असुरक्षित महिला, असहाय सरकार

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उत्तर प्रदेश में औरत की अस्मत फिर बदमाशों के निशाने पर है। बिगड़े हालातों का आलम तो यह है कि कभी सरकारी अस्पताल में ही महिला मरीज के साथ रेप हो जाता है तो कभी कोर्ट परिसर ही दुराचार पीड़िता पर हमले का गवाह बनता है...

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
आलम तो यह है कि न सड़क सुरक्षित है और न ही धार्मिक स्थल। अब देखिये न मथुरा का प्रसिद्ध राधा रानी मन्दिर भी औरत की अस्मत रेजी का नापाक दाग अपने दामन पर लगा कर शर्मसार खड़ा है।

 ओडिशा की रहने वाली एक महिला श्रद्धालु बरसाना दर्शन करने आयी थी। रात वह राधा रानी मन्दिर में ठहरी हुई थी। इसी दौरान रात के करीब सवा दस बजे मन्दिर के रसोइया और चौकीदार ने महिला को दबोच लिया। दोनों उसे मन्दिर परिसर के एक कोने में ले गए और वहां उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किया।

त्तर प्रदेश में औरत की अस्मत फिर बदमाशों के निशाने पर है। बिगड़े हालातों का आलम तो यह है कि कभी सरकारी अस्पताल में ही महिला मरीज के साथ रेप हो जाता है तो कभी कोर्ट परिसर ही दुराचार पीड़िता पर हमले का गवाह बनता है। पीड़िता को जज की शरण बदमाशों के कहर से बचा पाती है। आलम तो यह है कि न सड़क सुरक्षित है और न ही धार्मिक स्थल। अब देखिये न मथुरा का प्रसिद्ध राधा रानी मन्दिर भी औरत की अस्मत रेजी का नापाक दाग अपने दामन पर लगा कर शर्मसार खड़ा है। ओडिशा की रहने वाली एक महिला श्रद्धालु बरसाना दर्शन करने आयी थी। रात वह राधा रानी मन्दिर में ठहरी हुई थी। इसी दौरान रात के करीब सवा दस बजे मन्दिर के रसोइया और चौकीदार ने महिला को दबोच लिया। दोनों उसे मन्दिर परिसर के एक कोने में ले गए और वहां उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किया। 

यह वारदात और आरोपी वहां लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए। जब मामला मीडिया के पास पहुंचा तब पुलिस हरकत में आई, लेकिन दोनों आरोपी तब तक पुलिस की पहुंच से बाहर हो गए। अब पुलिस का कहना है कि महिला की शिकायत दर्ज कर ली गई है। टीम बना कर आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। मन्दिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में साफ दिख रहा है कि किस तरह से मन्दिर परिसर में मौजूद महिला को एक शख्स पीछे से आकर उठा ले जाता है और घटना के बाद दोनों आरोपी महिला के साथ फिर से परिसर में दिख रहे हैं। अपराधियों के हौसले इतने बुलन्द हैं कि राजधानी के सबसे सुरक्षित क्षेत्र तक में स्त्री के साथ संगीन वारदात को अंजाम देने में गुरेज नहीं कर रहे हैं। विगत दिनों घटित हुई घटनाओं पर गौर करें तो हालात की मौजूदा तस्वीर खुद-ब-खुद चीखने लगती है। लखनऊ में महिलाओं के प्रति अपराधों पर नजर डालें तो बीते 38 दिन में सामूहिक दुष्कर्म, दुष्कर्म, कुकर्म व छेड़छाड़ की 15 से ज्यादा वारदातें हो चुकी हैं। कई मामलों में आरोपी पकड़े भी गए हैं। लेकिन महिलाओं को उपभोग की नजर से देखने की मानसिकता में अब तक बदलाव नजर नहीं आया है। महिलाओं, युवतियों और मासूमों को लगभग हर जगह इनका शिकार होना पड़ता है। मासूम बच्चों और बच्चियों को दरिन्दों से बचाना उनके परिजनों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। 

