'ओला कैब्स' का रेवेन्यू हुआ दोगुना, लेकिन घाटा बढ़कर हुआ 4,898 करोड़ रुपये

0

 ओला की ऑडिट रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2017 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 500 करोड़ से बढ़कर 1,178 करोड़ हो गया है, लेकिन उसे 4,898 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड घाटा भी हुआ है जो कि कुल रेवेन्यू से 4 गुना ज्यादा है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
 इस घाटे की सबसे बड़ी वजह ओला को अमेरिकी कैब एग्रीगेटर कंपनी उबर से सीधी टक्कर मिलना है। उबर की वजह से ओला को सस्ती राइड ऑफर करनी पड़ रही हैं। मार्केट में बने रहने के लिए सस्ती राइड प्रोवाइड कराना ओला की मजबूरी है।

देश की घरेलू कैब एग्रीगेटर कंपनी ओला का रेवेन्यू वित्तीय वर्ष 2017 में दोगुना हो गया है, लेकिन कंपनी घाटे से नहीं उबर पा रही है। ओला की ऑडिट रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2017 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में कंपनी का रेवेन्यू 500 करोड़ से बढ़कर 1,178 करोड़ हो गया है, लेकिन उसे 4,898 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड घाटा भी हुआ है जो कि कुल रेवेन्यू से 4 गुना ज्यादा है। रेवेन्यू में जहां दोगुनी बढ़ोत्तरी हुई है वहीं घाटा 3,150 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 5 हजार करोड़ हो गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस घाटे की सबसे बड़ी वजह ओला को अमेरिकी कैब एग्रीगेटर कंपनी उबर से सीधी टक्कर मिलना है। उबर की वजह से ओला को सस्ती राइड ऑफर करनी पड़ रही हैं। मार्केट में बने रहने के लिए सस्ती राइड प्रोवाइड कराना ओला की मजबूरी है। हालांकि ओला के लिए चिंता की बात ये है कि उसके ऑडिटर्स का अनुमान गलत निकला। ऑडिटर्स की उम्मीद थी कि ओला का घाटा 3,000 करोड़ रुपये के आसपास होगा, लेकिन यह अनुमान पूरी तरह से गलत साबित हुआ।

उन्हीं ऑडिटर्स ने भविष्यवाणी की थी कि 2021 तक ओला घाटे से बाहर निकलते हुए 6000 करोड़ के फायदे में आ जाएगी। लेकिन घाटे में लंबी उछाल के बाद अब इन उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। ओला का संचालन करने वाली कंपनी एएनआई टेक्नॉलजीज का इकलौता बिजनेस खतरे में नजर आ रहा है। हालांकि इस स्टार्ट अप को कभी फंड जुटाने में कोई समस्या नहीं आई। कंपनी ने 2 बिलियन डॉलर की फंडिग जुटाई है और इसका टोटल वैल्युएशन 4 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुका है।

देश में घाटे में चल रही बेंगलुरु बेस्ड कंपनी ओला ने दूसरे देशों में भी बिजनेस स्टार्ट करर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, मेलबॉर्न और पर्थ जैसे शहरों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। ओला में सॉफ्टबैंक और टेंसेंट होल्डिंग जैसे इन्वेस्टर्स ने पैसा लगाया है। हालिया रिपोर्ट्स की मानें तो ओला फिर से 1 बिलियन डॉलर फंडिंग जुटाने का प्रयास कर रही है।

यह भी पढ़ें: गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए हर हफ्ते गुड़गांव से उत्तराखंड का सफर करते हैं आशीष

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...