हुआ है। वो Thoughtworks में काम कर चुके हैं जबकि carpooling के वो संस्थापक हैं। लेकिन जब उनके सामने ये समस्या आई तो दोनों भाई बहन ने इसका हल निकालने का फैसला लिया। इन्होने देखा कि इस क्षेत्र में स्पष्ट दृश्यता का अभाव है। कम से कम गूगल जैसी वेबसाइट में भी बेंगलौर और मुंबई जैसे शहरों के बारे में भी इस तरह की जानकारी नहीं मिलती। यात्रा के बाजार को देखते इन लोगों को इस क्षेत्र मे एक मौका दिखा और उन्होने LifeIsOutside को लांच कर दिया। इसको शुरू करने से पहले उन्होने इसके कई पॉयलट तैयार किये।

घुमने फिरने की जानकारी देने वाले इस बाजार में TripAdvisor और HolidayIQ जैसे कई पोर्टल हैं। जो छोटे और सप्ताहांत यात्रा की जानकारी देते हैं। इसके अलावा वो जो भी करते वो बाजार पर नियंत्रण बनाये रखने के लिए करते हैं। विपुल के मुताबिक हम लोग इनसे हट कर काम कर रहे हैं। क्योंकि कोई भी जब घुमने के लिए जगह ढूंढता है तो वो अपना बजट भी देखता है इसलिए ये किसी यात्रा का प्लान बनाने से लेकर उसके पूरा होने तक यात्री की मदद करते हैं। विपुल के मुताबिक उनके काम करने का तरीका येलो पेज की तरह नहीं होता। कोई भी इन पर ऐसे विश्वास कर सकता है जैसे कोई एक दोस्त पर करता है।

इस वक्त LifeIsOutside काफी शानदार काम कर रहा है। अपने एक साल के काम के दौरान इन लोगों ने एक हजार लोगों की यात्राओं पर काम किया। जिसके बाद इन लोगों का लक्ष्य हर साल 10 हजार से लेकर 12 हजार

लोगों की यात्राओं में मदद करना है। विपुल के मुताबिक उनके इस उद्यम ने सधी हुई शुरूआत की है और उनको बाजार से साधारण, ऊंचे और निम्न स्तर तक की हर हिस्सेदारी में जगह मिली है। इन लोगों की सफलता के पीछे मुख्य वजह उनकी सोच, वेबसाइट का डिजाइन के साथ साथ यात्रा से जुड़े ईको सिस्टम की जानकारी जुटाना है। इस दौरान इन लोगों ने इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों से मिलकर इस काम को समझने की कोशिश की। विपुल का कहना है कि इन्होने शुरूआत में ही जान लिया था कि इस खेल में सिर्फ जोश की जरूरत नहीं होती बल्कि आपको ट्रेवल कारोबार की समझ भी होनी चाहिए और पिछले कुछ सालों के दौरान इन लोगों की ना सिर्फ ग्राहकों के व्यवहार के प्रति सोच बढ़ी है बल्कि ट्रेवल इंडस्ट्री के बारे में जानकारियां दिनों दिन बढ़ रही हैं। यही वजह है कि आज ये जिस जगह पर हैं, उसी सोच की बदौलत हैं। इस क्षेत्र में भी दूसरे क्षेत्र की तरह चुनौतियां है जिनका सामना करना ये भाई बहन अच्छी तरह जानते हैं। इसके लिए वो हर तरीका अपनाते हैं भले ही वो नया हो या पुराना।

भाई बहन की LifeIsOutside कंपनी हर स्तर के ग्राहक के लिए अलग अलग तरीके से छोटी यात्राओं को डिजाइन करती है। इन लोगों का दावा है कि इनके पास हर किसी के लिए कुछ ना कुछ है। फिर चाहे को कोई प्रेमी जोड़ा एक छोटा सा रोमांटिक ब्रेक चाहता हो, कोई परिवार के साथ अपनी छुट्टियां बिताना चाहता हो या फिर कॉरपोरेट ग्रुप मजे के लिए कई बाहर जाने की योजना बनाना चाहता हो। कंपनी के पास कई ऐसे ग्राहक हैं जो बार बार इनके पास आते हैं तो कई ऐसे हैं जो दूसरों से तारीफ सुनकर अपनी यात्रा के लिए इनसे मदद लेते हैं। ये लोग कई कॉरपोरेट कंपनियों के साथ भी काम कर रहे हैं जहां पर ये लोग घुमने फिरने की योजना बनाने के साथ साथ उनको यात्रा के दौरान दूसरी सुविधाएं भी मुहैया कराते हैं इसके लिए ये लोग कई दिलचस्प विकल्प देते हैं। जिसके काफी अच्छे परिणाम इन लोगों को मिल रहे हैं। कॉरपोरेट से मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रिया के बाद अब ये लोग दूसरे शहरों का रूख करने पर भी सोच रहे हैं। हर शहर की अपनी खासियत होती है। अब सैलानियों में एक नई प्रवृति उभर रही है कि वो पारंपरिक जगहों के अलावा भी दूसरी ऐसी जगहों पर घूमना चाहते हैं जिनके बारे में लोगों को ज्यादा पता नहीं है। इतना ही नहीं कई पॉपुलर रिसॉर्ट होने के बावजूद लोग घूमने फिरने में कई तजुर्बे करना चाहते हैं। इसके अलावा इन लोगों की नजर अपने पालतू जानवरों के साथ लोग घूमने फिरने का मजा ले सके इस पर भी है।

हाल-फिलहाल LifeIsOutside को किसी निवेश की जरूरत नहीं है और ये लोग अपना काम खुद की कोशिशों से ही आगे बढ़ाना चाहते हैं लेकिन काम के विस्तार को देखते हुए ये लोग भविष्य में इस पर विचार कर सकते हैं। विपुल का कहना है कि उनका मुख्य लक्ष्य ग्राहक की संतुष्टि है। इन लोगों की तमन्ना बाजार पर छाने की है। क्योंकि इनका मानना है कि शॉर्ट ब्रेक में घूमने की जानकारी का मिलना अब भी किसी चुनौती से कम नहीं है। यही वजह है कि जब भी कोई वीकेंड गेटवे की तलाश गूगल में करता है तो पहला नाम LifeIsOutside का आता है।