मिलिए वंचित महिला को उसकी जमीन वापस दिलाने वाली उड़ीसा की प्रशासनिक अधिकारी से

वो प्रशासनिक अधिकारी जिसने वापिस दिलाई वंचित महिला को उसकी ज़मीन...

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भुवनेश्वर में जन्मीं और वहीं पली बढ़ीं, रुमाना कक्षा 12 और स्नातक परीक्षा में शीर्ष स्थान पर रहीं। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षाएं दीं यहां तक कि उन छात्रों को भी पढ़ाया जो सिविल सेवा में शामिल होने की इच्छा रखते थे। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से रुमाना ने उड़ीसा प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं पास कर ली। वे 2015 बैच कैडर की अधिकारी हैं।

ग्रामीण महिलाओं के साथ रुमाना जाफरी (फोटो साभार- पारथा)
ग्रामीण महिलाओं के साथ रुमाना जाफरी (फोटो साभार- पारथा)
ऑफिस ज्वाइन करने के एक सप्ताह के अंदर ही उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर अपने ब्लॉक की शिकायत प्रक्रिया को फिर से तैयार करने का फैसला किया। 

प्रशासनिक सेवाओं में तैनात अधिकारियों का मुख्य मकसद लोगों के अधिकारों की रक्षा करना होता है। हालांकि कुछ इस लक्ष्य से भटक जाते हैं तो कुछ मिसाल पेश करते हैं। आज हम एक ऐसी ही प्रशासनिक अधिकारी के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसने अपने नेक इरादों से मिसाल पेश की है। उड़ीसा प्रशासनिक सेवा अधिकारी रुमाना जाफरी अपने क्षेत्र के वंचित लोगों के लिए बड़ा सहारा हैं। उड़ीसा के कालाहांडी जिले में मदनपुर रामपुर में रुमाना जाफरी पहली महिला और 46वीं ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) हैं। उन्होंने खुद को इस क्षेत्र और उसके लोगों के सुधार की दिशा में काम करने में लगा रखा है।

भुवनेश्वर में जन्मीं और वहीं पली बढ़ीं, रुमाना कक्षा 12 और स्नातक परीक्षा में शीर्ष स्थान पर रहीं। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षाएं दीं यहां तक कि उन छात्रों को भी पढ़ाया जो सिविल सेवा में शामिल होने की इच्छा रखते थे। अपनी कड़ी मेहनत और लगन से रुमाना ने उड़ीसा प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं पास कर ली। वे 2015 बैच कैडर की अधिकारी हैं।

ऑफिस ज्वाइन करने के एक सप्ताह के अंदर ही उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर अपने ब्लॉक की शिकायत प्रक्रिया को फिर से तैयार करने का फैसला किया। रुमाना ने शिकायत निवारण समन्वयक नियुक्त करने का फैसला किया। इस प्रक्रिया के तहत आठ दिनों के भीतर, शिकायतकर्ताओं को उनकी शिकायतों / आवेदनों की स्थिति का पता चल जाता है। दरअसल इस तरह से उन्होंने लोगों का समय, पैसा और ऊर्जा बचाने का काम किया। क्योंकि जनता को ब्लॉक ऑफिस आने में बार-बार यात्रा ट्रैवल करना पड़ता था। साथ ही ब्लॉक के लोग उनका शोषण करते थे।

रुमाना जाफरी (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
रुमाना जाफरी (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

हालांकि रुमाना जाफरी यहीं नहीं रुकीं। उनके काम में अलग पड़ाव तब आया जब, मदनपुर रामपुर के एक दूरस्थ गांव में एक बुजुर्ग महिला को सहायता की जरूरत थी। दरअसल उस महिला की जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा था, बेचारी गरीब महिला काफी परेशान थी। रुमाना जाफरी आधी रात में उस महिला से मिलीं और एम्बुलेंस की व्यवस्था की ताकि उसे लगभग 60 किमी दूर जिला अस्पताल ले जाया जा सके।

लोगों के लिए रुमाना का ये कदम बेहद चौंकाने वाला लगा। दरअसल मदनपुर रामपुर के किसी भी बीडीओ ने पहली बार ऐसा काम किया था। रुमाना को जैसे ही उस गरीब बीमार महिला के बारे में खबर लगी उन्होंने बिना कोई देरी किए आधी रात में ही उसकी सहायता के लिए पहुंच गईं। आपको जानकर हैरानी होगी ये दिन रविवार था, जहां ज्यादातर सरकारी अधिकारी छुट्टी पर रहते हैं लेकिन रुमाना के लिए दूसरों की सेवा ही पहला लक्ष्य है। रुमाना ने अपने इस कदम से लोगों का ये मिथक तोड़ दिया कि रविवार को सिविल सेवकों के लिए कोई काम नहीं है। रुमाना ने उस महिला की जमीन उसे वापस दिलाई और लोगों को सुनिश्चित किया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।

इस उड़ीसा प्रशासनिक अधिकारी के रास्तों में कई ऐसे ही मुद्दे आते रहे हैं जिसे उन्होंने बड़ी ही बहादुरी के साथ सॉल्व किया है। बिना किसी रुकावट के रुमाना अपने क्षेत्र के लोगों के लिए 24X7 घंटे काम करती हैं। रुमाना के मुताबिक, ये काम करने या गैर-कार्य दिवस का सवाल नहीं है, क्योंकि हर दिन आपका कर्तव्य करने का दिन होता है। उन्होंने अपने ब्लॉक में ये सुनिश्चित किया है कि सभी शिकायतों को लिखित में लिया जाएगा। इसके जरिए उत्तरदायित्व और पारदर्शिता लगातार बनाए रखी जाती है। साथ ही ये भी सुनिश्चित किया कि न केवल शिकायतों को नोट किया गया, बल्कि उन्हें हल किया गया, और उनका पालन किया गया। यह वास्तव में सराहनीय है, क्योंकि रुमाना जाफरी सिर्फ एक महीने के लिए ही कार्यालय में हैं। लेकिन उन्हें सर्वश्रेष्ठ काम करने और अच्छे काम में आने वाली बाधाओं को दूर कर दिया है।

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