नौकरी छोड़ करोड़पति मैन्युफैक्चरर बने धनप्रकाश

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उत्तर प्रदेश के धनप्रकाश शर्मा नौकरी छोड़ किसानों के लिए स्प्रेयर मशीनें बनाने लगे तो तीन महीने में ही उनको साढ़े पांच लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ। अब कुल जमा छह सहयोगी कर्मचारियों के बूते उनका बिजनेस हरियाणा, उत्तराखंड तक फैल चुका है। अपनी मेहनत और सफलता से वह करोड़पतियों में शुमार होने लगे हैं।

धन प्रकाश
धन प्रकाश
धनप्रकाश की स्प्रेयर मशीनों की इसलिए भी भारी डिमांड है कि फसलों पर कीटों, रोगों का प्रकोप होने पर अभी तक किसान हाथ से चलाने वाली स्प्रे मशीन का प्रयोग करते रहे हैं।

किसानों के लिए अच्छी खबर है कि अब उन्हें फसलों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने के लिए हाथ से चलने वाली स्प्रेयर मशीनों से छिड़काव नहीं करना पड़ता है। अब बाजार में बैट्री चालित स्प्रे मशीनें आ गई हैं। ग्रीव्स कॉटन कंपनी तो किसानों को उनकी फसल के अनुसार उनके खेतों में आधुनिक कृषि यंत्रों को चलाने की ट्रेनिंग भी दे रही है। इसके बाद उन्हें सस्ते दर पर कृषि यंत्र खरीदने में मदद भी करती है। इस कंपनी के देशभर में हजारों आउटलेट्स हैं, जहां किसान किफायती दर पर स्प्रेयर खरीदते रहते हैं।

ऐसी ही स्प्रेयर मशीनों के निर्माण ने शामली (उ.प्र.) के मैन्युफैक्चरर धनप्रकाश शर्मा के जीवन में एक नई रोशनी ला दी है। धन प्रकाश ने मेरठ यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीएससी किया है। एग्रीकल्चर में डिग्री लेने के बाद वह एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग की नौकरी लगे। वहां उनका काम करने में मन नहीं लगा। खेती में करियर अब सिर्फ खेती-बाड़ी तक ही सीमित नहीं रह गया है। इस सेक्टर के बदले हालात लोगों को अन्य सेक्टरों की ही तरह आकर्षित करने लगे हैं। एग्रीकल्चर को करियर की तरह लेने के लिए सरकार तरह-तरह के कोर्स कराती रहती है।

अपनी नौकरी के दौरान ही इसी का फायदा उठाने के बारे में सोचा धन प्रकाश शर्मा ने और इसमें उन्हे मदद मिली सरकार के 'एग्री क्लिनिक एग्री बिजनेस सेंटर' से। इसमें उन्होंने दो माह प्रशिक्षण लिया। इसके बाद तो उनकी जिंदगी ही बदल गई। दरअसल, अपनी बारह साल की नौकरी के दौरान धनप्रकाश को गांव-गांव जाने का अवसर मिला तो वह किसानों की समस्याओं से निकट से परिचित होने लगे। आखिरी दिनो में उन्हें अपनी नौकरी से मात्र पंद्रह हजार रुपए महीने मिल पा रहे थे जिससे आज के जमाने में घर-गृहस्थी की गाड़ी खींच पाना आसान नहीं रह गया था। अपनी और नौकरी की स्थितियों पर पूरी तरह सोच-विचार के बाद ही धनप्रकाश का खुद का कोई बिजनेस करने का मन हुआ। उन्होंने ठान लिया कि अब चाहे जो भी हो, नौकरी तो नहीं ही करेंगे। उन्होंने नौकरी छोड़ दी। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने खेती में काम आने वाली सस्ते दाम की कोई मशीन बनाने के बारे में सोचा, जिसे किसान आसानी से खरीद सकें।

इसके बाद धनप्रकाश को एकमुश्त धनराशि की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने वर्ष 2015 में सबसे पहले 'पशुपति एग्रोटेक' नाम से अपनी कंपनी बनाई। पैसे के लिए उन्होंने यूनाइटेड बैंक के अधिकारियों से संपर्क किया। वहां से उन्हे 21.5 लाख रुपए का लोन मिल गया। इसके बाद उन्होंने फसलों पर छिड़काव करने वाली 'नैपसैक स्प्रेयर' नाम की मशीन की मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी। इससे फसलों पर केमिकल्स का छिड़काव किया जाता है। इस मशीन की मैन्युफैक्चरिंग और सेल से धनप्रकाश को तीन महीने में ही साढ़े पांच लाख का शुद्ध मुनाफा हुआ तो अपने काम के प्रति उनका मनोबल और बढ़ गया। उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर एक करोड़ रुपए हो गया। मैन्युफैक्चरिंग में कुल जमा छह सहयोगी कर्मचारियों के बूते उनका बिजनेस उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड तक फैल गया।

धनप्रकाश की स्प्रेयर मशीनों की इसलिए भी भारी डिमांड है कि फसलों पर कीटों, रोगों का प्रकोप होने पर अभी तक किसान हाथ से चलाने वाली स्प्रे मशीन का प्रयोग करते रहे हैं। इस तरह छिड़काव करने के दौरान लगातार हाथ चलाना पड़ता है, जिससे उन्हें खासी थकान हो जाना स्वभाविक है। इसके साथ ही पुरानी किस्म की मशीनों से एक दिन में अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र में ही दवा का छिड़काव हो पाता था जबकि बैट्री चालित मशीन से किसान दिनभर में कम से कम दो एकड़ से लेकर एक हेक्टेयर तक फसल पर आसानी से छिड़काव कर लेते हैं। धनप्रकाश की बैट्री चालित मशीन में एक नोजल हैंडल लगा हुआ होता है, जिसकी बैट्री एक बार पूरी तरह से चार्ज हो जाने के बाद पांच-छह घंटे तक बिना रुके चलती रहती है। इसकी बैट्री का आकार मोबाइल फोन की बैटरी से थोड़ा बड़ा है।

धनप्रकाश की फैक्ट्री में निर्मित एक से तीन हजार रुपए तक की कीमत वाली बैट्री चालित स्प्रेयर से किसानों का काम काफी आसान होने लगे। इस बीच किसानों से अपनी मशीन के बारे में मिले फीडबैक के आधार पर अब वह 'नैपसैक स्प्रेयर' को नए सिरे डिजायन करा रहे हैं। उन्होंने एक ऐसी भी स्प्रेयर मशीन डिजाइन करा ली है, जिसका इस्तेमाल ट्रैक्टर के साथ किया जा सकता है। यह जरा महंगी है। इसकी कीमत छत्तीस हजार रुपए है। अब धन प्रकाश सीड्स और पेस्टिसाइड्स के बिजनेस में भी हाथ आजमा रहे हैं। वह अपनी फैक्ट्री में सस्ती दरों वाली एनर्जी इफिशन्ट्ली सोलर ड्रायर, सीड्स ड्रिल, मल्टीपर्सपस सिकलर्स आदि के निर्माण में भी जुट गए हैं।

भारत सरकार भी एग्रिकल्चरल मशीनरी को बढ़ावा दे रही है ताकि किसानों का काम आसान कर पैदावार बढ़ाई जा सके। पूरी दुनिया में वैज्ञानिक तरह तरह की कृषि मशीनों का आविष्कार करने लगे हैं। अब तो एक ऐसी भी विदेशी मशीन आ गई है, जिससे 20 दिन में पौधे हाईब्रिड किए जा सकते हैं। इस सीडलिंग मशीन से पौधों को कीड़ों से बचाया भी जा सकता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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