मशीन लर्निंग के माध्यम से ट्रेनों में होने वाली देरी और समय की सही जानकारी दे रहा है ये स्टार्टअप 

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 जहां एक तरफ भारतीय रेलवे अपनी अक्षमता को कम करने के लिए नई टेक्नोलॉजी और सिस्टम को पेश कर रही है तो वहीं एक ट्रैवल स्टार्टअप भी है जो रेलवे से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए तत्पर दिखाई पड़ता है।

इस स्टार्टअप को डेटा के बड़े उपयोग के लिए भी जाना जाता है। ये स्टार्टअप अपने ऐप के माध्यम से कई वर्षों से एकत्र किए गए पिछले डेटा का उपयोग कर ट्रेन समय का विश्लेषण करता है। 

अगर आप ट्रेन के देरी से आने पर या ट्रेन के गलत अनुमानित समय पर आने से नाराज हैं? तो ये ऐप आपकी मदद करने जा रहा है। दरअसल जहां एक तरफ भारतीय रेलवे अपनी अक्षमता को कम करने के लिए नई टेक्नोलॉजी और सिस्टम को पेश कर रही है तो वहीं एक ट्रैवल स्टार्टअप भी है जो रेलवे से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए तत्पर दिखाई पड़ता है। दरअसल रेलयात्री ऐप (RailYatri) ने पहले से एकत्रित डेटा के आधार पर मशीन लर्निंग जैसी तकनीक का उपयोग करते हुए 'आगमन का अनुमानित समय' अर्थात 'Estimated Time of Arrival (ETA)' की गणना करने के लिए एक तकनीक पेश की है।

अक्सर देखा गया है कि रेलवे का मौजूदा सिस्टम यात्रियों को उनकी गाड़ियों के एस्टीमेटेड टाइम ऑफ अराइवल (ईटीए) पर सही जानकारी नहीं दे पाते हैं। इस वजह से वह प्लेटफॉर्म पर केवल प्रतीक्षा करते रहते हैं, और उन्हें पता ही नहीं होता है कि उनकी ट्रेन आखिरकार कब आएगी। खुद इस स्टार्टअप ने अपनी एक प्रेस रिलीज में कहा है कि मौजूदा सिस्टम की विफलता के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मौजूदा सिस्टम ट्रेन के सही आगमन और प्रस्थान के समय को नहीं बता पा रहा है। जिसे चलते यात्रियों को समस्या होती है। हालांकि अब रेलयात्री ऐप का इनोवेटिव ETA भविष्यवाणी एल्गोरिदम उस गैप को भरने में मदद कर रहा है जिसके चलते यात्रियों को ट्रेन के आने और जाने के सही समय का अनुमान लगाना मुश्किल होता था।

इस स्टार्टअप को डेटा के बड़े उपयोग के लिए भी जाना जाता है। ये स्टार्टअप अपने ऐप के माध्यम से कई वर्षों से एकत्र किए गए पिछले डेटा का उपयोग कर ट्रेन समय का विश्लेषण करता है। साथ ही यह भी दावा करता है कि "ट्रेन की यात्रा का अनुमान लगाने के मौजूदा तरीके की तुलना में इसकी भविष्यवाणी लगभग 110 प्रतिशत बेहतर है।"

रेलयात्री के सह-संस्थापक कपिल रायजादा कहते हैं कि "भारत में ट्रेन आने की भविष्यवाणी करने की विधि कई दशकों से बदली नहीं है और यह केवल गति और दूरी के विभाजन पर आधारित होती है। हम मानते हैं कि ऐतिहासिक जानकारी रखने से यह भविष्यवाणी अधिक सटीक होगी। जैसे की यातायात का बढ़ना, आपा-धापी, मौसम, आदि।" संस्थापक यह भी दावा करते हैं कि सिस्टम एडॉप्ट करना आसान है। 2016 में, स्टार्टअप ने अपने सभी मौजूदा निवेशकों- नंदन नीलेकणी, हेलियन वेंचर्स, ओमिडियार पार्टनर्स और ब्लूम वेंचर्स से भागीदारी के साथ फ्रेश फंडिंग हासिल की थी। 

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