मचा हड़कंप, जीएसटी से फ्लैट सस्ते होंगे या महंगे?

जीएसटी कानून लागू हो जाने पर देश के नगरों-महानगरों में फ्लैट्स सस्ते अथवा महंगे होने की अटकलों के बीच रियल एस्टेट सेक्टर के दो संगठनों की ओर से एक-दूसरे के दावों के विरोधी संकेत मिल रहे हैं...

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नेशल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) का कहना है, कि जीएसटी के तहत रीयल एस्टेट पर 12 प्रतिशत टैक्स से फ्लैट्स की कीमतों पर दबाव नहीं पड़ेगा, जबकि रियल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई का कहना है कि खरीदारों पर बोझ बढ़ेगा। वह 1 जुलाई से पहले किश्तों का भुगतान करने को कह रहे हैं, जिससे हड़कंप मचा हुआ है और स्थिति स्पष्ट करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बिल्डरों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों को ताजा गंभीर चेतावनी जारी की है।

फोटो साभार: manandvanuk
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ऐसी ताजा सूचनाएं मिल रही हैं, कि जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) अधिनियम की धारा-171 फ्लैट और मकान खरीदने वालों के लिए आर्थिक कवच सिद्ध हो सकती है। जीएसटी लागू होने की 01 जुलाई 2017 की तिथि को ध्यान में रखते हुए, उससे पहले बिल्डर लॉबी फ्लैट, मकान खरीदारों से मूल्य अनुबंध के तहत शेष भुगतान तत्काल मांग रही है, जिससे खरीददार जीएसटी का लाभ पाने से वंचित हो जाएं।

"जीएसटी परिषद ने खरीदारों को बेचने के लिये परिसर या इमारत के निर्माण पर 12 प्रतिशत कर का प्रस्ताव किया है। क्षेत्र पर मौजूदा अप्रत्यक्ष कर की दर भी 9 से 11 प्रतिशत के बीच है। इसमें सेवा कर और वैट शामिल हैं।"

जीएसटी कानून लागू हो जाने पर देश के नगरों-महानगरों में फ्लैट्स सस्ते अथवा महंगे होने की अटकलों के बीच रियल एस्टेट सेक्टर के दो संगठनों की ओर से एक-दूसरे के दावों के विरोधी संकेत मिल रहे हैं। नारेडको कह रहा है, कि 'फ्लैट्स की कीमतों पर दबाव नहीं पड़ेगा। जीएसटी के तहत वास्तविक कर प्रभाव मौजूदा स्तर पर या उससे कम होगा। फिलहाल क्षेत्र पर जो कई अप्रत्यक्ष कर लगते हैं, उससे मुक्ति मिलेगी। जीएसटी परिषद ने खरीदारों को बेचने के लिये परिसर या इमारत के निर्माण पर 12 प्रतिशत कर का प्रस्ताव किया है। क्षेत्र पर मौजूदा अप्रत्यक्ष कर की दर भी 9 से 11 प्रतिशत के बीच है। इसमें सेवा कर और वैट शामिल हैं। 

इसके विपरीत क्रेडाई अध्यक्ष जे. शाह कह रहे हैं, 'स्टांप ड्यूटी के कारण अचल संपत्ति के मूल्य का रीयल एस्टेट पर अतिरिक्त बोझ पांच से आठ प्रतिशत के बीच बढ़ सकता है। जीएसटी से बहुकर की व्यवस्था समाप्त नहीं होगी। एक जुलाई से जीएसटी लागू हो जाने के बाद जब तक सरकार जमीनों पर एबेटमेंट (छूट) नहीं उपलब्ध कराएगी, फ्लैट्स के खरीदारों को अधिक भुगतान तो हर हाल में भुगतना ही पड़ेगा।'

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ऐसी ताजा सूचनाएं मिल रही हैं, कि जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) अधिनियम की धारा-171 फ्लैट और मकान खरीदने वालों के लिए आर्थिक कवच सिद्ध हो सकती है। जीएसटी लागू होने की 01 जुलाई 2017 की तिथि को ध्यान में रखते हुए, उससे पहले बिल्डर लॉबी फ्लैट, मकान खरीदारों से मूल्य अनुबंध के तहत शेष भुगतान तत्काल मांग रही है, जिससे खरीदार जीएसटी का लाभ पाने से वंचित हो जाएं। जीएसटी लागू होने के साथ ही भवन निर्माण की लागत घट जाएगी। बिल्डर्स उस बचत का लाभ उठाना चाहते हैं, जो गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।

"जीएसटी की धारा-171 उपभोक्ता को संरक्षण देगी। इस धारा में प्रावधान है कि यदि जीएसटी व्यवस्था लागू होने पर निर्माता, उत्पादक को लागत मूल्य में कमी आती है तो उसे अपने लाभ में उपभोक्ता को शामिल करना पड़ेगा। इस दृष्टि से वास्तविकता यह है कि जीएसटी लागू होने पर बिल्डर्स ने बिल्डिंग मटेरियल पर जो टैक्स चुकाये हैं और वही टैक्स नयी व्यवस्था में माफ होंगे तो उनका भुगतान वापस मिलेगा।"

वर्तमान में बिल्डर्स को कमोबेश 30 प्रतिशत विभिन्न करों में भुगतान करना पड़ता है, जो जीएसटी में नहीं लगेगा। सिर्फ 12 प्रतिशत प्रभार लिया जायेगा। यह जो 18 प्रतिशत लागत मूल्य में बचत होगी, इसका लाभ उपभोक्ताओं को सुनिश्चित कराने में जीएसटी की धारा-171 कारगर साबित होगी।

इस बीच केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क बाकी राज्यों को लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद बिल्डरों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों को केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से ताजा चेतावनी जारी की गई है, कि वे जीएसटी के तहत टैक्स में कमी का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं पाने देते हैं तो मुनाफाखोरी के आरोप में उन पर कार्रवाई की जाएगी। कम टैक्स का फायदा जमीन की कम कीमतों और किस्तों का फायदा खरीदारों को मिलना ही चाहिए।

बिल्डर जीएसटी लागू होने के बाद उच्च कर की दर से टैक्स वसूलते हैं, तो उनकी इस हरकत को धारा 171 का उल्लंघन माना जाएगा। केंद्र एवं राज्य सरकारों तक ऐसी शिकायतें पहुंचने लगी हैं, कि बिल्डर जीएसटी के तहत 12 फीसदी सेवा कर को देखते हुए निमार्णाधीन फ्लैट्स और परिसरों में बुकिंग कराने वाले ग्राहकों से एक जुलाई 2017 से पहले किश्तों का तत्काल भुगतान करने, वरना ज्यादा टैक्स चुकाने के लिए तैयार रहने को कह रहे हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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