सिस्टम में तकनीकी खराबी आने के बावजूद इन दो पायलटों ने बचाई 370 जानें

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 जब फ्लाइट न्यू यॉर्क पहुंचने ही वाली थी तभी मौसम खराब हो गया और इस वजह से विमान का नेविगेशन सिस्टम से कनेक्शन टूट गया। पायलट के पास बिलकुल भी समय नहीं था और उन्होंने किसी तरह जॉनेफ कैनेडी एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल से लैंडिंग के लिए मदद मांगी।

रुस्तम पलिया और सुशांत सिंह
रुस्तम पलिया और सुशांत सिंह
दोनों पायलट नौ साल पुराने एयर इंडिया के विमान बोइंग 777-300 को नई दिल्ली से न्यू यॉर्क ले जा रहे थे।। यह फ्लाइट सीधे नई दिल्ली से जा रही थी यानी बीच में कहीं उसे रुकना नहीं था।

अगर एयर इंडिया के पायलटों ने समझदारी और सूझबूझ से काम नहीं लिया होता तो सिर्फ 38 मिनट के भीतर 370 यात्रियों की जानें जा सकती थीं और यह दुर्घटना एविएशन हिस्ट्री में सबसे भीषण दुर्घटना हो सकती थी। एयर इंडिया के विमान AI-101 के सीनियर कमांडर रुस्तम पलिया और सेकेंड इन कमांड कैप्टन सुशांत सिंह को उनकी सूझबूझ और बहादुरी के लिए उन सभी यात्रियों को धन्यवाद ज्ञापित करना चाहिए जिन्होंने आसमान में विमान में तकनीकी खराबी आने के बावजूद विमान को सही तरीके से जमीन पर उतारा।

दोनों पायलट नौ साल पुराने एयर इंडिया के विमान बोइंग 777-300 को नई दिल्ली से न्यू यॉर्क ले जा रहे थे।। यह फ्लाइट सीधे नई दिल्ली से जा रही थी यानी बीच में कहीं उसे रुकना नहीं था। इसे दुनिया की सबसे लंबे रूट पर लगातार 14 घंटे उड़ने वाली फ्लाइट में शामिल किया जाता है। दरअसल जब फ्लाइट न्यू यॉर्क पहुंचने ही वाली थी तभी मौसम खराब हो गया और इस वजह से विमान का नेविगेशन सिस्टम से कनेक्शन टूट गया। पायलट के पास बिलकुल भी समय नहीं था और उन्होंने किसी तरह जॉनेफ कैनेडी एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल से लैंडिंग के लिए मदद मांगी।

रुस्तम पलिया ने एटीसी से कहा कि उनके पास पर्याप्त तेल भी नहीं है कि वे विमान को आसमान में लेकर उड़ते रहें। रुस्तम ने कहा, 'हमें विमान में कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई और इसलिए हम इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर पाए। इसके बाद हम किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में सोचने लगे।' कमांडर ने आगे बताया कि उनके पास सिंगल सोर्स रेडियो अल्टीमीटर और ट्रैफिक कोलिजन एवॉयडेंस था लेकिन उससे ऑटो लैंडिंग नहीं कराई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि विंड शीयर सिस्टम और ऑटो स्पीड ब्रेक भी नहीं थी। वहीं ऑक्जिलरी पॉवर यूनिट भी काम नहीं कर रही थी।

तकनीकी रूप से बोइंग 777-300 विमानों में तीन इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) होते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से तीनों नहीं काम कर रहे थे। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस ILS सिस्टम से रनवे पर किसी भी मौसम में दिन या रात के समय आराम से लैंडिंग कराई जा सकती है। काफी देर तक एटीसी से बात करने के बाद पायलटों को पता चला कि बोइंग का लैंडिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इसके साथ ही विमान का तेल भी खत्म हो रहा था। अब पायलट न तो विमान को लैंड कराने की स्थिति में थे और न ही कहीं दूर जा सकते थे। उनका मन दुविधा से भरा हुआ था। हालांकि इस वक्त किसी कड़े फैसले की सख्त जरूरत थी।

जल्द ही पायलटों को नॉन प्रिसीजन अप्रोच अपनाने के लिए कहा गया। हालांकि एयर इंडिया और बोइंग कभी इस तरीके का इस्तेमाल करने की सलाह नहीं देता है। लेकिन फिर भी पायलटों ने यह तकनीक अपनाई और पास के निवार्क एयरपोर्ट की तरफ विमान को मोड़ दिया। निवार्क एयरपोर्ट पर बादल साफ नजर आ रहे थे। इतने में ही निवार्क एयरपोर्ट की तरफ से बोइंग के पायलटों को संदेश दिया गया कि विमान काफी कम ऊंचाई पर उड़ रहा है। संदेश मिलने के 38 सेंकंड्स के भीतर पायलटों ने विमान को लैंड करा दिया।

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