कर्ज लेकर क्रिकेट खेलने वाले मजदूर के बेटे को मिला 3.20 करोड़, IPL में मुंबई इंडियंस ने खरीदा.

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जयपुर के तेज़ गेंदबाज़ नाथू सिंह को मुंबई इंडियंस ने खरीदा....

चार साल पहले ही कर्ज लेकर क्रिकेट खेलना शुरू किया था...

नाथू सिंह के पिता फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं...



प्रकृति का नियम है-हर किसी के जीवन में अच्छे और बुरे दिन आते हैं। जो वाकई लगातार हाशिए पर है, जिसके जीवन में लगातार तंगी है, उसे प्रकृति एक मौका ज़रूर देती है। लेकिन कुछ लोग इस मौके को हासिल कर लेते हैं और कुछ इस इशारे को समझ नहीं पाते। जो लोग इस मौके को हासिल करना चाहते हैं वो दरअसल इसे पाने में जी-जान से जुट जाते हैं। दुनियाभर में उन्हें सिर्फ अपना लक्ष्य दिखता है और वो उसे पाने के लिए हर वो कोशिश करते हैं जो कई बार उनकी हद में नहीं होती है। कुछ ऐसा कर दिखाया है जयपुर के क्रिकेटर खिलाड़ी नाथू सिंह ने। नाथू सिंह की हर सांस में क्रिकेट है। सोना-उठना, खाना-पीना। सबकुछ। जुनून से भी आगे की चीज़। अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि नाथू के घरवालों ने क्रिकेट खेलने की इनकी लगन को देखते हुए चार साल पहल कर्ज लिया। और आज जीवन की दूसरी तस्वीर यह है कि नाथू सिंह को आईपीएल की टीम मुंबई इंडियंस ने तीन करोड़ बीस लाख रुपए में खरीद लिया है।

क्रिकेट को लेकर एक पुरानी कहावत है- क्रिकेट गरीबों का खेल नहीं है। लेकिन जयपुर के नाथू सिंह ने इस कहावत को सिरे से गलत ठहरा दिया है। एक फैक्ट्री में दिन रात मजदूरी कर बेटे को इस मुकाम पर पहुंचाने वाले मां-बाप को विश्वास नही हो रहा है कि बेटे को इतनी रकम मिली है। क्रिकेट के किट तक के लिए मोहताज रहने नाथू सिंह को भी अबतक यकीन नही हो रहा है कि मुंबई इंडियंस ने इन्हें इतनी रकम दी है। नाथू सिंह इस रकम से घर की मरम्मत करवाना चाहते हैं। परिवार का तो बस यही सपना है कि बेटा अब इंडियन टीम में शामिल हो जाए।

कर्ज लेकर क्रिकेट की शुरुआत

चार साल पहले नाथू सिंह के पिता भरत सिंह ने एक व्यापारी से दो रुपए सैंकड़ा के ब्याज दर से 10 हजार रुपए कर्ज लेकर क्रिकेट की कोचिंग के लिए सुराणा क्रिकेट अकादमी में नाथू सिंह का एडमिशन करवाया था। हालांकि नाथू सिंह के पिता तैयार नही थे। उनका मानना था कि उनका बेटा पैसे की बर्बादी करेगा और घर की हालत और खराब करेगा। भरत सिंह पहले ही फैक्ट्री में ओवरटाईम कर 12 से लेकर 16 घंटे तक काम कर परिवार पालते थे। पिता भरत सिंह कहते हैं,  

"मैं तो अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा 12 हजार रुपए कमाए हैं। मैं नही चाहता था कि नाथू क्रिकेट खेले, क्योंकि मेरे पास पैसे नही है। मैं तो दो-दो शिफ्ट कर बारह-बारह-सोलह-सोलह घंटे काम करता था। लेकिन रिश्तेदारों के कहने पर मैं तैयार हुआ। लेकिन आज मैं बहुत खुश हूं।" 

घूंघट के अंदर से मां सरोज कंवर कहती है, 

"बहुत खुशी है कि बेटा बड़ा आदमी बन गया है. इसके लिए इन्होंने भी बेहद संघर्ष किया है."

