सैमसंग का ये एड लड़कियों के बारे में तोड़ रहा है स्टीरियोटाइप

रुढ़िवादी कवच को तोड़ने की एक बड़ी प्यारी-सी कोशिश की है सैमसंग के इस नये एड ने, जिसे अब तक 13 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं।

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"लड़कों की दुनिया... लड़कों के काम... लड़कियां ये नहीं करतीं... लड़कियां वो नहीं करतीं... ये तो तुमसे नहीं होगा... इसे लड़कों पर ही छोड़ दो... ये लड़कों का काम है... मर्दाना चाल-ढंग छोड़ दो... मर्दाना किताबें बस्ते में बंद कर दो... मर्दाना किताबें, मर्दाना नौकरियां उनके लिए नहीं... लड़कियों की जगह तो रसोईं में ही है... चुल्हा-चौका ही है उनकी ज़िंदगी..." इस तरह की कई बातें बचपन से हमारे आसपास सुनने को मिल जाती हैं। लड़कियों को एक खास कवच में पालने की आदत पुरानी है। उसी खास रुढ़िवादी कवच को तोड़ने की एक बड़ी प्यारी-सी कोशिश की है सैमसंग के इस नये एड ने, जिसे अब तक 13 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं।

मर्द और औरतों के लिए निर्धारित कर दिए गए कामों के बीच की दरार टूट रही है। आज औरतें घर चलाने के अलावा मशीन भी चला रही हैं और फाइटर प्लेन भी उड़ा रही हैं। जरूरत है तो बस उन्हें एक मौके की।

सैमसंग इंडिया ने अपने सैमसंग टेक्निकल स्कूल इनीशिएटिव के लिए सरकार के साथ एक समझौता किया है। सैंमसंग के कई राज्यों जैसे राजस्थान, केरल, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के साथ मिलकर 10 स्कूल चला रहा है। इस टेक्निकल स्कूल प्रोग्राम के तहत 1,000 लड़कियों को बेसिक कोर्स कंप्लीट करने पर 20,000 रुपये की स्कॉलरशिप दी जाएगी। यह स्कूल ग्रामीण इलाकों की लड़कियों के प्रति मानसिकता बदलने में काफी मददगार साबित होगा।

गिनने बैठ जाएंगे तो ऐसी तमाम अवधारणाएं सामने आ जाएंगी, जिन्हें समाज के एक हिस्से ने अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए बना रखा है। लोग समय-समय पर इन दकियानूसी और बांटने वाली बातों को महिमामंडित भी करते रहते हैं ताकि उनकी दुकान चलती रहे, लेकिन हर ऐसी बेसिरपैर की और अतार्किक परंपराओं का अंत जरूर होता है। मर्द और औरतों के लिए निर्धारित कर दिए गए इन कामों के बीच की दरार टूट रही है। आज औरतें घर चलाने के अलावा मशीन भी चला रही हैं और फाइटर प्लेन भी उड़ा रही हैं। जरूरत है तो बस उन्हें एक मौके की।

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सैमसंग इंडिया ने अपने टेक्निकल स्कूल के लिए एक ऐड तैयार करवाया है। इस ऐड में एक ग्रामीण लड़की की कहानी है, जो गांव से बाहर निकलकर पढ़ना चाहती है, अपने सपने पूरे करना चाहती है, लेकिन समाज की दकियानूसी सोच उसे रोकने की कोशिश करती है। उसके ताऊ जी इसके लिए मना कर देते हैं, लेकिन लड़की के पिता उसका पूरा साथ देते हैं, और उसे पढ़ने का मौका मिल जाता है। ये काफी भावुक क्षण होता है। लड़की पढ़ने के लिए मिले मौके से खुद को साबित कर देना चाहती है और इसीलिए खूब मन लगाकर पढ़ती है। घर में किसी की शादी होती है और वह घर आती है तब परिवार के लोग उसे अजब निगाह से देखते हैं।

अक्सर ऐसा होता है कि जब कोई लड़की अपने गांव या कस्बे से निकलकर शहर पढ़ाई के लिए जाती है, तो उसके बारे में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं।

एड में दिखाया गया है, कि शादी के लिए होने वाले एक कार्यक्रम में अचानक बत्ती गुल हो जाती है। तीन चार लड़के जेनेरेटर सही करने में जुट जाते हैं। लेकिन ये लड़के जेनेरेटर ठीक करने में नाकाम हो जाते हैं। तभी ये लड़की वहां पहुंचती है। लड़की के जेनरेटर छूते ही सभी पुरुषों की भौहें ऊपर उठ जाती हैं। उन्हें आश्चर्य होता है कि एक लड़की कैसे जेनरेटर ठीक कर सकती है। हमारा समाज ये मानता चला आ रहा है कि ऐसे काम सिर्फ पुरुष ही कर सकते हैं और वह लड़की चुटकियों में जेनरेटर ठीक कर देती है। उसके इस काम से नाक भौहें सिकोड़ने वाले लोग भी कहते हैं कि अब तो इसके लिए इसके जैसा कोई जेंटलमैन दूल्हा ढूंढ़ना पड़ेगा।

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'सपने हुए बड़े' टाइटल से बना ये एड लोगों का दिल जीत रहा है। इस ऐड को यूट्यूब पर अब तक 13 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं।इस ऐड को राजस्थान की पृष्ठभूमि पर बनाया गया है। वैसे तो पूरे देश में लड़कियों का एक सा हाल है लेकिन, राजस्थान लड़कियों की बदतर स्थिति के लिए कुख्यात है। यह ऐड उन लड़कियों को प्रेरणा दे सकता है जो स्कूल में जैसे-तैसे अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए जूझ रही हैं। जिन लड़कियों पर कम उम्र में ही शादी करने का दबाव बनाया जाता है। राजस्थान में कम उम्र में शादी के कारण कारण बहुत सी लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। जिस उम्र में उन्हें आगे की पढ़ाई करनी चाहिए, वे घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों में फंस जाती हैं। इसके लिए सिर्फ और सिर्फ हमारी मानसिकता जिम्मेदार है।

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अगर आप भी लड़कियों के बारे में ऐसा ही सोच रहे थे, तो अपने दिमाग से ये स्टीरियोटाइप हटाइए। आप जरा ये भी तो सोचिए कि दुनिया में मर्द, औरत के अलावा गे-लेस्बियन-ट्रांसजेंडर लोग भी अस्तित्व रखते हैं। आप अभी मर्द और औरत के बीच में ही अटके रहेंगे तो काफी पीछे रह जाएंगे। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता, उसी तरह कोई भी काम किसी खास जेंडर के लिए नहीं बना होता। हर इंसान के पास अलग-अलग काबिलियत होती है, उसका मूल्यांकन उसी हिसाब से होना चाहिए न कि उसके जेंडर से।

पूरा एड देखना न भूलें,

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