क्यों एक मां ने कहा, 'ये दिन देखने से अच्छा है, कि बेटी पैदा ही न हो'

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ 2012 में देश में रेप के 24,923 केस रजिस्टर्ड हुए थे। 2013 में ये संख्या बढ़कर 33,707 हो गई और 2014 में बलात्कार के मामलों की संख्या 35,000 से ज़्यादा हो गई। दिन ब दिन लड़कियों और महिलाओं के साथ रेप और छेड़खानी की बढ़ती घटनाएं न केवल समाज के लिए चिंताजनक हैं, बल्कि पूरी मानवता को शर्मसार करने वाली हैं।

अभी हाल ही में देश की सर्वोच्च अदालत ने 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए वीभत्स निर्भया कांड के दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी। इस फैसले का पूरे देश के लोगों ने स्वागत किया और उम्मीद जताई गई कि इससे समाज के बलात्कारी मानसिकता वाले लोगों में डर पैदा होगा। लेकिन ये उम्मीद तब खोखली निकल गई, जब फैसला आने के हफ्ते भर में ही हरियाणा के रोहतक में निर्भया जैसी एक और दरिंदगी की वारदात सामने आई।

बात 9 मई की है, हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली एक लड़की अपने ऑफिस से घर जा रही थी। तभी रास्ते में 4-5 लोगों ने उसका अपहरण कर कार में बैठा लिया। इसके बाद सभी ने उस युवती के साथ बारी बारी से कार में ही रेप किया। जिंदा रहने पर लड़की किसी को सच न बता दे, इसलिए उन्होंने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इधर घर वाले बेटी की तलाश में भटकते रहे। 11 मई को रोहतक पुलिस को लड़की की लाश बुरी हालत में मिली। पुलिस ने बताया कि युवती के शरीर को कुत्तों ने बुरी तरह नोच रखा था।

दिल दहलाने वाली इस वारदात के बाद युवती की मां ने कहा, 'मैं हर किसी से यही कहूंगी कि यह दिन देखने से अच्छा है कि बेटी ही न पैदा करो। जब तक ऐसे दरिंदे जिंदा हैं हर मां को अपनी बेटी के लिए डर लगा रहेगा।' बदहवास हालत में उनके मुंह से बस यही शब्द निकले, 'उसका इतना बुरा हाल किया... ऐसा किसी की बेटी का नहीं होना चाहिए... सरकार कहती है कि बेटी पैदा करो और ये दरिंदे ऐसे हत्या कर रहे हैं।' जब पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आई तो पता चला कि पीड़िता के साथ क्रूर बलात्कार के बाद हत्या की गई थी।

हैवानीयत की शिकार लड़की के सिर की हड्डी के कई टुकड़े हो गए थे और इतना ही नहीं उसके प्राइवेट पार्ट में कोई धारदार चीज डाल दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में सुमित नाम के एक युवक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इस घटना के पीछे की वजह और भी हैरानी भरी है। युवती की मां ने पुलिस को बताया कि आरोपी सुमित उसे पहले से जानता था और वो लड़की पर शादी करने के लिए दबाव बना रहा था। एक सप्ताह पहले ही जब वह काम से घर लौट रही थी, तो उसने उसे रोक लिया। जब युवती ने विरोध किया तो सुमित ने उसे धमकाया और उसे अपशब्द भी कहे। इस बात से खफा होकर युवती ने सुमित को थप्पड़ मार दिया था।

सुमित ने प्लानिंग के तहत रेप कर युवती की हत्या कर दी। युवती के घर वालों ने कहा कि पुलिस को सुमित के छेड़छाड़ की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया। अगर पुलिस उसी वक्त चेत जाती तो शायद उस लड़की की जिंदगी बच सकती थी।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ 2012 में देश में रेप के 24,923 केस रजिस्टर्ड हुए थे। 2013 में ये संख्या बढ़कर 33,707 हो गई और 2014 में बलात्कार के मामलों की संख्या 35,000 से ज़्यादा हो गई। दिन-ब-दिन लड़कियों और महिलाओं के साथ रेप और छेड़खानी की बढ़ती घटनाएं न केवल समाज के लिए चिंताजनक हैं, बल्कि पूरी मानवता को शर्मसार करने वाली हैं। इस मामले में पीड़िता की मां ने कहा कि वह आरोपी के लिए फांसी की मांग करती हैं।

जाहिर तौर पर, ऐसे व्यक्ति का समाज में होना लड़कियों, महिलाओं के लिए खतरनाक ही है, लेकिन हमें ये भी सोचना होगा कि फांसी जैसी कड़ी सजा के बाद भी रेप के मामले कम क्यों नहीं हो रहे हैं!

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