मध्य प्रदेश ने 12 घंटे में 6.6 करोड़ पेड़ लगाकर बनाया रिकॉर्ड

मध्य प्रदेश में 12 घंटे में लगाये गये 6.6 करोड़ पौधे...

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मध्य प्रदेश में लोगों ने विश्व में जन-सहभागिता और नदी संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण पेश करते हुए सिर्फ 12 घंटे में ही 6.6 करोड़ पौधे लगाकर एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। एमपी में 2 जुलाई को नर्मदा नदी के किनारे ये सभी पौधे लगाए गए...

इसके पहले 2016 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव की अगुवाई में 24 घंटे में 5 करोड़ पौधे लगाए गए थे। उस रिकॉर्ड को गिनीज बुक में दर्ज किया गया था। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार मध्य प्रदेश के लोगों का यह अभियान गिनीज बुक में दर्ज होगा। 

इस अभियान में जिन पौधों को रोपित किया गया था उनमें आम, आंवला, नीम, पीपल, बरगद, महुआ, जामुन, खमेर, शीशम, कदम, बेल, अर्जुन, बबूल, बांस, इमली, गूलर, खेर, अमरूद, संतरा, नींबू, कटहल, सीताफल, अनार, चीकू, बेर जैसे पेड़ लगाए गए। इनमें से कुछ प्रजातियां ऐसी भी थीं जो विलुप्त होने की कगार पर हैं।

मध्य प्रदेश में लोगों ने विश्व में जन-सहभागिता और नदी संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण पेश करते हुए सिर्फ 12 घंटे में ही 6.6 करोड़ पौधे लगाकर एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। एमपी में 2 जुलाई को नर्मदा नदी के किनारे ये सभी पौधे लगाए गए। पौधे लगाने का काम सुबह सात बजे शुरू हुआ था और शाम सात बजे ही यह अभियान समाप्त हो गया। इस काम में लगभग 15 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। नर्मदा नदी के किनारे बसने वाले सभी 24 जिलों में लोगों ने पौधे रोपे। मध्य प्रदेश सरकार ने एक दिनन में 6 करोड़ 67 लाख 50 हजार पौधों को रोपने का लक्ष्य रखा था। हालांकि कुल लगाए गए पौधों का वास्तविक आकलन अभी तक नहीं हो पाया है।

इसके पहले 2016 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव की अगुवाई में 24 घंटे में 5 करोड़ पौधे लगाए गए थे। उस रिकॉर्ड को गिनीज बुक में दर्ज किया गया था। उम्मीद जताई जा रही है, कि इस बार मध्य प्रदेश के लोगों का यह अभियान गिनीज बुक में दर्ज होगा।

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इस अभियान में जिन पौधों को रोपित किया गया था उनमें आम, आंवला, नीम, पीपल, बरगद, महुआ, जामुन, खमेर, शीशम, कदम, बेल, अर्जुन, बबूल, बांस, इमली, गूलर, खेर, अमरूद, संतरा, नींबू, कटहल, सीताफल, अनार, चीकू, बेर जैसे पेड़ लगाए गए। इनमें से कुछ प्रजातियां ऐसी भी थीं जो विलुप्त होने की कगार पर हैं।

भारत ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत 2030 तक वन क्षेत्रों को पचास लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस तरह के अभियान उस लक्ष्य को पूरा करने में सहायक साबित हो रहे हैं। 

अभियान की शुरुआत मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह के पौधे रोपने से हुई थी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश पूरी दुनिया से कहना चाहता है कि धरती के बढ़ते तापमान पर नियंत्रण के लिए पेड़ लगाना बेहद जरूरी है। सीएम ने कहा कि प्रदेश की जनता पेड़ लगाकर दुनिया को बचाने का काम कर रही है। जीवनदायिनी नर्मदा के संरक्षण के लिए और इस धरती के लिए ऐसा करना जरूरी है।

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पौधे लगाने में सबसे ज्यादा उत्साह स्कूल के बच्चों ने दिखाया। भारत ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत पर्यावरण संरक्षण के लिए 6.2 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है। मध्य प्रदेश के साथ ही देश के कई अन्य राज्यों में भी ऐसा ही अभियान चलाया जा रहा है। केरल में भी ऐसा ही अभियान चला था। अब महाराष्ट्र में इसी साल चार करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाने का अभियान शुरू होने जा रहा है।

भारत में पर्यावरण पर गंभीर संकट खड़े हो रहे हैं। तमाम नदियों का अस्तित्व संकट में है। जंगल साफ हो रहे हैं। पानी का भी संकट है। हवा भी प्रदूषित हो रही है। इससे वन्य जीवों का जीवन खतरे में आ गया है। पर्यावरण बचाने की दिशा में ऐसी पहल की सराहना जरूर की जानी चाहिए, लेकिन पेड़ लगाने के साथ ही उनकी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।

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