ई-वाहन में क्रांति का बिगुल फूंकने वाली 'हेमलता अन्नामलाई'

कोयंबटूर की रहने वाले हेमलता अन्नामलाई द्वार संचालित कंपनी तैयार कर रही है बिजली से संचालित होने वाली साइकिल और स्कूटरइसके अलावा सामान ढोने के लिये इलेक्ट्रिक ट्राॅली और विकलांगों के लिये विशेष वाहन भी कर रहे हैं तैयारपर्यावरण संरक्षण में योगदान देते हुए वर्तमान में प्रतिदिन तकरीबन 200 वाहन सफलतापूर्वक बेच रहे हैंमहिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कारखाने में 30 प्रतिशत महिला कर्मचारियों को देते हैं नौकरी

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भारत में बढ़ते हुए प्रदूषण के बावजूद सरकार के लाचार और ढुलमुल रवैये और एक उचित पारिस्थितिकी तंत्र की गैरमौजूदगी के चलते इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार उम्मीद के अनुसार अपना स्थान बनाने में असफल ही रहा है और सड़कों पर ऐसे वाहनों की संख्या अभी न के बराबर है। हालांकि जबसे सरकार ने वर्ष 2020 तक प्रतिवर्ष 7 मिलियन इलेक्ट्रिक और हाईब्रिड वाहनों को सड़क पर उतारने की महत्वाकांक्षा दिखाई है निराशा से भरे इस माहौल में आशा की एक किरण जागी है।

एक ऐसे समय में जब यह उद्योग अपनी एक स्वतंत्र पहचान पाने के लिये संघर्षरत है तब भी कुछ चुनिंदा नाम इस क्षेत्र में अपना नाम कमाने और एक सुनहरे भविष्य का निर्माण करने का इरादा लेकर रात-दिन एक करे हुए हैं। भारत में अभी शैशवकाल से गुजर रहे इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योग के क्षेत्र में नए तकनीकी निर्माताओं के रूप में अपने लिये एक मुकाम तलाशने की दिशा में प्रयासरत ऐसा ही एक नाम है Ampere Electric (एम्पीयर इलेक्ट्रिक) का। यह कंपनी ई-साइकिल और ई-स्कूटर के निर्माण के अलावा भार को ढ़ोने के लिये ई-ट्राॅली के निर्माण के अलावा कचरा प्रबंधन और विकलांग व्यक्तियों के लिये विशेष वाहनों को भी तैयार कर उपयोग के लिये बाजार में पेश कर रहा है।

अपने पति के साथ एक सम्मेलन में भाग लेने के लिये जापान की यात्रा के दौरान हेमलता अन्नामलाई के मस्तिष्क में इस कंपनी को शुरू करने का विचार आया। उस सम्मेलन में एक वक्ता ने बहुत ही दृढ़ता के साथ यह तर्क दिया कि अब आईसीई (अंतरिक दहन वाले इंजन) का युग बीते जमाने की बात है और उसने इस बारे में विस्तार से बताया कि कैसे आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य के वाहन होंगे।

हेमलता ने वर्ष 2007 में एम्पीयर इलेक्ट्रिक की स्थापना 50 मिलियन रुपये के प्रारंभिक निवेश के साथ की थी और इस अवधि में यह रकम बाहरी निवेशकों से प्राप्त इक्विटी निवेश में तब्दील हो चुकी है। एक गैर विनिर्माण पृष्ठभूमि से आने की वजह से इसे प्रारंभ करना उनके जीवन की सबसे कठिन चुनौतियों में रहा है।

हेमलता अन्नामलाई
हेमलता अन्नामलाई
हेमलता कहती हैं, ‘‘हमारी सारी टीम अपने काम के प्रति बहुत जुनूनी है जिसकी वजह से हम बहुत ही जल्द इस व्यापार के गुर सीखने में कामयाब रहे। इस दौरान हमने कई गलतियां कीं लेकिन हर गलती ने हमारी नींव को और अधिक मजबूती देने का काम किया और आज हम सि मुकाम पर भी हैं वहां पर हम उन चुनौतियों की वजह से हैं जिनका हमने अबतक सामना किया है। इसके अलावा हमें बेहतरीन प्रतिभाओं को पने साथ जोड़ने और एक टीम का निर्माण करने में भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।’’

