महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा डिप्रेशन का खतरा!

समय रहते ही पहचान लें इसे और संभल जायें...

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महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण पुरुषों की अपेक्षा बहुत अलग होते हैं। ऐसे में इन लक्षणों को सही समय पर भांपना बहुत जरूरी है। अवसाद में महिलाओं के साथ अक्सर मूड स्विंग की समस्या होती है यानी बहुत जल्दी-जल्दी उनका मूड बदल जाता है। कई बार मूड इस कदर बदलता है कि उन्हें घबराहट के दौरे तक पड़ने शुरू हो जाते हैं। आईये थोड़ा और करीब से जानें, कि ये डिप्रेशन है क्या बला... 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
डिप्रेशन हालांकि सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है लेकिन ज्यादातर किशोरों/युवाओं, प्रसव की आयु वाली महिलाओं और 60 वर्ष की उम्र से ऊपर के लोगों में आमतौर से पाया गया है... 

दुनिया के सभी देशों को लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में आगाह करते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में अपने एक शोध निष्कर्ष में खुलासा किया है कि विश्व में 30 करोड़ से अधिक लोग डिप्रेशन (अवसाद) से ग्रस्त हैं। शोध में पाया गया है कि अवसादग्रस्त लोगों की संख्या 2005 से 2015 के दौरान 18 फीसदी से अधिक बढ़ गई है। भारत का हर चौथा किशोर डिप्रेशन का शिकार है। आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने के पीछे यही सबसे मुख्य वजह बन रही है। इससे अवसादग्रस्त हजारों लोग हर साल मौत के मुंह में समा जा रहे हैं। शोध-सर्वे में दावा किया गया है कि डिप्रेशन के कारण महिलाओं में अब मौत का खतरा पहले से बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

इसकी वजह उन पर कई तरह की जिम्मेदारियों का दबाव है। शोध में पाया गया है कि महिलाओं में डिप्रेशन और उससे पैदा होने वाले मौत के खतरे की यह स्थिति 1990 के दशक से पैदा होनी शुरू हुई है। दक्षिण पूर्व एशियाई 10 देशों के एक सर्वे में सर्वाधिक आत्महत्या दर भारत में पाई ग ई है। ‘दक्षिण पूर्व एशिया में किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति: कार्रवाई का सबूत’ नामक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2012 में भारत में 15-29 आयुवर्ग के प्रति एक लाख व्यक्ति पर आत्महत्या दर 35.5 पाई गई है। भारत की जनसंख्या 131.11 करोड़ है, जिसमें 7.5 करोड़ किशोर (13-15 साल) हैं और यह कुल जनसंख्या का 5.8 फीसदी है। उनमें 3.98 करोड़ लड़के हैं तथा 3.57 लड़कियां।

डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट बताती है कि सर्वे में सात फीसदी किशोर झिड़की के शिकार पाए गए। पचीस फीसदी किशोर अवसादग्रस्त और उदास या निराश मिले, जबकि 11 फीसदी में ज्यादातर समय या हमेशा अपने काम पर ध्यान नहीं केंद्रित कर पाते हैं। आठ फीसदी किशोर चिंता की वजह से बेचैनी के शिकार हैं या वे सो नहीं पाते हैं। इतने ही फीसदी किशोर अकेलापन महसूस करते हैं। इसी तरह 10.1 फीसदी किशोरों का कोई घनिष्ठ मित्र नहीं है। भारत में 20 फीसदी ऐसे छात्र मिले, जिनकी अपने माता-पिता से घनिष्ठता की शिकायत रहती है। चार फीसदी किशोर तंबाकू उत्पादों का सेवन करते है, जबकि आठ फीसदी शराब पीते हैं।

सरकार ने अवसाद में आत्महत्या का कदम उठाने वालों को अब अपराधी होने की श्रेणी से बाहर कर दिया है। प्राथमिकता से ऐसे व्यक्तियों को इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इसी वर्ष मार्च में हमारे देश के सर्वोच्च दोनो सदनों लोकसभा और राज्यसभा ने तनाव में आत्महत्या करने के प्रयास को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाले और मानसिक रोगों के उपचार को ‘संस्थागत’ के बजाय 'मरीज और समुदाय' केंद्रित बनाने के प्रावधान वाले मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख विधेयक, 2016 को मंजूरी दे दी थी। लोकसभा ने को मंजूरी दे दी जिसे राज्यसभा 8 अगस्त 2016 को पहले ही स्वीकृति दे चुकी है। विधेयक में सुनिश्चित किया गया है कि हर व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल और उपचार के लिए वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवाओं से मदद लेने का अधिकार है। मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को नि: शुल्क उपचार दिया जाएगा, वह व्यक्ति भले ही बेघर या गरीब हो, अथवा उसके पास गरीबी-रेखा के नीचे का कार्ड न हो। आत्महत्या का खंडन करने वाली धाराओं में, बिल में कहा गया है कि जो व्यक्ति आत्महत्या करने का प्रयास करता है, उसे गंभीर तनाव होने के लिए अनुमान लगाया जाना चाहिए, और उसे दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

