कॉमेडी के उस बादशाह की कहानी जिनकी रहमदिली का एहसान अमिताभ बच्चन आज भी मानते हैं

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महमूद बहुत ही लोकप्रिय भारतीय अभिनेता, निर्देशक, गायक और निर्माता थे। बहुत कुछ ऐसा है जो बहुत से लोगों को उनके बारे में ज्यादा नहीं पता है। वो शायद ही कभी प्रमुख भूमिका निभाते हुए दिखे लेकिन वो सही मायनों में एक सुपर स्टार थे। उनके नाम से ही निर्माताओं को फिल्म के अधिक टिकट बिकने का विश्वास हो जाता था।

साभार: सोशल मीडिया
साभार: सोशल मीडिया
अमिताभ बच्चन के संघर्ष के दौर में, जब उनके पास रहने का कोई स्थान नहीं था, तो महमूद ने उन्हें अपने घर में एक कमरा दिया था और अपनी फिल्म बॉम्बे टू गोआ में काम भी दिया। इस फिल्म में अभिताभ द्वारा निभाए गए रवि के किरदार को देखने के बाद निर्देशक ने अभिताभी की पहली सुपरहिट फिल्म 'जंजीर' में उन्हें काम दिया था।

ऐसा कहा जाता है कि उनके समय के कुछ बड़े स्टार उनके साथ स्क्रीन स्थान साझा करने में असुरक्षित महसूस करते थे, उनको लगता था कि वो कितने भी लटके-झटके कर लें, महमूद अपनी निर्मल कॉमेडी से सारी लाइमलाइट चुरा ले जाएंगे। 

महमूद एक बहुत ही लोकप्रिय भारतीय अभिनेता, निर्देशक, गायक और निर्माता थे। बहुत कुछ ऐसा है जो बहुत से लोगों को उनके बारे में ज्यादा नहीं पता है। वो शायद ही कभी प्रमुख भूमिका निभाते हुए दिखे लेकिन वो सही मायनों में एक सुपर स्टार थे। उनके नाम से ही निर्माताओं को फिल्म के अधिक टिकट बिकने का विश्वास हो जाता था। और फिल्म के पोस्टर पर उनकी तस्वीर ही यह सुनिश्चित कर देती थी कि थिएटरों में भीड़ बढ़ने वाली है। उन्होंने दिल खोलकर नाचा, गाने गाया और अभिनय किया।

ऐसा कहा जाता है कि उनके समय के कुछ बड़े स्टार उनके साथ स्क्रीन स्थान साझा करने में असुरक्षित महसूस करते थे, उनको लगता था कि वो कितने भी लटके-झटके कर लें, महमूद अपनी निर्मल कॉमेडी से सारी लाइमलाइट चुरा ले जाएंगे। उन्होंने न केवल एक हास्य अभिनेता के रूप में काम किया बल्कि 'कुंवारा बाप' और 'गिन्नी और जॉनी' जैसी फिल्मों में अपनीसंवेदनशील और गंभीर अभिनय क्षमता से दर्शकों की आंखों को भिगो भी गए। जाहिरन तौर पर उनकी इन फिल्मों की अत्यधिक सराहना हुई।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

अमिताभ बच्चन के संघर्ष के दौर में, जब उनके पास रहने का कोई स्थान नहीं था, तो महमूद ने उन्हें अपने घर में एक कमरा दिया था और अपनी फिल्म बॉम्बे टू गोआ में काम भी दिया। इस फिल्म में अभिताभ द्वारा निभाए गए रवि के किरदार को देखने के बाद निर्देशक ने अभिताभी की पहली सुपरहिट फिल्म 'जंजीर' में उन्हें काम दिया था। साठ के दशक में मगमूद साहब के जलवे ही जलवे थे। कैमरे के सामने वो इतने सहज रहते थे कि कभी-कभी ऐसा लगता था जैसे वह भूल ही गए हों कि कैमरे के सामने हैं। एक समय था जब बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए फिल्म में उनकी उपस्थिति जरूरी थी। वह उन कुछ कॉमेडियनों में से एक हैं जो बॉक्स ऑफिस के हिट देने में कामयाब रहे और कुछ फिल्में तो उनके कंधे पर पूरी तरह से सवार होकर भागती हैं। 

यहां पर उनकी कुछ शानदार फिल्मों का विवरण दिया जा रहा है,

पड़ोसन (1968)

महमूद पड़ोसन के सह-निर्माता थे, जिसमें उन्होंने बिंदू (सायरा बानो) के संगीक मास्टर की भूमिका निभाई थी। बिन्दु को रिझाने के लिए मास्टरजी भोला (सुनील दत्त) के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और भोला के मित्र गुरु विद्यापाती (किशोर कुमार) से भी निपटते हैं। एक तरफ महमूद दूसरी तरफ भोला।

भूत बंग्ला (1965)

महमूद दो शैलियों, कॉमेडी और हॉरर का गठबंधन करना चाहते थे। एक बार स्क्रिप्ट तैयार हो जाने के बाद, उन्होंने इसके निर्माण और अभिनय करने का निर्णय लिया। एक प्रेतवाधित घर के अंदर एक हत्या का रहस्य रखा गया। डर और आश्चर्य के तिलिस्म में उलझाए रखने के बावजूद फिल्म में महमूद ने अद्भुत कॉमिक टाइमिंग के साथ लोगों को एक हार्दिक हंसी भी दी।

गोआ (1965)

किसी फिल्म में महमूद और आई एस जोहर को क्रांतिकारियों के रूप में कल्पना कीजिए, जो पुर्तगाली शासन में गोवा राज्य विरोधी गतिविधियों को क्रियान्वित करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने पुर्तगाल के बैंक को लूट लिया, एक अभिमानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सबक सिखाया, अपने घर को आग लगा दिया और इस नाटक में डकैत के साथ हाथ मिला लिया। और यह सब बॉलीवुड की फेवरेट थ्योरी में से एक दो भाइयों में से एक को गुम जाने की साजिश से शुरू होता है जिसमें दोनों भाइयों का बाद में मिलन हो जाता है। इस फिल्म को देखने के बाद लगता है कि क्रांति कभी इससे ज्यादा मजेदार नहीं थी।

प्यार किये जा (1966)

शशि कपूर, किशोर कुमार, महमूद और मुमताज जैसे अभिनेताओं के साथ इस फिल्म की स्टार-कास्ट एक बड़ी ट्रीट की तरह थी। यह तमिल कॉमेडी काधाल्लिका नेरामिल्लाई की रीमेक थी। महमूद को इस शानदार कॉमिक टाइमिंग के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉमेडियन के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। जिस दृश्य में महमूद ने अपनी स्क्रिप्ट को डरावनी ध्वनि प्रभावों के साथ ओम प्रकाश के साथ वह अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक माना जाता है।

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IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

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