हार्डवेयर जीनियस जिसका सपना है ओपन हार्डवेयर स्कूल खोलने का


ओपन हार्डवेयर की बढ़ रही है डिमांड

पश्चिम देशों में छाया ओपन हार्डवेयर का खुमार

देश में ओपन हार्डवेयर की काफी संभावनाएं

0

अक्सर किसी भी काम को करने में आपकी पृष्ठभूमि और आपका शौक काफी मायने रखता है और अगर ये किसी में है तो उसे इन चीजों से जुड़ा कोई भी काम आसान लगने लगता है। अनूल माहीधरिया का शौक भी हार्डवेयर को लेकर रहा और आज वो इस काम में रमें हुए हैं। 49 साल के अनूल का परिवार मुंबई में रहता है। उनके माता पिता ने ल्यूमिट्रॉनिक्स कंपनी की स्थापना 1978 में की थी। ये कंपनी अंतरराष्ट्रीय मापदंड़ों के मुताबिक उत्पादों को नापने के लिए विभिन्न उपकरणों का निर्माण करती है। अनूल पिछले तीन दशकों से कंपनी में हार्डवेयर का काम देखते हैं और वो अपने इस शौक को पूरा करने में लगे रहते हैं।

अनूल बचपन से ही अपने घर में हार्डवेयर के समान को जोड़ने के काम में बड़ी रूचि लेते थे। वो अपने पिता से खासे प्रभावित थे जो कभी कॉलेज तक नहीं गए थे लेकिन अपना काम शुरू करने से पहले वो किसी भी हार्डवेयर को जोड़ने और एक शौकिया रेडियो ऑपरेटर रह चुके थे। अनूल को भी यही चीज विरासत में मिली थी। तभी तो वो अपने पिता के साथ उनके एलएमएल वेस्पा स्कूटर के इंजन को ना सिर्फ खोल देते थे बल्कि दोबारा जोड़ भी देते थे। इतना ही नहीं वो अपने पिता के साथ हार्डवेयर से जुड़ी मुश्किल से मुश्किल चीज में भी बराबर का साथ देते। अनूल की यही आदत उनको हार्डवेयर की दुनिया में लेती गई और धीरे धीरे उन्होने हार्डवेयर को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया। कॉलेज तक पहुंचते पहुंचते वो हार्डवेयर के बारे में इतना कुछ जान गए थे कि टीचर जो पढ़ाता था वो उनको पहले से मालूम रहता था।

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनूल नहीं चाहते थे कि वो फिलहाल अपने परिवार का कारोबार देखें। वो हार्डवेयर से जुड़ी कई और बातों को जानना चाहते थे इसके लिए वो साल 1986 में बैंगलौर चले गए। उस वक्त वहां पर इलेक्ट्रॉनिक्स अपनी ऊंचाइयों पर था यहां पहुंच कर उन्होने पहली नौकरी शिल्पा इंटरनेशनल में सेल्स में की। ये कंपनी जर्मनी सेमिकन्डक्टर की मार्केटिंग करती थी। दो साल नौकरी करने के बाद अनूल ने जान लिया था कि सेल्स की नौकरी उनके लिए नहीं बनी है। बावजूद मुंबई लौटने से पहले वो दो साल और बेंगलौर में रहे। इस दौरान उन्होने फ्रेंच कंपनी आईएजेई कंपनी के लिए काम किया जो इंकजेट प्रिंटर बनाती थी। इन दोनों नौकरियों से अनूल को अनुभव और नये विचार मिले।

अनूल की साल 1990 में शादी हो गई और वो अपने परिवार के साथ आकर मुंबई में बस गए। यहां वो अपने पारिवारिक कारोबार ल्यूमिट्रॉनिक्स के लिए काम करने लगे। उस वक्त दुनिया में ऐसी चंद ही कंपनियां थीं जो उत्पाद ल्यूमिट्रॉनिक्स बनाती थी। ये कंपनी ऐसे उपकरणों की टेस्टिंग उपकरण बनाती थी जो सुरक्षा के लिहाज से बहुत जरूरी थे। जिन उत्पादों की टेस्टिंग के लिए ल्यूमिट्रॉनिक्स उपकरण बनाती थी उनमें गीजर, मिक्सर और ग्राइंडर के साथ कई दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी शामिल थे।

साल 2010 में अनूल ने ओपन हार्डवेयर को शौक के तौर पर अपने साथ जोड़ा। इस दौरान उन्होने साइकिल ब्रेक पर कई तजुर्बे किये। जिनकी काफी चर्चा भी हुई और उनको मुनाफा भी हुया। ओपन हार्डवेयर की बदौलत साल 2012 उनकी कंपनी का टर्नओवर 1 लाख डॉलर से ज्यादा का हो गया था। इसके बाद इन लोगों ने अपनी टीम के लिए कई तरह के उपकरण खरीदे जैसे थ्रीडी प्रिंटर, सीएनसी मशीन और लेजर कटर इत्यादी। इस क्षेत्र में मिली सफलता की वजह से ये पिछले तीन सालों से लगातार ओपन हार्डवेयर सम्मिट का आयोजन कर रहे हैं। पिछले साल अनूल ने वॉशिंगटन में सर्किट बोर्ड डिजाइन पर एक ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया। इसके बाद कई लोगों को ओपन हार्डवेयर डिजाइन का काम शुरू करने में मदद मिली। जिसके बाद उनकी कोशिश अब भारत में ऐसा ही कुछ करने की है।

अनूल मानते हैं कि भारत में हार्डवेयर के क्षेत्र में ज्यादा काम करने की जरूरत है इसके लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट पर काम किया जाए। अमेरिका और यूरोप इस बात को मान चुके हैं कि इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं लेकिन भारत में लोग इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि ये वाणिज्यिक रूप से सफल नहीं होगा। अनूल इन बातों को गलत बताते हुए कहते हैं कि थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक इस बात का बड़ा उदाहरण है शुरूआत में भले ही इसका बाजार काफी ढीला था लेकिन आज ये फायदे का सौदा हो गया है। इतना ही नहीं ओपन सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर किसी भी संस्थान के लिए फायदेमंद है।

अनूल के मुताबिक भारतीय प्रगतिशील होते हैं तभी तो वो कम संसाधनों में भी काम चला लेते हैं। इसलिए हम भी एमआईटी मीडिया लैब्स, फैब लैब्स, जयसो लैब्स इत्यादी की तरह अपने संसाधनों को बचाकर आने वाले वक्त में बढ़िया तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने भी ओपन हार्डवेयर ईकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए कुछ घोषणाएं की हैं। अनूल के मुताबिक बच्चों में ओपन हार्डवेयर को लेकर रूची जगाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि उन्होने कई बार 12-13 साल के बच्चों को कई बार कमाल की चीजें बनाते हुए देखा है। इसलिए स्कूलों को भी चाहिए कि वो अपने पाठ्यक्रम में ओपन हार्डवेयर को भी शामिल करें। अनूल का दावा है कि कई ऐसी चीजें हैं जिनको काफी कम दाम में बनाकर बच्चों के इस्तेमाल लायक बनाया जा सकता है। जहां पर बच्चे ना सिर्फ तजुर्बे कर सकते हैं बल्कि वो ओपन हार्डवेयर की ताकत को भी जान सकते हैं। अनूल को विश्वास है कि वो एक दिन ओपन हार्डवेयर पर स्कूल खोलेंगे, ताकि देश में ओपन हार्डवेयर के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सके।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...