लखनऊ में गत दिनों हुई 15 वारदातों में 7 बच्चों को दरिन्दों ने अपना शिकार बनाया है। हाल ही में 8 अक्टूबर को बीकेटी क्षेत्र में चन्द्रिका देवी के पास जंगलों में चार साल की बच्ची के सामूहिक दुष्कर्म ने जहां पूरे सूबे को झकझोर दिया तो 7 अक्टूबर को हसनगंज के डालीबाग कॉसिंग स्थित पुराने पुलिस बूथ में विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म हुआ। 5 अक्टूबर को मलिहाबाद के रहीमाबाद में 19 वर्षीय छात्रा की दुराचार के बाद हत्या कर दी जाती है जिसकी जांच जारी है, तो 27 सितम्बर को इन्दिरानगर में एक हिस्ट्रीशीटर द्वारा छेड़छाड़ के विरोध पर युवती को पीटने के साथ ही वीडियो भी बनाया जाता है। समझा जा सकता है कि आखिर घटना का वीडियो बनाने का पीछे क्या वजह हो सकती है?  हद तो तब हो गई जब 25 सितम्बर को मडिय़ांव में एक डॉक्टर ने महिला मरीज को बेहोश कर रेप किया। इस घटना ने डाक्टर और मरीज के रिश्ते के मध्य की विश्वसनीयता को तार-तार कर दिया। बच्चियों के लिए भी आफत लगातार बढ़ रही है। बुद्धेश्वर क्षेत्र में जहां 24 सितम्बर को छठी कक्षा के बच्चे को मिठाई का लालच देकर आरोपी ने कुकर्म किया वहीं 24 सितम्बर को गाजीपुर थाना क्षेत्र में चार साल के बच्चे को कार्टून दिखाने के बहाने उसके साथ कुकर्म हुआ। मन्दबुद्धि किशोरी भी नहीं बची और 22 सितम्बर को ठाकुरगंज इलाके में रेप की शिकार बनी।

इस तरह की अन्तहीन दास्तानें हैं जिन्हें लिपिबद्ध किया जाए तो उपन्यास पूरा हो जाए किन्तु सरकार है कि वह अपनी पीठ ठोकने से बाज नहीं आ रही है। नागरिकों से ऐसे असुरक्षित उ.प्र. का तो वायदा नहीं किया गया था। महिला सुरक्षा में लगती सेंध इस बात की दलील है कि उ.प्र. में सरकार बदली है औरत के बारे में नजरिया नहीं, मुख्यमंत्री नया है किन्तु पुलिस अब भी पुरानी है। उ.प्र. में महिला सुरक्षा की तस्वीर आज भी डीजीपी कार्यालय के सामने किसी पेड़ पर एक औरत की लाश की शक्ल में क्षत-विक्षत, उल्टा टंगी दिखाई पड़ रही है। दीगर है कि स्त्री सुरक्षा के मोर्चे पर उ.प्र. सरकार हांफती हुई नजर आ रही है। सवाल यह है कि इन लम्पटों को रोकने के लिए वैधानिक रूप से जिम्मेदार पुलिस तंत्र का इकबाल क्या भूसा गाड़ी के पीछे-पीछे दौडऩे में खत्म हो गया है। क्या अब हम मध्ययुग के उस दौर में प्रवेश करने की तैयारी में लग चुके हैं जहां महिलाएं या तो घर की चारदीवारी में रहती थीं अथवा जन्म लेते की कत्ल कर दी जातीं थीं। 

उत्तर प्रदेश में इन दिनों दुराचार और स्त्री हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। स्कूल जाती लड़की के साथ रेप कर देना, सरेआम बाजार में लड़की का हाथ काट लेना ये ऐसी घटनाएं हैं जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महिला सुरक्षा के वादों और दावों को चुनौती देने के लिए काफी हैं। हाल ही में जालौन जिले के कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम निनावली कोठी में एक 7 साल की मासूम के साथ गैंगरेप की घटना प्रकाश में आई है। आरोप है जब बच्ची घर के बाहर अपने पिता के साथ सो रही थी तभी दरिन्दे उसका मुंह दबा कर उठा ले गए। बच्ची के साथ 3 लोगों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। वहीं ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के रोशनपुर गांव में एक नाबालिग से दो युवकों ने रेप की कोशिश की। लखनऊ जिले के बंथरा इलाके मेें घर में मौजूद किशोरी को अकेला पाकर पड़ोसी युवकों ने उसके साथ दुराचार करने की कोशिश की। किशोरी की चाची के शोर मचाने पर दोनों आरोपी भाग निकले। घटना की सूचना पुलिस को दी गई।

