15 हजार करोड़ के लॉन्जरी बाजार में 40 फीसद पुरुष खरीदार

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पंद्रह हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबारी लॉन्जरी बाजार भारत में तेजी से ग्रोथ कर रहा है। वैसे तो यह महिलाओं का बाजार है, ताजा सर्वे में खुलासा हुआ है कि इसमें 40 फीसद पुरुष खरीदार दखल रख रहे हैं। लॉन्जरी बाजार में सालाना 15 फीसद इजाफा हो रहा है, जिसमें 5000 करोड़ रुपए तक की खरीदारी ऑनलाइन है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
ऑनलाइन लॉन्जरी वेंचर जिवमी की संस्थापक रिचा कार का कहना है कि पुरुष खरीदारों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। देश के टॉप टेन शहरों में वैलंटाइन्स डे, सालगिरह, जन्मदिन के अवसरों के लिए लॉन्जरी खरीद में पुरुषों की संख्या और भी बढ़ जाती है। 

भारत में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तरों पर लॉन्जरी मार्केट का कारोबार 15000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इसमें सालाना 15 प्रतिशत का इजाफा हो रहा है। इसका दो तिहाई हिस्सा असंगठित क्षेत्र से, बाकी संगठित क्षेत्र से कवर हो रहा है। इसमें ऑनलाइन खरीददारी की हिस्सेदारी पांच हजार करोड़ रुपए है। एक ताजा सर्वे में पता चला है कि भले ही अधिकतर पुरुष लॉन्जरी स्टोर में जाने से हिचकिचाते हों, महिलाओं के अंडरगार्मेंट्स की ऑनलाइन खरीदारी के मामले में पुरुष आगे हैं। शादी के सीजन में ऐसे पुरुष खरीदारों की संख्या काफी बढ़ जाती है।

ऑनलाइन लॉन्जरी फर्म कोल्विया का कहना है कि इसके खरीदारों में औसतन करीब 25 फीसदी पुरुष हैं। कंपनी की संस्थापक नेहा कांत के मुताबिक जब नवंबर से फरवरी तक भारत के विभिन्न क्षेत्रों में शादी का सीजन होता है, लॉन्जरी की खरीदारी करने वाले पुरुषों की संख्या करीब 40 फीसदी तक पहुंच जाती है। यह अवधि शादी के सालगिरह का भी सीजन होती है। इनमें से कई ऑर्डर का तो गिफ्ट पैक कराया जाता है। उनके कस्टमर केयर सेंटर में पुरुषों की बहुत ही कॉलें आती हैं, जो अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड के लिए खरीदने को विभिन्न प्रकार के प्रॉडक्ट्स के बारे में पूछते हैं। कोल्विया का विज्ञापन पहले महिलाओं को लक्ष्य रखकर दिया जाता था लेकिन अब कंपनी लिंग-निरपेक्ष विज्ञापन देती है।

अब फैशन एक्सेसरीज में शुमार हो रहा लॉन्जरी मार्केट दो हिस्सों में विकसित हो रहा है। तीन साल पहले तक लॉन्जरी मार्केट का बाजार में सबसे ज्यादा शेयर थे। उस साल निक्कर, पेंटीज आदि का बाजार भी तेजी से विकसित हो रहा था। इस मार्केट के विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2024 तक लॉन्जरी बाजार में आश्चर्यजनक उछाल आ सकता है। इस समय भारत के लगभग हर छोटे-बड़े शहर में ऑनलाइन लॉन्जरी स्टोर और स्टोरफ्रंट खुल चुके हैं। जबिक तीन साल पहले तक ऑनलाइन स्टोर के जरिए लॉन्जरी मार्केट दौड़ रही थी। अब तो ज्यादातर ईकॉमर्स साइट्स महिलाओं के लिए तरह-तरह के आकर्षक ऑफर दे रही हैं। विकासशील देशों में तो लॉन्जरी इंडस्ट्री ने वृहद आकार ले लिया है। ऐसे देशों में लॉन्जरी महिलाओं का तेजी से नए ट्रेंड से जुड़े उत्पादों की ओर तेजी से झुकाव बढ़ रहा है। इन देशों में लॉन्जरी खरीदारी करते समय महिलाएं काफी सतर्क रहती हैं। सेल के समय वे देखती हैं कि उनपर कौन सा रंग ज्यादा अच्छा लगेगा, जिम ज्वॉइन करने से पहले जिमवियर की शॉपिंग कैसी होनी चाहिए।

