बैकबेंचर्स की बल्ले-बल्ले

स्टडी नोट्स शेयर करना हुआ आसान

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कॉलेज के उन अच्छे दिनों में क्लासमेट्स से बेस्ट नोट पाने में अच्छा खासा समय बर्बाद हो जाता था। बेचारे टॉपर के पीछे हर कोई लगा रहता था और एग्जाम के समय वो अचानक आकर्षण का केंद्र बन जाता था। अक्सर रिविजन के टाइम इम्पॉर्टेंट नोट्स खो जाया करते थे। और हम ये कैसे भूल सकते हैं कि किस तरह एग्जाम से पहले वाली रात को फोटोकॉपी मशीनों के बाहर लंबी लाइनें लगी रहती थी।

नोट्स शेयर करने का चलन काफी पुराना है। हर कैंपस की पेपरनोट्स के बारे में अपनी कहानियां हैं। आज टेक्नोलॉजी का जमाना है और टेक्नोलॉजी जिंदगी को सुविधाजनक बना रही है। ऐसे में अगर हमारे मोबाइल में ही ये सारे नोट्स मिल जाए तो? सोचिए, बैकबेंचर्स जो पैसा फोटोकॉपी कराने में खर्च करते हैं और जितना पेपर बर्बाद करते हैं, वो पैसा अगर टॉपर के जेब में जाए तो कैसा होगा? आखिर टॉपर इन नोट्स को बनाने में कड़ी मेहनत जो करता है। जरा सोचिए अगर नोट्स शेयरिंग सिर्फ आपके अपने कॉलेज तक ही सीमित ना हो? अगर हम आइआइटी, आइआइएम, एमआइटी, स्टेनफोर्ड और हॉर्वर्ड के स्टूडेंट्स से ज्ञान प्राप्त कर सकें तब कैसा रहेगा?

Notesgen एक ऐसा ही प्लेटफॉर्म हैं जहां स्टूडेंट्स, टीचर्स और प्रोफेशनल्स नोट्स शेयर कर सकते हैं। वेबसाइट और मोबाइल ऐप (एप्पल और एंड्रायड) पर उपलब्ध नोट्सजेन स्टूडेंट्स, एजुकेटर्स, प्रोफेशनल्स और यहां तक कि संस्थानों को भी अपने हाथ से लिखे या टाइप किए गए नोट्स, प्रजेंटेशंस, केस स्टडीज, ब्लॉग्स, रिसर्च मैटेरियल्स आदि को दुनिया भर में शेयर करने और बेचने का मौका देता है। फिलहाल नोट्सजेन पर इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस, लॉ, आर्ट्स, मैनेजमेंट, आइएएस, सीए/सीएस जैसे 14 कैटेगरिज के नोट्स शेयर करने का ऑप्शन मौजूद है।

नोट्सजेन का मोबाइल ऐप एप्पल और एंड्रायड प्लेटफॉर्म्स पर 30 जून 2015 से फ्री में उपलब्ध है और जल्द ही इसे विंडोज, ब्लैकबेरी और टैबलेट्स के लिए लॉन्च किया जाएगा। नोट्स खरीदने वाले अपने जरूरत के टॉपिक से जुड़े नोट्स को ऐप या वेबसाइट पर सर्च कर सकते हैं और प्रत्येक कंटेंट के तीन पेज का प्रिव्यू कर सकते हैं। खरीदार को अगर कोई नोट बेहद पसंद आया या उपयोगी लगा तो वो उसके लिए सेलर को पे करके कंटेंट को अपने फोन या कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकता है। बाद में ये ऑफलाइन भी देखे जा सकेंगे।

नोट्स और कंटेंट बेहद किफायती दामों में उपलब्ध हैं। इसके लिए सेलर आम तौर पर 50 से 250 रुपये लेते हैं। यूजर को NCash का फायदा मिलता है जो एक डिजिटल करेंसी सिस्टम है। आप जब-जब नोट्सजेन पर रजिस्टर करते हैं, अपने नोट्स जोड़ते हैं या उन्हें खरीदते हैं तो आपको हर बार एनकैश मिलता है। नोट्सजेन नोट्स या कंटेट तैयार करने वाले को अपने मनमाफिक तरीके से उन्हें शेयर या बेचने की ताकत देता है। नोट्स तैयार करने वाले भी ज्यादातर छात्र होते हैं इसलिए खरीदार और विक्रेता दोनों एक दूसरे की जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। प्रोवाइजर भी सेलर्स के नोट के लिए मनमर्जी से कीमतें नहीं लेता जबकि ये कंटेंट आसानी से और किफायती दामों में उपलब्ध है।