12 मई, 2017 को कानपुर जिले में रहने वाली एक किशोरी का आरोप है कि उसके जीजा ने उसे नशीली चाय पिला कर अपने भाई के साथ मिल कर बारी-बारी से कई दिनों तक बन्धक बना कर सामूहिक बलात्कार किया। 15 मई, 2017 को हरदोई जिले के कोतवाली बेनीगंज क्षेत्र के एक गांव में घर में मां के साथ सो रही एक किशोरी को तमंचे के बल पर घर से उठा कर बाग में ले जाकर चार दिन तक सामूहिक दुष्कर्म किये जाने का मामला सामने आया है। वहीं 25 मई, 2017 को ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में हाइवे पर 4 महिलाओं के साथ गैंगरेप की वारदात हुई। इस दौरान बदमाशों ने विरोध करने पर एक युवक की गोली मार कर हत्या कर दी। 25 मई, 2017 को झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 16 वर्षीय हाईस्कूल की छात्रा नेहा (नाम काल्पनिक) ने चार युवकों पर अपहरण के बाद गैंगरेप का आरोप लगाया। 25 मई, 2017 को बाराबंकी जिले के जैदपुर थाना क्षेत्र में जमीन के विवाद में दो पक्षों में जम कर मारपीट के दौरान में एक किशोरी के साथ दरिन्दगी की घटना हुई। यहां हैवानों ने किशोरी के नाजुक अंग में डण्डा डालने की शर्मनाक हरकत भी की, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई। 

28 मई, 2017 को रामपुर जिले में अपने दोस्त के साथ घूमने गई दो लड़कियों से सरेराह छेड़छाड़ और अश्लीलता का एक वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वॉयरल हुआ। इसके बाद पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 30 मई, 2017 को फिर से रामपुर जिले में फिर एक युवती को परचून की दुकान पर छेड़छाड़ के बाद सरेराह रास्ते से अपहरण कर जंगल में खींच कर रेप की कोशिश का मामला प्रकाश में आया है। अब इससे भी बढ़ कर सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के साथ ही रेप के मामले साथ आने लगे हैं। ताजा घटना उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले की है। जहां महिला मरीज के साथ रेप किया गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखण्ड की रहने वाली 35 वर्षीय महिला कुष्ठ रोग से पीडि़त है, जिसका गोण्डा जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, एडहॉक तौर पर काम कर रहे हॉस्पिटल के एक कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी की छानबीन शुरू कर दी है।

खैर यह तो वह आंकड़े हैं जो पीड़िता की हिम्मत के कारण पुलिस अभिलेखों में दर्ज हैं अन्यथा बहुतायत मामले या तो मर्यादा के नाम पर दम तोड़ देते हैं या पीडि़ता थाने की दहलीज तक जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाती है। पुलिस थाना जहां दुराचार पीडि़ता का निगाहों से ही कई बार बलात्कार हो जाता है और समाज, जिसकी मर्दानगी के किस्से एनसीआरबी के आंकड़ों में दर्ज हैं, उसके बरक्स इंसाफ की कांपती लौ सुव्यवस्थित अव्यवस्था के थपेड़ों के दरम्यान हव्वा की बेटियों को इंसाफ कैसे दिला पाएगी, यह सवाल उत्तम प्रदेश की बुनियाद की कसौटी है।

महिला सुरक्षा: राजधानी की पुलिस भी फेल

महिला सुरक्षा को लेकर सूबे में सत्ता में आई योगी सरकार की पुलिस राजधानी में ही महिलाओं को सुरक्षा देने में नाकाम दिख रही है। लखनऊ में महिलाओं के प्रति अपराधों पर नजर डालें तो बीते 38 दिन में सामूहिक दुष्कर्म, दुष्कर्म, कुकर्म व छेड़छाड़ की 15 से ज्यादा वारदातें हो चुकी हैं। कई मामलों में आरोपी पकड़े भी गए लेकिन महिलाओं को उपभोग की नजर से देखने की मानसिकता में अब तक बदलाव नजर नहीं आया है। महिलाओं, युवतियों और मासूमों को लगभग हर जगह इनका शिकार होना पड़ता है। मासूम बच्चों और बच्चियों को दरिन्दों से बचाना उनके परिजनों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। लखनऊ में गत दिनों हुई 15 वारदातों में 7 बच्चों को दरिन्दों ने अपना शिकार बनाया है।

