प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाने वाले किसानों की बड़ी संख्या

22 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने इस योजना को शुरू किया

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हाल में शुरु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तीव्र विस्तार के संकेत हैं और इसके तहत इस बार खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि पिछले साल की तुलना में 70 प्रतिशत बढ़कर 1.18 लाख करोड़ रपए तक पहुंच गयी है। खरीफ सत्र 2015 में फसल बीमा बीमा योजना के तहत 69,360 करोड़ रपये का बीमा कराया गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2016-17 के खरीफ सत्र में अब तक 3.15 करोड़ किसानों ने पीएमएफबीवाई का लाभ उठाया । पिछले वर्ष के इस दौरान यह संख्या 3.09 करोड़ थी।

कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव आशीष भूटानी ने पीटीआई को बताया, है कि खरीफ 2016 में अभी तक 3.15 करोड़ किसानों ने यह पॉलिसी ली है। इस बारे में बैंकों से अंतिम आंकड़े प्राप्त नहीं हुए है। पर उल्लेखनीय यह है कि बीमा की गई राशि की मात्रा 71 प्रतिशत बढ़कर 1,18,426 करोड़ रपये हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले फसलों के लिए कम बीमा कराई जाती थी लेकिन अब परिदृश्य बदल रहा है। अधिक से अधिक किसान नयी फसल बीमा योजना का लाभ ले रहे हैं जिसके तहत प्रीमियम को कम रखा जा रहा है और किसानों को बीमित पूरी राशि के लिए दावे का भुगतान होगा।

भूटानी ने कहा कि विभिन्न राज्यों द्वारा योजना की अधिसूचना को जारी करने में देर के बावजूद खरीफ सत्र 2016 में पीएमएफबीवाई को लागू करने में बेहतर प्रगति हासिल हुई है। करीब 22 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने इस योजना को शुरू किया है। पीएमएफबीवाई के तहत खाद्यान्नों और तिलहन फसलों के लिए किसानों के प्रीमियम राशि को कम यानी डेढ़ से दो प्रतिशत के बीच रखा गया है तथा बागवानी और कपास फसलों के लिए यह राशि पांच प्रतिशत तक है। प्रीमियम पर कोई सीमा निर्धारित नहीं है और संभावित दावे का 25 प्रतिशत सीधा किसानों के खाते में भेजा जायेगा।

भूटानी ने कहा, कि आगामी रबी सत्र में दायरे में लिए गये किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि हर स्तर पर आरंभिक हिचक को संबोधित किया गया है। बैंक भी इस योजना को आक्रामक ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं। पीएमएफबीवाई के तहत बीमा किये गये खरीफ फसलों की संख्या राज्य दर राज्य अलग-अलग हैं। बिहार में केवल धान और मक्का को बीमा कवच के दायरे में लिया गया है जबकि कुछ राज्यों में करीब 40 फसलों को बीमा कवच के दायरे में लिया गया है। राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस) और संशोधित एनएआईएस जैसी दो मौजूदा योजनाओं के स्थान पर पीएमएफबीवाई योजना को लाया गया है क्योंकि पहले की योजनाओं में कुछ अंतर्निहित खामियां थीं।

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