इस वेंचर के पीछे मानक का दिमाग है जिन्होंने अकेल अपने दम पर नोट्सजेन को शुरू किया। बाद में उनके कुछ पुराने मित्र भी साथ जुड़े। मानक ने अपनी रूचि के हिसाब से काम करने के लिए बहुत सारे टॉप के एमएनसीज के आकर्षक ऑफर्स को ठुकरा दिया। उनकी ये मान्यता है कि जिस दिन से आप ऑउट ऑफ द बॉक्स सोचना शुरू करते हैं दरअसल उसी दिन से आप कुछ सोचने की शुरूआत करते हैं। यहीं उनकी कंपनी और उसके वर्क कल्चर का मूल मंत्र है। वह ये भी बताते हैं कि नोट्सजेन बहुत सारे इनोवेटिव फीचर्स पर काम कर रही है। मानक Carnegie Mellon University के पढ़े लिखे हैं जहां से उन्होंने ई-बिजनेस टेक्नोलॉजी में एमएस किया। नोट्सजेन उनके इंजीनियरिंग के दिनों में शुरू किया गया उनका दूसरा वेंचर है।

मानक के अलावा वेंचर में रोमन खान और अंकुर शर्मा जैसों का मजबूत नेतृत्व है। रोमन खान टेक्नोलॉजी का काम संभालते हैं वहीं अंकुश शर्मा ऑपरेशनल काम देखने के साथ-साथ प्रोडक्ट डेवलपमेंट में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।

जनवरी 2015 में शुरू किये गए नोट्सजेन ऐप के 50 हजार से ज्यादा यूजर्स हैं, इस पर 10 हजार से ज्यादा नोट्स हैं और अब तक इसपर 1000 से ज्यादा खरीदारियां हो चुकी हैं। इस इंडिया-बेस्ड स्टार्टअप ने दुनियाभर के 20 से ज्यादा देशों तक अपनी पहुंच बनाया है। नोट्सजेन को सीएल एजुकेट जैसे एजुकेशन और कंटेंट के दिग्गजों का समर्थन हासिल है जिन्होंने इस स्टार्टअप में इनवेस्ट किया है और इसके कामों की तारीफ की है। इसने इंडस्ट्री के दिग्गजों सत्या (करियर लॉन्चर के सीईओ), अरविंद झा (परीक्षा लैब्स के सीईओ) और राजीव सराफ (लेप्टन सॉफ्टवेयर के सीईओ) से 50 हजार डॉलर का निवेश हासिल किया है।

सत्या इस इनिशिएटिव के बारे में कहते हैं- “अगर किसी छात्र को एमआइटी, आइआइटीज, आइआइएम्स या स्टेनफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र द्वारा तैयार किये गये नोट्स मिलते हैं तो ये वाकई बेहद लाभदायक है।”

नोट्सजेन को जो रिस्पॉन्स मिल रहे हैं वो उत्साहित करने वाले हैं और ये एजुकेशन कंटेट के क्षेत्र में टॉप प्लेयर्स में से एक बनने और फंडिंग जरूरतों के हिसाब से और ज्यादा निवेश हासिल करने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।

2014-15 में इंडियन एजुकेशन मार्केट करीब 6 हजार करोड़ रुपये के आस-पास होने का अनुमान है और 2017 तक ये करीब 40 अरब डॉलर का हो जाएगा। भारत में ऑनलाइन एजुकेशन मार्केट काफी तेजी से विकास कर रहा है और आगे भी ये तेज गति से विकास करेगा। इसकी दो वजहें हैं- एक तो भारत की करीब आधी जनसंख्या 25 साल से कम उम्र की है और दूसरी ओर इंटरनेट और मोबाइल तेजी से फैल रहे हैं।