राजधानी में महिलाओं के साथ हुईं घटनाएं:

08 अक्टूबर - बीकेटी क्षेत्र में चन्द्रिका देवी के पास जंगलों में चार साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म।

07 अक्टूबर - हसनगंज के डालीबाग कॉसिंग स्थित पुराने पुलिस बूथ में विक्षिप्त महिला से दुष्कर्म।

05 अक्टूबर - मलिहाबाद के रहीमाबाद में 19 वर्षीय छात्रा की रेप के बाद हत्या, जांच जारी।

27 सितम्बर - इन्दिरानगर में हिस्ट्रीशीटर ने छेड़छाड़ के विरोध पर युवती को पीटा, बनाया वीडियो।

25 सितम्बर - मडिय़ांव में डाक्टर में महिला मरीज को बेहोश कर रेप किया।

25 सितम्बर - आशियाना थाना क्षेत्र में महिला के साथ दो आरोपियों ने दुष्कर्म किया।

24 सितम्बर - बुद्धेश्वर क्षेत्र में छठी कक्षा के बच्चे को मिठाई का लालच देकर आरोपी ने कुकर्म किया।

24 सितम्बर - गाजीपुर थाना क्षेत्र में चार साल के बच्चे को कार्टून दिखाने के बहाने कुकर्म किया।

22 सितम्बर - ठाकुरगंज में युवती को प्यार के जाल में फंसाया, अश्लील तस्वीरें और वीडियो लेकर पैसों के लिए ब्लैकमेल किया।

22 सितम्बर - ठाकुरगंज में विधवा के साथ भांजे ने ही किया रेप।

22 सितम्बर - ठाकुरगंज में मन्दबुद्धि किशोरी के साथ रेप की वारदात।

12 सितम्बर - विभूतिखण्ड थाना क्षेत्र में घर में घुस कर युवती से रेप का प्रयास।

09 सितम्बर - इन्दिरानगर में पार्क में खेल रही दो सगी बहनों के साथ बुजुर्ग ने की छेड़छाड़।

09 सितम्बर - मलिहाबाद गांव में किसान की नाबालिग बेटी के साथ दबंगों ने किया रेप का प्रयास।

06 सितम्बर - ठाकुरगंज में पांच साल की बच्ची का अपहरण कर रेप का प्रयास।

निर्भया फण्ड को मंजूरी:

रोडवेज बसों में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने, पैनिक बटन के अलावा पिंक बसों की खरीद का रास्ता साफ हो गया है। रोडवेज बसों में महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार ने निर्भया फण्ड को मंजूरी दे दी है। केन्द्र ने प्रदेश सरकार को निर्भया फण्ड के तहत स्वीकृत हुए 83 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुमोदन पत्र भेज दिया है। मंजूरी मिलने के बाद परिवहन निगम प्रशासन ने 50 पिंक बसों की खरीद की तैयारी भी शुरू कर दी है। साथ ही पिंक बसों और महिला सुरक्षा को लेकर खाका खींचा जा रहा है।

माना जा रहा है कि निर्भया फण्ड से रोडवेज की 12,500 बसों के बेड़े में अब सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। यह सब निर्भया फण्ड से किया जाएगा। एक बस में तीन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। एक कैमरा मेन गेट पर, दूसरा पीछे व तीसरा कैमरा बस के बीचोंबीच लगेगा। ये तीनों कैमरे बस के भीतर यात्रियों की तमाम गतिविधियों पर नजर रखेंगे। पैनिक बटन का इस्तेमाल कोई महिला यात्री जैसे ही करेगी, वैसे ही कंट्रोल रूम में अलर्ट जारी हो जाएगा। यही नहीं महिलाओं की सुरक्षा के लिए आदिशक्ति ग्रुप का गठन किया जाएगा। इसमें महिला अधिकारी के साथ ही महिला परिचालक व ट्रैफिक पुलिस भी रहेगी। आदिशक्ति ग्रुप की महिलाएं यात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराएंगी। 

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लेखक / पत्रकार

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