मस्ती की पाठशाला 'EduisFun'

अब खेल-खेल में होगी पढ़ाई

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पवई स्थित वेंचर एडुइजफन का मकसद पढ़ाई को गेम के जरिए मस्ती, आसान और सभी की पहुंच तक लाना है। दो पूर्व आईआईटियन, प्रवीन त्यागी (पूर्व आईआईटीडी) और जतीन सोलंकी (पूर्व आईआईटीबी) द्वारा स्थापित एडुइजफन एक अनुकूलनीय प्लेटफॉर्म है, जहां गेम के जरिए पढ़ाई की व्यवस्था की जाती है और व्यक्तिगत प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए विश्लेषण का सहारा लिया जाता है।

सह-संस्थापको में से एक जतीन सोलंकी (पूर्व आईआईटीबी) का कहना है, “आज की तकनीकी की जानकारी रखने वाली पीढ़ी बहुत जल्दी किसी चीज को अपना लेती है। आज के बच्चे भले ही उन सब्जियों के नाम नहीं जानते हों जो वो खाते हैं, लेकिन वो एंग्री बर्ड और द कैंडी क्रश सागा के बारे में अच्छी तरह से परिचित हैं। वो भले ही अपनी जेब में रूमाल न रखते हों लेकिन उनकी जेब में पांच इंच वाला क्वा-कोर 13 मेकापिक्सल वाला एंड्रॉयड फोन जरूर होगा जिसमें सारे नए एप्स और गेम्स होंगे। और बात जब पढ़ाई और शिक्षा की आती है तो कक्षाएं व किताबों के साथ-साथ पढ़ाने का मौजूदा तरीका सब, इच्छा के स्तर को बनाए रखने में नाकाम हैं।”

इसी चौड़ी खाई को भरने के लिए एडुइजफन ने पढ़ाई का बिलकुल ही एक नया तरीका अख्तियार करने की सोची है। जतीन मानते हैं कि शिक्षा पद्धति में बड़े बदलाव की जरूरत है, ये बदलाव पढ़ाई की किताबों के साथ-साथ पढ़ाने के तरीके करने की जरूरत है। इसी को देखते हुए इनकी टीम ने कुछ नया करने का सोचा- और वो है गेम्स के जरिए पढ़ाई। इस तरह एडुइजफन की शुरुआत हुई।

विभिन्न बातों को ध्यान में रखते हुए एजुइजफन ने पढ़ाने के तरीके में कुछ बदलाव करने की अपील की है:

• पढ़ते हुए पढ़ाई के मौजूदा तरीके के बजाए सवालों का हल करते हुए पढ़ाई करना

• इस सोच के साथ पढ़ाना कि विफलता पढ़ने और सफलता से बस एक कदम पीछे है

• बेहतर वैचारिक स्पष्टता के लिए अतिरिक्त ध्यान देना

• फोन-इन-ए-रो अवधारणा को अपनाकर सौ फीसदी ज्ञान की समझ को सुनिश्चित करना

एडुइजफन 33 फीसदी से ज्यादा मार्क्स लाने वाले छात्रों को प्रमोशन देने के मौजूदा पढ़ाई के तरीके को उन्नत करना चाहती है। टीम किसी भी बच्चे में ज्ञान को पहुंचाने में कोई कोताही करना नहीं चाहती है, इसके साथ ही टीम ये भी मानती है कि अगर किसी बच्चे के लिए पास करने की सीमा 33 फीसदी अंक होंगे, तो वह 67 फीसदी को उससे दूर रखने की कोशिश है। इससे बच्चे कमजोर बनेंगे, जब तक कि बच्चों में सौ फीसदी अंक हासिल करने की ललक पैदा नहीं की जाएगी, बच्चे कमजोर ही रहेंगे।

एडुइजफन टीम और इसके शुरुआती दिन

जतीन सोलंकी एक सीरियल उद्यमी हैं। एडुइजफन से पहले वह ई-कॉमर्स और पढ़ाई के क्षेत्र में काम कर चुके हैं। प्रवीण त्यागी ने पिछले 15 महीनों के दौरान टीम को एनसीईआरटी की आठवीं से दसवीं कक्षा के लिए एजुकेशनल गेम्स विकसित करने में प्रेरित किया है। डेवलपर्स, डिजाइनर्स, एनिमेटर्स और टेस्टर्स की मजबूत टीम ने पढ़ाई के एक खास तरीके का इजाद किया है।

एडुइजफन के सह-संस्थापक
एडुइजफन के सह-संस्थापक

एजुकेशन फर्म आईआईटियंस पेस ने एडुइजफन के साथ रणनीतिक साझेदारी की ओर इसमें शुरुआती निवेश किया। इसके साथ ही आईआईटियंस पेस के प्रशिक्षित टीचर्स ने इसके लिए बेहतर कंटेंट की भी व्यवस्था की।

एडुइजफन अगले दो महीने के दौरान कई सारे गेम लॉन्च करने जा रही है, इनमें से एक है सिंगल प्लेयर गम जिसका नाम है नॉलेज कॉम्बैट, यह कई स्तरों में विभाजित है, इसमें ज्ञान के लैंप एकत्रित कर पशु सभ्यता से मानव सभ्यता को सुरक्षित करने का अभियान शामिल है। जो इसमें विजयी होगा उसे सुपर ब्रिटैनिक्स के तहत तोहफे और स्कॉलरशिप्स मिलेंगे।

सर्वश्रेष्ठ तकनीक वाले एक से ज्यादा खिलाड़ियों वाले गेम्स भी विकसित किए जा रहे हैं। जतीन बताते हैं, “प्रतियोगिता की भावना का ध्यान रखना काफी महत्वपूर्ण है।” “इसलिए हम एक ऐसा गेम भी बनाने वाले हैं जो ये भी कर सके।”

ये गेम्स संपूर्ण हैं। इनमें परफॉर्मेंस मीटर लगे हैं जो किसी छात्र के प्रदर्शन को नियमित समय पर विश्लेशन करते रहते हैं। इसके साथ इसमें वॉयस-गाइडेड स्लाइड्स और वीडियो जुड़े हैं, जिससे कि छात्र अपनी जरूरत के समय इसे संपूर्ण रूप से देख सके। एडुइजफन की ओर से विकसित इन एप्प आधारित गेम्स को लेकर अब तक अच्छा रेस्पॉन्स मिला है। जतीन बताते हैं, “प्रत्येक छात्रों में स्पष्ट तौर पर कुछ समझने के प्रदर्शन में 500 फीसदी उन्नति दर्ज की गई है। इसके साथ ही 90 फीसदी से ज्यादा छात्रों ने इंट्रेस्ट लेवल, कंसेप्ट क्लैरिटी और नॉलेज रिटेंशन के आधार पर पांच अंकों में से पांच अंक दिया।”

एडुकेशन तेजी से विकास करने वाला क्षेत् है और इंटरनेट के फैलाव और डिजिटलाइजेशन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इसमें और विकास होना तय है। आज की तकनीकी-समझ रखने वाली पीढ़ी इस तरह के बदलाव को आसानी और तेजी से अपना लेती है, इसलिए ये जरूरी है कि पीढ़ी में बदलाव को देखते हुए पढ़ाई के तरीकों में भी बदलाव करना चाहिए। भविष्य में एडुइजफन उन स्टार्टअप्स में से एक है जो इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करने वाला है।