हेमलता ने मात्र 27 वर्ष की उम्र में व्यवसाय की दुनिया में अपना पहल कदम रखा था। प्रारंभिक दौर में उन्होंने पेशेवर सेवाओं, तकनीकी प्रशिक्षण, टूर और टिकटिंग के अलावा प्रतिभा तलाशने के लिये एक अंतर्राष्ट्रीय परामर्श सेवा केंद्र से जुड़े उद्यमों की नींव रखी। एक सीरियल उद्यमी के रूप में हेमलता ने अपने जीवन के 15 वर्ष विभिन्न उद्यमों को तैयार करने और उनका संचालन करने में व्यतीत किये हैं। उनका कहना है कि उद्यमिता के क्षेत्र में हर नया दिन अपने साथ नई चुनौतियां और विजय लेकर आता है लेकिन मिलने वाला अनुभव अनमोल होता है।

हाल ही में मशहूर उद्यमी रतन टाटा ने बैगलोर में स्थित इस इलेक्ट्रिक वाहन के स्टार्टअप में एक गुप्त राशि का निवेश किया है। हेमलता कहती हैं, ‘‘हम अबतक ई-साइकिल और ई-स्कूटर के लिये उपयुक्त 36वोल्ट और 48वोल्ट के चार्जरों का सफलतापूर्वक निर्माण कर रहे हैं। इस तरह से हम रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के अलावा इलेक्ट्रिकल वाहनों के क्षेत्र में सक्रिय भारतीय कारोबारियों के बीच एम्पीसर को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित कर सकेंगे।’’

बी2सी के क्षेत्र में एम्पीयर के प्राथमिक उत्पाद इलेक्ट्रिक साइकिल और इलेक्ट्रिक स्कूटर हैं। इसके अलावा बी2बी की दुनिया में यह स्टार्टअप कोरियर ब्याॅयज़ और घरों तक सामान पहुंचाने वालों के लिये ई-स्कूटरों को निर्माण कर रही है।

ई-साइकिल पर हेमलता
ई-साइकिल पर हेमलता

अनुसंधान और विकास प्रारंभ से ही एम्पीयर की रीढ़ रहा है और एम्पीयर का दावा है कि यह स्टार्टअप भारत में ई-वाहनों के लिये स्वयं के 36वोल्ट और 48वोल्ट के चार्जरों का निर्माण करने वाली पहली कंपनी है।

हेमलता कहती हैं, ‘‘चार्जर हमेशा से ही भारत के लिये सबसे बड़ी समस्या रहे हैं क्योंकि क्योंकि विदेशों से आयात होने वाले चार्जर भारतीय सड़कों की स्थितियों और अनियमित बिजली की आपूर्ति का सामना करने के लिये बिल्कुल अनुप्युक्त रहते हैं।’’

आज एम्पीयर इलेक्ट्रिक द्वारा तैयार किये गए सभी वाहन इनकी आरएंडडी टीम द्वारा तैयार की गई मोटरों और नियंत्रकों पर संचालित हो रहे हैं। इसके अलवा इनकी टीम ने बैटरियों के जीवन को बढ़ाने में उपयोगी एक चिप का भी निर्माण किया है।

हेमलता आगे बताती हैं, ‘‘हम अपना अधिकतर कच्चा माल भारतभर में फैले स्थानीय बाजारों से खरीदते हैं। लेकिन चूंकि बैटरी के निर्माण में काम आने वाले लीड और चुंबक जैसे घटक भारत में प्राप्त नहीं होते हैं इसलिये इन्हें चीन से आयात करना पड़ता है। हम आयात की इस निर्भरता के अन्य विकल्प तलाशा रहे हैं। वर्तमान में हमारी क्षमता प्रतिवर्ष करीब 30 हजार वाहनों का उत्पादन करने की है।’’