मानसिक हेल्थकेयर विधेयक ऐसे बीमार लोगों को मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, उपचार और शारीरिक स्वास्थ्य देखभाल के संबंध में गोपनीयता का अधिकार प्रदान करता है। व्यक्तियों से संबंधित फोटो या किसी भी अन्य जानकारी को मानसिक बीमारी वाले व्यक्ति की सहमति के बिना मीडिया को नहीं दिया जा सकता है। सरकार राष्ट्रीय स्तर पर हर राज्य में भी एक-एक मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण स्थापित करेगी। मनोवैज्ञानिक, मानसिक स्वास्थ्य नर्सों और मानसिक स्वास्थ्यकर्मियों सहित हर मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सकों को इस प्राधिकरण के साथ पंजीकृत होना होगा। विधेयक के तहत, प्रावधानों का उल्लंघन करने की सजा छह महीने तक जेल या 10,000 रुपये जुर्माना अथवा दोनों मान्य होगी। ऐसा दोबारा करने पर यह सजा दो साल तक जेल या 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों ही हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हम अगर डिप्रेशन जैसे लक्षणों को महसूस करते हैं तो उसके बारे में खुलकर बात करने और इसके संकेतों तथा लक्षणों को बेहतर तरीके से समझकर, खुद की अच्छे ढंग से मदद कर सकते हैं। डिप्रेशन हालांकि सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है लेकिन ज्यादातर किशोरों और युवाओं, प्रसव की आयु वाली महिलाओं तथा 60 वर्ष की उम्र से ऊपर के लोगों में आमतौर से पाया गया है। जहां तक अवसाद के लक्षणों की बात है, पीड़ित व्यक्ति को ठीक से नींद नहीं आती है, कम भूख लगती है, अपराध बोध होता है, आत्मविश्वास में कमी रहने लगती है, थकान और सुस्ती महसूस होती है। उत्तेजना या शारीरिक व्यग्रता बढ़ जाती है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से ऐसे व्यक्तियों से बातचीत करती रहने चाहिए, जिनपर वे भरोसा करते हों या जो उनके सबसे अधिक प्रिय हों। अवसादग्रस्त व्यक्ति को शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए।

महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण पुरुषों की अपेक्षा बहुत अलग होते हैं। ऐसे में इन लक्षणों को सही समय पर भांपना बहुत जरूरी है। अवसाद में महिलाओं के साथ अक्सर मूड स्विंग की समस्या होती है यानी बहुत जल्दी-जल्दी उनका मूड बदल जाता है। कई बार मूड इस कदर बदलता है कि उन्हें घबराहट के दौरे तक पड़ने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति‌ में अवसाद की वजह कोई विशेष परिस्थिति, हार्मोन की गड़बड़ी या फिर एलर्जी भी हो सकती है। अवसाद की स्थिति‌ में कई बार हर बात से रुचि खत्म होने लगता है। महिलाएं अपनी दिनचर्या या आस-पास के लोगों में रुच‌ि कम कर देती हैं।

कई बार अवसाद की वजह से वे किसी भी बात पर ध्यान नहीं केंद्रित कर पातीं और बात-बात पर अपना आपा खोने लगती हैं। कई बार अवसाद की स्थिति‌ में महिलाओं की डाइट प्रभावित होती है। अच्छा महसूस करने के लिए वे बहुत अधिक खाती हैं या फिर अवसाद में दुखी होकर भोजन ही नहीं करतीं। दोनों परिस्थितियों में अवसाद का प्रभाव डाइट पर हो सकता है। खासतौर पर महिलाओं पर अवसाद के दो तरह से प्रभाव पड़ते हैं, या तो उन्हें नींद नहीं आती या फिर नींद बहुत अधिक आती है। तो अगर सोने में उन्हें इस तरह की समस्या हो तो इसे अवसाद के लक्षण मान सकते हैं। दिन भर घर-बाहर की भागदौड़ में मुस्कराने वाली महिलाएं हमेशा थकी-थकी दिखें तो समझिए क‌ि उनके साथ जरूर कोई दिक्कत है।

हर समय थकान लगना भी अवसाद का एक गंभीर लक्षण है। अवसाद से घिरी महिलाएं अक्सर अपनी ही आलोचना करती हैं। बीते समय में जो हुआ अक्सर उन बातों को याद करके खुद को कोसती हैं। उन्हें हमदर्दी की तलाश होती है जिनसे वे अपने अंदेशे साझा कर सकें। अवसाद जब बहुत अधिक प्रभावित कर देता है तो मन में आत्महत्या तक करने का विचार आ सकता है। उन्हें अपने जीवन का कोई उद्देश्य नहीं दिखता। इस स्तर तक उनका अवसाद पहुंचे इससे पहले उन्हें चिकित्सा की बहुत जरूरत है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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