भारत बन सकता है डिजिटल उपनिवेश : मोहनदास पई

पई ने चीन और अमेरिका द्वारा बड़े पैमाने पर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में पूंजी निवेश को लेकर किया आगाह।

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शीर्ष भारतीय निवेशक तथा शिक्षाविद् मोहनदास पई ने चीन और अमेरिका द्वारा बड़े पैमाने पर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में पूंजी निवेश को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा है कि जब तक भारतीय कंपनियां इसमें निवेश नहीं करती हैं, देश डिजिटल उपनिवेश बन सकता है। अगर आप डिजिटल क्रांति से चूकते हैं, हमारी बड़ी कंपनियां चीनी पूंजी द्वारा नियंत्रित होगी जो काफी खतरनाक है।

मोहनदास पई
मोहनदास पई

अमेरिका तथा चीन द्वारा भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर निवेश के संभावित परिणाम का जिक्र करते हुए मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन के चेयरमैन मोहनदास पई ने आगाह करते हुए कहा है, कि भारत डिजिटल उपनिवेश बन सकता है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका तथा चीन के बीच डिजिटल रूप से दबदबे को लेकर लड़ाई हैं। और जहां भारतीय पूंजी है, वे कैलीफोर्निया में जमीन-जायदाद खरीद रहे हैं। अगर आप डिजिटल क्रांति से चूकते हैं, तो हमारी बड़ी कंपनियां चीनी पूंजी द्वारा नियंत्रित होगी जो काफी खतरनाक है।’

दुनिया की  तीसरे सबसे बड़े 'स्टार्टअप इको सिस्टम' वाले देश भारत ने 8-10 अरब डॉलर की पूंजी प्राप्त की है, जिसमें से भारतीय पूंजी मात्र 50 करोड़ डॉलर है। 

साथ ही उन्होंने यह भी कहा, कि 'भारतीय पूंजी बिना कुछ नया पैदा किए ही अपना हिस्सा चाहती है।' उन्होंने भारतीय पूंजीपतियों से धन के निवेश के संदर्भ में इस रूख में बदलाव लाने को कहा।

उधर दूसरी तरफ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) शुरुआती स्तर के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने पर विचार कर रहा है। नियामक की योजना उद्यम पूंजी उपक्रमों के लिए न्यूनतम एंजल कोष निवेश को मौजूदा के 50 लाख रुपये से कम कर 25 लाख रुपये करने की है। सेबी संभवत: अपने निवेश योग्य कोष का 25 प्रतिशत तक एंजल कोषों को विदेशी निवेश के रूप में करने की अनुमति दे सकता है। यह कुछ वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) की दर्ज पर होगा। सूत्रों ने कहा कि इससे कोषों को विभिन्न क्षेत्रों में अपने जोखिम को बांटने में मदद मिलेगी।

कई इस तरह के स्टार्टअप्स हैं जिन्हें शुरुआत में अनुमोदन के लिए कम राशि की जरूरत होती है। ऐसे में इस सीमा को घटाकर 25 लाख रुपये करने से इस तरह की कंपनियों को फायदा होगा।

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