सरकारी स्कूल में टीचर हुए कम तो, IAS-PCS बच्चों को पढ़ाने पहुंचे क्लासरूम

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में बच्चों की शिक्षा को लेकर अधिकारी हुए जागरुक...

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स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि पढ़ाई-लिखाई का काम सुचारु रूप से चलाने के लिए करीब 35 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन अभी सिर्फ 11 अध्यापक ही मौजूद हैं। 

स्कूल में पढ़ाती अधिकारी
स्कूल में पढ़ाती अधिकारी
अधिकारियों की इस मुहिम के बाद जिले के कई और अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसमें अपनी रुचि दिखानी शुरू कर दी। डीएम ने अधिकारियों की योग्यता के मुताबिक उन्हें कक्षाएं भी अलॉट कर दीं। 

हमारे देश के सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल हो चुकी है। एक वक्त देश के युवाओं का भविष्य रचने वाले ये स्कूल आज इन्फ्रास्ट्रक्चर, टीचरों की कमी और न जाने कितनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में भी सबसे प्रमुख सरकारी स्कूल जीआईसी में टीचरों का अकाल पड़ गया। लेकिन जब यह बात वहां के अधिकारियों को पता चली तो उन्होंने खुद ही वहां जाकर पढ़ाना शुरू कर दिया। इस अनूठी पहल के शुरू होने के बाद सभी लोग इसकी सराहना कर रहे हैं। क्योंकि आमतौर पर सरकारी अधिकारी अपने काम को छोड़कर कोई दूसरा काम करने की सोचते भी नहीं हैं।

इस पहल का नेतृत्व गोंडा के डीएम जेबी सिंह ने किया। स्कूल के प्रिंसिपल ने उन्हें बताया था कि शिक्षकों की कमी की वजह से बच्चों की शिक्षा अधूरी रह जा रही है। इसके बाद अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया। जिले के सभी प्रमुख अधिकारियों को बुलाकर एक मीटिंग हुई और एक वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया गया। इस पहल का नाम रखा गया, माई ऑफिसर, माई सेंटर। इस ग्रुप में उन सभी अधिकारियों को जोड़ा गया और उनसे कहा गया कि जब भी उन्हें फुरसत का वक्त मिले वे स्कूल जाएं और अपना कीमती समय बच्चों पर लगाएं। इस काम में डीएम जेबी सिंह के अलावा सीडीओ दिव्या मित्तल एवं एसडीएम सदर अर्चना वर्मा ने भी मुख्य रूप से भाग लिया।

स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि पढ़ाई-लिखाई का काम सुचारु रूप से चलाने के लिए करीब 35 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन अभी सिर्फ 11 अध्यापक ही मौजूद हैं। अधिकारियों की इस मुहिम के बाद जिले के कई और अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसमें अपनी रुचि दिखानी शुरू कर दी। डीएम ने अधिकारियों की योग्यता के मुताबिक उन्हें कक्षाएं भी अलॉट कर दीं। इसकी शुरुआत करते हुए पहले दिन डीएम और सीडीओ स्कूल पहुंचे। कक्षाएं शुरू करने के पहले डीएम ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि वे सब मन में लक्ष्य निर्धारित कर लें और तब तक न रुकें जब तक उन्हें लक्ष्य हासिल न हो जाए।

उन्होने जीआईसी में छात्र-छात्राओं को छुट्टी के दिन अपने-अपने विषयों की कक्षाएं देनें और इस प्रकार की अभिनव पहल का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में अधिकारी इस काम में बढ़चढ़कर हिस्सा लेंगे और विद्यार्थियों को विषयक जानकारी देने के अलावा उन्हें कैरियर संवारने के तरीके, उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे आईएएस, आईपीएस, आईआईटी की परीक्षाओं में कैसे सफलता हासिल की जाय के गुर बताए जाएगें।

बताया जा रहा है कि यह आइडिया जिले की मुख्य विकास अधिकारी दिव्या मित्तल का था। दिव्या मित्तल ने बच्चों को इंग्लिश पढ़ाई। उनके अलावा एसडीएम सदर अर्चना वर्मा ने हिन्दी, एसडीएम तरबगंज अमरेश मौर्य ने इतिहास, तहसीलदार एस. एन. त्रिपाठी ने बॉटनी, नायब तहसीलदार तरबगंज इवेन्द्र ने केमिस्ट्री, डा. एस.के. मिश्रा ने बायोलॉजी और ई-ड्रिस्टिक्ट मैनेजर अमित गुप्ता ने कम्प्यूटर की क्लास ली। जिले के पुलिस विभाग के मुखिया उमेश कुमार सिंह ने बच्चों से कि वे सब सबसे पहले लक्ष्य का निर्धारण करें तथा अधिकारियों द्वारा शुरू की गई इस अभिनव पहल के अवसर का लाभ उठाएं तथा बुलन्दियों पर पुहंचने के लिए हर सम्भव मेहनत करें।

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