गुदड़ी का लाल बना एक पल में करोड़पति, फैक्ट्री मजदूर के बेटे को मुंबई इंडियंस ने 3.20 करोड़ में खरीदा.

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फैक्ट्री में मजदूरी करनेवाले के बेटे को मिला मुंबई इंडियंस की टीम से तीन करोड़ 20 लाख . चार साल पहले हीं ब्याज पर कर्ज लेकर क्रिकेट खेलना शुरु किया था.

जयपुर के गरीब परिवार के बेटे और तेज गेंदबाज नाथू सिंह के मुंबई इंडियंस टीम में तीन करोड़ 20 लाख में खरीदे जाने पर उनके घर में खुशियों का माहौल है. एक फैक्ट्री में दिन रात मजदूरी कर बेटे को इस मुकाम पर पहुंचानेवाले मां-बाप को विश्वास नही हो रहा है कि बेटे को इतनी रकम मिली है. क्रिकेट के किट तक के लिए मोहताज रहने नाथू सिंह को अबतक यकीन नही हो रहा है कि मुंबई इंडियन ने इन्हें इतनी रकम दी है. नाथू सिंह इस रकम से घर की मरम्मत करवाना चाहते हैं.परिवार का तो बस यही सपना है कि बेटा अब इंडियन टीम में शामिल हो जाए.

चार साल पहले पिता भरत सिंह ने एक व्यपारी से दो रुपए सैंकड़ा के ब्याज दर से 10 हजार रुपए कर्ज लाकर क्रिकेट की कोचिंग के लिए सुराणा क्रिकेट अकादमी में नाथू सिंह का एडमिशन करवाया था. पिता तैयार नही थे फैक्ट्री में ओवरटाईम कर 12 से लेकर 16 घंटे तक काम कर परिवार पालते थे. लेकिन आज जयपुर के बाहरी इलाके में शहर से करीब 15 कि.मी. दूर भरत सिंह के दो कमरे के एक छोटे साॉे मकान में बेटे नाथू सिंह को बधाई देनेवालों का तांता लगा हुआ है. बेटे ने पिता और परिवार का नाम रौशन किया है. आईपीएल में मुंबई इंडियंस ने तेज गेंदबाज नाथू सिंह को तीन करोड़ बीस लाख में इस सीजन के लिए खरीदा है. 140 से 142 किं.मी. की स्पीड से गेंद फेंकनेवाले नाथू पिछले साल से लगातार देवधर और रणजी ट्राफी में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन जब आईपीएल की निलामी हो रही थी तो टेंशन की वजह से दोस्त के यहां बैठे थे. जैसे हीं दस लाख में निलामी में नाम आया नाथू सिं दोस्तों के साथ मस्ती में झूमने लगे. उन्हें तो शाम तक पता चला कि निलामी उंची चढाई चढते हुए मुंबई इंडियंस की टीम में तीन करोड़ 20 लाख तक पहुंच गए. दोस्तों ने बताया तो नाथू सिंह को यकीन तक नही हुआ. नाथू सिंह कहते हैं कि खिलाड़ियों के आक्शन के समय में इतना नर्वस था कि दिन भर एक दोस्त के घर में बंद रहा. कुल 351 खिलाड़ी थे आक्शन में लेकिन जब रायल चैलेंजर बेंगलूर ने दस लाख में मुझे खरीदने के लिए बोली लगाई तो खुशी का ठिकाना नही रहा. मुझे तो तीन करोड़ 20 लाख याद हीं नही है अभी तक वो दस लाख हीं जहन में बसा है.

नाथू सिंह से के एक छोटे से कमरे में एक खाट आ सकती है और उसी में सोते हैं बगल के रैक पर सफलता के पदक रखते हैं. बीते दिनों को याद करते हैं कि दूसरे सीनियर खिलाड़ियों के सेकेंड हैंड किट और स्पाईक खरीद कर अपना काम चलाता था. लेकिन मन में विश्वास था कि एक दिन मैं टीम इंडिया के लिए खेलूंगा. ये सफलता मेरे लिए बड़ी है लेकिन मैं तभई खुद को सफल कहूंगा जब टीम इंडिया के लिए खेलूं.

पिता भरत सिंह कहते थे कि मैं तो अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा 12 हजार रुपए कमाए हैं मैं नही चाहता था कि क्रिकेट खेले क्योंकि मेरे पास पैसे नही है मैं तो दो-दो शिफ्ट कर बारह-बारह-सोलह-सोलह घंटे काम करता था. लेकिन रिश्तेदारों के कहने पर हुआ. लेकिन आज बेहद खुश हैं. घूंघट के अंदर से मां सरोज कंवर कहती है कि बहुत खुशी है बेटा बड़ा आदमी बन गया. इसके लिए इन्होने भी बेहद संघर्ष किया है.

पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली के खिलाफ अपने पहले हीं रणजी में दिल्ली के खिलाफ 6 विकेट लेकर नाथू सिंह ने सबको चौंका दिया था. गौतम गंभीर ने भी आउट होने बाद कहा था कि लड़के में दम है. आईपीएल के इस नौवें संस्करण के में कुल 138 करोड़ की बोली लगी थी. और नाथू के लिए रायल चैलेंजर बैंगलूर, दिल्ली डेयर डेविल्स और मुंबई इंडिंयंस ने बोली लगाई थी.

पिछले सात सालों से पत्रकारिता से जुड़ी हूं. व्यक्तिगत सफलता और सामाजिक बदलाव की कहानियां लिखती हूं जिसका मकसद समाज और देश में बदलाव लाना रहता है. राजस्थान से प्रकाशित पाक्षिक Changing Tomorrow अखबार के हिंदी पृष्ठ पर दो साल से नियमित तौर पर सामाजिक सरोकार से जुड़ी कहानियां लोगों तक पहुंचाती हूं. राजस्थान में आमलोग और खासकर महिलाएं अपनी तरह से विकास और बदलाव के के नए आयाम लिख रहे हैं इनकी कहानियां लोगों के प्रेरणा देने और संघर्ष के लिए हौसला देने का काम करती है और मेरी कोशिश होती है कि ये कहानियां कभी भी अनकही ना रहे.

Stories by Rimpi kumari