ऐसे समय में जब सरकार पूरी तरह से देश में बने उत्पादों को तैयार करते हुए स्थानीय बाजार की स्थितियों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने पर जोर दे रही है तब इस क्षेत्र में व्यापार के अवसर कई गुना अधिक बढ़ जाते हैं।

ई-स्कूटर पर हेमलता
ई-स्कूटर पर हेमलता
हेमलता कहती हैं, ‘‘एक तरह से हमने अपने छोटे से प्रयास से पूरी तरह से देश में ही निर्मित वाहनों को तैयार करके इस उद्योग के भविष्य की दिशा तय करने में अपना योगदान दिया है।’’ सरकार ने भी बीते कुछ समय से लोगों को इन इलेक्ट्रिन वाहनों के प्रयोग के प्रति प्रेरित और प्रोत्साहित करने में बहुत अधिक रुचि दिखाई है और अब आवश्यकता है कि लोग भी आगे आएं और इन वाहनों के इस्तेमाल के प्रति जागरुक होें।

इस स्टार्टअप का दावा है कि यह तमिलनाडु और केरल में विकलांगों के लिये इलेक्ट्रिक वाहन तैयार करने वाली पहली कंपनी है। इसके अलावा एम्पीयर ने कताई और कपड़ा मिलों में काम करने वाले मजदूरों के लिये ‘त्रिशूल’ नाम का एक विशेष वाहन तैयार किया है। इन मजदूरों में मुख्यतः 20 से 40 आयुवर्ग की महिलाएं आती है जिन्हें प्रतिदिन अपना काम करने क लिये कारखाने के भीतर ही 12 से 15 किलोमीटी पैदल चलना पड़ता था।

हेमलता कहती हैं, ‘‘स्थापना के बाद से ही एम्पायर ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां तक कि हमारे कारखानों में 30 प्रतिशत महिला कर्मचारी कार्यरत हैं और जल्द ही हम इस संख्या को दोगुना करने में सफल होंगे।’’

इनका मूल्य निर्धारण मुख्यतः बाजार की स्थितियों और इस बात को गौर में रखकर किया गया है कि अधिक से अधिक लोग इन ई-वाहनों के इस्तेमाल के प्रति जागरुक हों। इनकी ई-साइकिल की कीमत 20 हजार से 30 हजर रुपयों के बीच की है और ई-स्कूटर 20 हजार रुपये से 45 हजार रुपये के बीच की कीमत में उपलब्ध है।

हेमलता कहती हैं, ‘‘हमें उम्मीद है कि हम सरकार को उसके लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हमारा इरादा आवश्यक 7 मिलियन वाहनों में से 15 से 20 प्रतिशत के बीच को तैयार करके वितरित करने का है। हम लोगों को कम दूरी की यात्रा करने के लिये ई-बाइकों के उपयोग के लिये प्रोत्साहित करते हैं और सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में सहयोग देते हुए पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में अपना योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं।’’

फिलहाल एम्पीयर इलेक्ट्रिक प्रतिमाह करीब 200 वाहन बेच रहा है। वर्ष 2010-12 के दौरान जब सरकार ने इन्हें अंतरित छूट दी थी तब यह आंकड़ा बढ़कर 687 तक पहुंच गया था।

इनका इरादा आने वाले 3 वर्षों में अपना विस्तार देश के 10 अन्य राज्यों में करने का है। इसके अलावा यह कंपनी इस वर्ष के अंत तक दो नय माॅडल भी बाजार में उतारने की तैयारियों में है। साथ ही अपने वाले तीन वर्षों में ये एक ऐसे कारखाने का निर्माण करना चाहते हैं जिसका संचालन पूरी तरह से महिलाओं के हाथों में हो।

अंत में हेमलता कहती हैं, ‘‘हमारी सरकार को सिर्फ ‘मेक इन इंडिया’ के बारे में बात करने के अलावा लघु उद्योग निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही चुनिंदा इकाइयों की पहवान करके यह दिखाना भी चाहिये कि इसे किस प्रकार से अमली जामा पहनाया जा सकता है। हालांकि यह इतना आसान नहीं है जेकिन ‘जहां चाह वहां राह।’’

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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