कुपोषण के खिलाफ शुरू हुई आर-पार की जंग

- एक सर्वे के अनुसार कुपोषण के मरीजों की संख्या छत्तीसगढ़ में काफी ज्यादा है।- अच्छी क्वालिटी और उत्पादन बढ़ाने के लिए की जा रही है रिसर्च।- भोजन में आयरन, जि़ंक और विटामिन ए की कमी से बढ़ रहा है कुपोषण।

0

छत्तीसगढ़ भारत के उन राज्यों में से एक है जहां सबसे ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। यह एक ऐसा राज्य भी है जिसे धान का कटोरा कहा जाता है और यह बात अपने आप में हैरान करती है कि यहीं के बच्चे बड़ी संख्या में कुपोषण के शिकार हैं। इस समस्या से पार पाने के लिए रायपुर के वैज्ञानिकों ने हाई जि़ंक एनरिच्ड वरायटी ऑफ राइस यानी ऐसे चावल की वरायटी जिसमें जि़्ंाक की मात्रा काफी हो, इजात की है। छत्तीसगढ़ में जो बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं उनके लिए यह एक अच्छी खबर है।

हरित क्रांति के बाद देश में कई ऐसे प्रयोग हुए जिससे बढिय़ा क्वालिटी और खेती के प्रोडक्शन को बढ़ाने की दिशा में प्रयास हुए। इन प्रयासों का मक्सद लोगों की भूख मिटाना है। तब से लेकर अब तक निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं कि किस प्रकार खेती की उत्पादन क्षमता और अच्छी क्वालिटी को बढ़ाया जा सके। छत्तीसगढ़ जि़्ंाक राइस1 भारत के पहले ऐसे धान के बीज हैं जिसमें जि़ंक बायो फोटीफाइड राइस वराइटी है। स्टेट वरायटी रिलीज़ कमेटी ने इसे लॉच किया है। ऐसी ही एक रिसर्च इंदिरा गांधी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी रायपुर में प्रोफेसर गिरिष चंदेल ने की और चावल की दो हाई जि़ंक राइस वैरायटी की खोज की।

सन 2000 में केंद्र सरकार और विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों ने एक सर्वे कराया और पाया कि भारत में साठ से सत्तर प्रतिशत आबादी कुपोषण से ग्रसित है। जिसका मुख्य कारण खाने में माइक्रो न्यूट्रीशन मुख्यत: आयरन, जि़ंक और विटामिन ए की कमी है। इसके बाद सरकार ने तय किया कि वे कई रिसर्च कार्यक्रम चलाएंगे ताकि चावल, गेहूं और ज्वार की अच्छी क्वालिटी जिनमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व हों उनकी रिसर्च की जाए। उसमें भी छत्तीसगढ़ जोकि धान की खेती के लिए जाना जाता है वहां चावल पर रिसर्च की जाएगी। इस विषय पर देशभर में रिसर्च की गईं। इसी क्रम में वहां पहला प्रोजेक्ट 2003 से 2005 तक चला। जिसके परिणाम अच्छे रहे और काफी अच्छी धान की पैदावार हुई। लेकिन अभी भी इस प्रोजेक्ट में थोड़ी कमी थी। इसके बाद सन 2006 से 2011 तक दूसरे फेज़ के रिजल्ट पहले से और बेहतर थे। अब अच्छी क्वालिटी के साथ-साथ पैदावार भी काफी होने लगी।

आखिरकार चार वरायटी को बेस्ट श्रेणी में रखा गया। जिसमें दो वरायटी छत्तीसगढ़ से थीं। इन बेहतर क्वालिटी के बीजों को छत्तीसगढ़ के किसानों को बांटा जा रहा है ताकि वे लोग बढिय़ा पोषण युक्त चावलों का उत्पादन कर सकें। और छत्तीसगढ़ जोकि कुपोषण से प्रभावित है वहां बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल सके।