 

जयपुर के बाहरी इलाके में शहर से करीब 15 कि.मी. दूर भरत सिंह के दो कमरे के एक छोटे से मकान में बेटे नाथू सिंह को बधाई देनेवालों का तांता लगा हुआ है। बेटे ने पिता और परिवार का नाम रौशन किया है। 140 से 142 किं.मी. की स्पीड से गेंद फेंकनेवाले नाथू पिछले साल से लगातार देवधर और रणजी ट्राफी में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। नाथू सिंह को यकीन था कि उनका नाम भी नीलामी में आएगा ज़रूर। लेकिन जब आईपीएल की नीलामी हो रही थी तो नाथू सिंह काफी तनाव में थे। टेंशन की वजह से वे दोस्त के यहां बैठे थे। जैसे हीं दस लाख में नीलामी में नाम आया नाथू सिंह दोस्तों के साथ मस्ती में झूमने लगे। उन्हें तो शाम तक पता चला कि नीलामी ऊंची चढाई चढते हुए मुंबई इंडियंस की टीम में तीन करोड़ 20 लाख में उन्हें खरीदा है। दोस्तों ने बताया तो नाथू सिंह को यकीन तक नही हुआ। नाथू सिंह ने योरस्टोरी को बताया,

" खिलाड़ियों की नीलामी के समय में इतना नर्वस था कि दिन भर एक दोस्त के घर में बंद रहा. कुल 351 खिलाड़ी थे आक्शन में लेकिन जब रायल चैलेंजर बेंगलूर ने दस लाख में मुझे खरीदने के लिए बोली लगाई तो खुशी का ठिकाना नही रहा. मुझे तो तीन करोड़ 20 लाख याद हीं नही है अभी तक वो दस लाख हीं जहन में बसा है."

नाथू सिंह के कमरे में एक खाट है जहां वो सोते हैं। बगल के रैक पर सफलता के पदक रखते हैं। नाथू उनको देखते हुए बताते हैं,

"मैं दूसरे सीनियर खिलाड़ियों के सेकेंड हैंड किट और स्पाईक खरीद कर अपना काम चलाता रहा हूं। लेकिन मन में विश्वास था कि एक दिन मैं टीम इंडिया के लिए खेलूंगा। ये सफलता मेरे लिए बड़ी है लेकिन मैं खुद को सफल तब कहूंगा जब टीम इंडिया के लिए खेलूंगा।"

पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली के खिलाफ अपने पहले हीं रणजी में दिल्ली के खिलाफ 6 विकेट लेकर नाथू सिंह ने सबको चौंका दिया था। गौतम गंभीर ने भी आउट होने बाद कहा था कि लड़के में दम है। आईपीएल के इस नौवें संस्करण के में कुल 138 करोड़ की बोली लगी। और नाथू के लिए रॉयल चैलेंजर बैंगलूर, दिल्ली डेयर डेविल्स और मुंबई इंडियंस ने बोली लगाई थी।

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पिछले सात सालों से पत्रकारिता से जुड़ी हूं. व्यक्तिगत सफलता और सामाजिक बदलाव की कहानियां लिखती हूं जिसका मकसद समाज और देश में बदलाव लाना रहता है. राजस्थान से प्रकाशित पाक्षिक Changing Tomorrow अखबार के हिंदी पृष्ठ पर दो साल से नियमित तौर पर सामाजिक सरोकार से जुड़ी कहानियां लोगों तक पहुंचाती हूं. राजस्थान में आमलोग और खासकर महिलाएं अपनी तरह से विकास और बदलाव के के नए आयाम लिख रहे हैं इनकी कहानियां लोगों के प्रेरणा देने और संघर्ष के लिए हौसला देने का काम करती है और मेरी कोशिश होती है कि ये कहानियां कभी भी अनकही ना रहे.

Stories by Rimpi kumari