छात्रों ने 15 दिनों में तैयार की सोलर कार

गाजियाबाद के कुछ स्कूली छात्रों ने सूरज की रोशनी को ऊर्जा में परिवर्तित कर चलने वाली एक कार का निर्माण किया। यह कार खास तौर पर प्रदूषण से निजात पाने के लिए तैयार की गई है।

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वर्तमान समय में पूरी दुनिया निरंतर बढ़ते हुए प्रदूषण के स्तर से जूझ रही है और वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है सड़कों पर विभिन्न प्रकार के ईंधन से चलने वाले वाहन। इस बढ़ते हुए प्रदूषण पर काबू पाने के प्रयास में सभी अपना पूरा योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं और इससे निबटने के लिये नित-नये प्रयोगों का दौर भी जारी है। इसी क्रम में गाजियाबाद के कुछ स्कूली छात्रों ने सूरज की रोशनी को ऊर्जा में परिवर्तित कर चलने वाली एक कार का निर्माण करने में सफलता पाई है। खास बात यह है कि सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली इस कार को तैयार करने वाले छह छात्र नवीं, दसवीं कक्षा और ग्यारहवीं कक्षा के एक छात्र ने इस पूरी परियोजना में शीर्ष भूमिका निभाई। ये छात्र सिर्फ 15 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इस कार को सफलतापूर्वक तैयार करने और सड़क पर दौड़ाने में कामयाब रहे।

गाजियाबाद के राज नगर स्थित शिलर पब्लिक स्कूल के सात विद्यार्थियों अर्णव, तन्मय, प्रथम, प्रज्ञा, उन्नति, दीपक और यश ने इस कार को तैयार करने में सफलता पाई है। इनमें से ग्हारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र अर्णव ने इस पूरी परियोजना की कमान संभाली। योरस्टोरी को अपनी परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए अर्णव कहते हैं, 

‘‘आज के समय में बढ़ते हुए प्रदूषण से पूरी दुनिया त्रस्त है और सड़कों पर चलने वाले वाहनों से पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान होता है। इसके अलावा हमें यह भी लगा कि सूरज की रोशनी ऐसे ही बेकार जा रही है और क्यों न इसका प्रयोग करते हुए एक ऐसा वाहन तैयार किया जाए जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा से ही संचालित होता हो।’’ 

इसके बाद इन्होंने अपने स्कूल के निदेशक ए के गुप्ता के सामने अपनी मंशा जाहिर की जिन्होंने इन्हें एक सोलर कार तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिये प्रेरित किया।

इसके बाद अर्णव ने स्कूल में अपनी ही सोच और कुछ नया करने का जज्बा रखने वाले नवीं और दसवीं कक्षा के कुछ अन्य छात्रों को अपने साथ लिया और सोलर कार को तैयार करने का काम प्रारंभ किया। अपनी इस कार के बारे में जानकारी देते हुए अर्णव बताते हैं, 

‘‘प्रारंभिक अनुसंधान के बाद हमनें यह तय किया कि हम अपनी इस कार को दो भागों में विभाजित करके तैयार करेंगे और यह फ्रंट और बैक दो भागों में तैयार की गई है। इस कार का फ्रंट नैनो कार और बैक ई-रिक्शा से प्रेरित है। यही कारण है कि हमारी इस कार के संचालन का सारा काम फ्रंट में होता है और पीछे के हिस्से में ट्रांसमिशन।’’

इस कार के बारे में और जानकारी देते हुए अर्णव बताते हैं, ‘‘हमारी इस कार की छत पर 300 वाॅट के पैनल लगे हैं जो 850 वाॅट की पाॅवर वाली 90 एमएएच वाली चार बैट्रियों को चार्ज करते हैं। यह बैटरियां कार के पिछले हिस्से में सवारियों के बैठने वाली सीटों के नीचे लगी हुई हैं। बाद में इस बैट्रियों की मदद से कार चलती है जो अधिकतम 40 से 60 क्लिोमीटर तक की गति पर दौड़ सकती है। एक बार बैट्रियों के पूरी तरह से चार्ज हो जाने पर हमारी यह कार करीब 160 किलोमीटर का सफर तय कर सकती है।’’ इसके अलावा इनकी यह कार डिस्टेंस सेंसर और हीट सेंसर से भी सुसज्जित है जो इसे दूसरों के द्वारा अबतक तैयार की गई दूसरी सोलर कारों से अलग करते हैं। इस प्रकार इन छात्रों ने सिर्फ 15 दिनों में ही अपनी अवधारणा को मूर्त देते हुए इस सोलर कार को सफलतापूर्वक तैयार कर दिखाया।

इन छात्रों ने जब सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले अन्य वाहनों पर एक नजर डाली तो इन्होंने देखा कि अधिकतर वाहन ऐसे तैयार किये गए हैं जो सिर्फ एक या फिर अधिकतम दो सवारियों की सवारी के लिये बनी होती हैं। अर्णव कहते हैं, ‘‘हमनें देखा कि सौर ऊर्जा से चलने वाले अधिकतर वाहन सिर्फ एक या दो लोगों के लिये ही काफी हैं इसलिये हमनें ई-रिक्शा से प्रेरणा लेते हुए इसे पांच लोगों के बैठने लायक बनाया और हमारी इस कार में एक बार में अधिकतम पांच लोग आराम से बैठ सकते हैं।’’ इस कार की एक और विशेषता यह है कि छत पर पैनल होने के चलते यह सफर के दौरान भी बड़ी आसानी से चार्ज होती रहती है जिससे इस कार के द्वारा लंबी दूरी की यात्रा भी सुगमता से की जा सकती है।

इस कार को तैयार करने में करीब एक लाख रुपये का खर्च आया जिसे पूरी तरह से शिलर स्कूल ने वहन किया। अपने छात्रों द्वारा तैयार की गई इस सोलर कार के बारे में बात करते हुए ए के गुप्ता कहते हैं, ‘‘हमारे इन सात छात्रों ने वास्तव में बेहतरीन काम करके दिखाया है और इनके द्वारा तैयार की गई यह सोलर कार कई मायनों में तो इंजीनियरिंग के छात्रों द्वारा तैयार की जाने वाली सोलर कारों से भी बेहतर है। इस कार को तैयार करने के लिये इस छात्रों ने रात-दिन मेहनत की और विषेशकर इनके माता-पिता ने भी पूरा सहयोग और प्रेरणा दी।’’ श्री गुप्ता बताते हैं कि इन्होंने फिलहाल कार के पेटेंट की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

इस कार को तैयार करने वाले छात्रों और छात्राओं का यह समूह अब अपनी इस सोलर कार को एक वास्तविक कार का रूप देने के काम में लगे हैं और इन्हें उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में इसे ऐसा रूप देने में सफल होंगे जिससे यह चलते समय एक कार का ही लुक देगी। साथ ही ये छात्र अपनी इस कार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने चलाकर दिखाना चाहते हैं और इनके स्कूल के निदेशक इस क्रम में प्रयासरत हैं।

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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