मेहनत ने बनाया 'सन-बाजार' को 'समर्थ' और दिलाया 'गौरव'

सन-बाजार की ऑनलाइन में भी मौजूदगीनवंबर, 2013 से शुरू किया कारोबारकंपनी का टर्नओवर करोड़ों तक पहुंचा

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वक्त किसी का इंतजार नहीं करता, वो तो बस आगे बढ़ता रहता है जरूरत होती है सही वक्त को पहचानने की। एमबीए करने वाले दो छात्र समर्थ वाधवा और कुमार गौरव ने वक्त रहते तय कर लिया था कि उनको किस ओर जाना है। देश में बढ़ती ऊर्जा की खपत को देखते हुए इन लोगों ने तय किया वो इस क्षेत्र में अपने कदम रखेंगे। इसके लिए उन्होने शुरू किया सन-बाजार। एमबीए की पढ़ाई के दौरान प्रोफेसर महेश भावे ने इन दोनों के साथ इस क्षेत्र से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की जिसके बाद इन दोनों ने इस क्षेत्र में अपने करियर की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी। आईआईएम कोझिकोड से एमबीए करने वाले इन दोनों ने केस स्टडी के तौर पर फर्स्ट सोलर को चुना। इस साल के दौरान उनमें इसको लेकर काफी बहस हुई। साथ ही देश में ऊर्जा की खपत और सोलर में भविष्य को लेकर ये दोनों रात दिन बातचीत किया करते।

गौरव और समर्थ
गौरव और समर्थ

एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन लोगों ने अपनी योजनाएं विभिन्न कंपनियों को भेजी। इस दौरान इनमें काफी विश्वास पैदा हुआ और धीरे धीरे इनको पहचान भी मिलने लगी। सन-बाजार तक कागजों में ही था और तीन चीजों का हल करने का दावा करता था। ये थीं क्षमता, विश्वसनीयता और सेवा। पारंपरिक तौर पर सोलर बी2बी उद्योग है और इसकी बी2सी मौजूदगी काफी कम है। सन बाजार सोलर उत्पाद को लेकर लोगों की सोच में बदलाव लाने का बढ़िया जरिया था ताकि इसे आम लोग भी खरीद सकें। इस कारण इन लोगों ने बी2बी उद्योग को बी2सी में बदलने के लिए ऑनलाइन तरीके खोजने शुरू कर दिये। जो कि आसान, सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका है।

ये लोग सोलर एनर्जी के बाजार में भी बदलाव लाना चाहते थे। इसके लिए ये सोलर एनर्जी के इस बी2बी उद्योग को अलग जगह पर ले जाने की कोशिश करने लगे। ताकि इस क्षेत्र का बेहतर और सुरक्षित इस्तेमाल किया जा सके। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए इन लोगों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग, आरएफक्यू का प्रबंधन और मार्केटिंग से जुड़ी पूछताछ, विश्लेषण संबंधी सुविधाओं को एक प्लेफॉर्म देने की कोशिश की ताकि खरीददार और विक्रेता के बीच की दूरी को कम किया जा सके। इसके लिए इन लोगों ने कुछ पैमाने तय किये जैसे ऑनलाइन ई-कामर्स स्टोर, ऑनलाइन सोलर बाजार जहां पर विभिन्न सौर मॉड्यूल निर्माता, सिस्टम इंटीग्रेटर्स और अक्षय सलाहकार सहित दूसरे लोग मौजूद हों। साथ ही ऑनलाइन शिक्षण मॉड्यूल की शुरूआत की जहां पर इस क्षेत्र से जुड़े डिग्री और सार्टिफिकेट कोर्स कराये जाते हैं। इसके अलावा इन लोगों ने सौर विद्युत उत्पादन परियोजनाओं की तकनीकी तौर पर सलाह देने का काम भी शुरू किया। इसके लिए भले ही कोई अपने घर, दफ्तर या अपने संस्थान में इसको लगाना चाहता है तो ये उसकी मदद करते।

इन लोगों का मानना है कि शिक्षित कर और ग्राहकों को जागरूक बनाने से इस क्षेत्र का लाभ उठाया जा सकता है। इस दौरान सौरव और गौरव के इस काम में कई लोगों ने अपनी रूची दिखाई लेकिन पैसा लगाने को कोई तैयार नहीं हुआ। इसकी मुख्य वजह थी कि इस क्षेत्र में लाभ तुरंत नहीं मिलता। जबकि सोलर के क्षेत्र के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत होती है। खास तौर से पॉवर प्लांट के लिए निवेश बड़ा चाहिए होता है, लेकिन लंबे वक्त में इसका काफी फायदा है।

इनके मुताबिक पढ़े लिखे और जिनके पास इस क्षेत्र की जानकारी है ऐसे लोगों को हरे भरे पर्यावरण के लिए किये जा रहे प्रयासों को समझना चाहिए। छोटा सा सौर उत्पाद फिर चाहे वो सोलर लालटेन हो, गेट लाइट हो या बगीचे की लाइट हो ये ज्यादा महंगी नहीं होती लेकिन इसका काफी अच्छा असर होता है आपकी सेहत और पर्यावरण पर। आज के दिन में बाजार में इन उत्पादों के अलावा कई दूसरे उत्पाद भी हैं जैसे सौर बैग और सौर चार्जर। ये ऐसे उत्पाद हैं जिनसे उम्मीद है कि इससे सौर उत्पादों की स्वीकार्यता बढ़ेगी। इन लोगों ने अपने काम की शुरूआत नवंबर,2013 से शुरू की थी। तब से इन्होने 8 अंकों का टर्नओवर हासिल कर लिया है। ऑनलाइन ई-कॉमर्स भले ही शुरूआत में धीमा हो लेकिन आय में इसका 10 प्रतिशत तक हिस्सा है। जबकि आज भी ज्यादा मांग ऑफलाइन ही है और ये लोग इस लेनदेन को भी ऑनलाइन देखना चाहते हैं।

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