ऑनलाइन लॉन्जरी ब्रैंड 'प्रिटीसीक्रिट्स' के संस्थापक करण बहल का कहना है कि उनकी नेट सेल्स में करीब 15 से 20 फीसदी पुरुष का हिस्सा होता है। ऑनलाइन लॉन्जरी वेंचर जिवमी की संस्थापक रिचा कार का कहना है कि पुरुष खरीदारों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। देश के टॉप टेन शहरों में वैलंटाइन्स डे, सालगिरह, जन्मदिन के अवसरों के लिए लॉन्जरी खरीद में पुरुषों की संख्या और भी बढ़ जाती है। 'मास' द्वारा अधिग्रहित अमान्टे भारतीय महिलाओं के बीच, अपने बोल्ड स्टाइल, आकर्षक रंगों और वृहद बरायटी की रेंज के लिए लोकप्रिय हो रहा है। इसे भारत में सन् 2007 में लांच किया गया था। तब से लेकर इसने अपने उपभोक्ताओं को बढ़िया फैब्रिक अनुभव और नवीनतम अंतर्राष्ट्रीय ट्रेंड से अद्यतन रखने का कार्य किया है। 'पेरी' दैनिक प्रयोग के विभिन्न वैरायटी पेश कर रहा है। इसमें रंग और नाप के तमाम विकल्प उपलब्ध हैं।

ट्रायम्फ इंटरनेशनल को महिलाओं के आराम से सम्बंधित उत्पादों में विशेषज्ञता हासिल हो चुकी है, जो लुभावनी लिंगरी से लेकर अल्ट्रा हाई परफॉरमेंस फंक्शनल स्पोर्ट्सवियर जिन्हें ‘ट्राईएक्शन’ के नाम से जाना जाता है, पेश किया जा रहा है। लॉन्जरी मॉर्केट में ट्रायम्फ इंटरनेशनल हर उम्र की महिलाओं और पुरुषों के लिए शानदार उत्पाद पेश कर रहा है। मातृत्व वस्त्रों में उसकी मामाबेल रेंज लोकप्रिय हो रही है। इस समय लॉन्जरी मॉर्केट में ऐनामोर् भी एक सफल लिंगरी ब्रांड बन चुका है, जिसमें शेपवियर की विस्तृत रेंज उपलब्ध है। कहा जाता है कि इसका ऑवरग्लास कलेक्शन तो मर-मिटने लायक होता है। बारबरा ऑफ़ फ्रांस और गोकलदास अंतर्वस्त्र प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम द्वारा इसे सन् 2003 में लांच किया गया था, जो देश के 1800 से ज्यादा मल्टी-ब्रांड आउटलेट्स पर उपलब्ध है।

भारत में महिलाओं के अंतर्वस्त्र बेचने वाली सबसे बड़ी ऑनलाइन कंपनी जि़वामे की बिक्री पिछले चार साल में चार गुना बढ़ गई है। फिलहाल, तो ज़िवामे की कीमत 10 करोड़ डॉलर है। इस कंपनी को मार्केट में उतरे चार साल ही हुए हैं। हाल ही में इसे देश-विदेश के निवेशकों से चार करोड़ डॉलर हासिल हुए हैं। यह स्टार्ट अप, उन ई-रिटेलर कपंनियों में से एक है, जो उस हिचकिचाहट के बूते आगे बढ़ रही हैं, जिनका सामना भारतीय मध्यम वर्गीय परिवार की औरतें बाज़ार में अंतर्वस्त्र खरीदते वक्त करती हैं। हमारे देश के ग्यारह हज़ार करोड़ से अधिक लान्श़रे (अंतर्वस्त्र) बाज़ार में बहुत बड़ा हिस्सा मॉल और बाजारों में लगने वाली दुकानों का है, जहां ज्यादातर काउंटर्स पर पुरुषों की मौजूदगी रहती है। ऐसे में कई महिलाओं का कहना है कि वेबसाइट के ज़रिए लान्श़रे खरीदने में वह ज्यादा सहज महसूस करती हैं, साथ ही ऑनलाइन कंपनियों में ज्यादा वैरायटी और कम दामों पर खरीददारी हो पाती है।

टैक्नोपाक कंपनी प्रबंधन का कहना है कि सीमित बेस के साथ ही सही इस तरह की खरीददारी से ऑनलाइन लान्श़रे बाज़ार हर साल करीब 70 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। यह भी गौरतलब है कि इस दौर में महिलाएं लॉन्जरी चयन के प्रति ज्यादा सतर्क हो गई हैं। वह उत्पाद की गुणवत्ता और स्टाइल के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहतीं। उनकी इच्छाएं बढ़ती रहती हैं और वो ज्यादा बेहतर चीज़ की प्रतीक्षा में रहती हैं और अपने पसंदीदा स्टाइल के आंतरिक वस्त्र विकल्पों के साथ प्रयोग करना पसंद करती हैं। इससे भी बाजार में नए-नए ब्रांड आ गए हैं। इससे श्रेष्ठ मूल्य-प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है। कभी 'मूड्स ऑफ़ क्लो के नाम से जाना जाने वाला क्लोविया ब्रांड लगातार बाजार में बढ़ रहा है। वह प्रतिमाह पचास हजार यूनिट बेचने का दावा कर रहा है। बीते कुछ ही वर्षों में उसने लॉन्जरी मॉर्केट पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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