इस्लामिक देश सऊदी अरब में महिलाएं भी अब चला सकेंगी कार

सऊदी अरब ने महिलाओं को दी ड्राइव करने की अनुमति...

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सऊदी में महिलाओं पर कई तरह की बंदिशें लागू हैं। वहां की महिलाओं को पासपोर्ट, वीजा और बैंक में खाता खुलवाने जैसे कामों के लिए पुरुषों की इजाजत लेनी होती है।

सांकेतिक तस्वीर (साभार- सोशल मीडिया)
सांकेतिक तस्वीर (साभार- सोशल मीडिया)
सऊदी के शासक सलमान बिन के शाही आदेश में आदेश को सही तरीके से लागू करने के लिए उच्चस्तरीय मंत्री स्तर की कमिटी का गठन करने कहा गया है। 

सऊदी अरब के धार्मिक प्रतिनिधियों के मुताबिक ड्राइविंग करने वाली महिलाएं सामाजिक मूल्यों का उल्लंघन करती हैं। इसके पहले कार न चलाने देने के पीछे वहां के लोगों का तर्क था कि इससे महिलाओं के अंडाशय पर बुरा असर पड़ता है।

महिलाओं को पुरुषों से कमतर समझने वाले इस्लामिक देश सऊदी अरब में आखिरकार महिलाओं को कार चलाने का मौका मिलने ही वाला है। सऊदी के शासक सऊदी अरब के शासक सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सौद ने देश में महिलाओं को ड्राइविंग करने की इजाजत दे दी है। गौरतलब है कि सऊदी अरब दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जहां महिलाएं ड्राइव नहीं कर सकती थीं। महिलाओं और पुरुषों के लिए एक जैसे ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के सउदी सरकार के फैसले की अमेरिका, ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने सराहना की है। इस फैसले के बाद बहुत जल्द महिलाएं कार चलाती हुई दिखेंगी।

आपको जानकर हैरानी होगी कि सऊदी दुनिया का आखिरी देश होगा जहां महिलाओं को कार चलाने की इजाजत मिली है। सऊदी के शासक सलमान बिन के शाही आदेश में आदेश को सही तरीके से लागू करने के लिए उच्चस्तरीय मंत्री स्तर की कमिटी का गठन करने कहा गया है। यह कमिटी 30 दिन के अंदर सुझाव पेश करेगी और जून 2018 तक इस आदेश को लागू किया जाएगा। आदेश में कहा गया है कि यह शरीयत के मानकों के अनुसार होगा। सऊदी अरब में महिलाओं को कार चलाने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है, लेकिन धार्मिक मान्यताएं इनका समर्थन नहीं करतीं। सऊदी अरब के धार्मिक प्रतिनिधियों के मुताबिक ड्राइविंग करने वाली महिलाएं सामाजिक मूल्यों का उल्लंघन करती हैं।

इसके पहले कार न चलाने देने के पीछे वहां के लोगों का तर्क था कि इससे महिलाओं के अंडाशय पर बुरा असर पड़ता है। पिछले ही हफ्ते सऊदी के एक धार्मिक नेता ने कहा था कि महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उनके पास पुरुषों के मुकाबले एक चौथाई दिमाग होता है। सऊदी में महिलाओं पर कई तरह की बंदिशें लागू हैं। वहां की महिलाओं को पासपोर्ट, वीजा और बैंक में खाता खुलवाने जैसे कामों के लिए पुरुषों की इजाजत लेनी होती है। वहां के सरकारी कार्यालयों में महिलाओं के लिए अलग एंट्री गेट्स होते हैं और पुरुषों को पता ही नहीं होता है कि महिलाओं से कैसे बात करनी है। यही वजह है जिससे गाड़ी चलाने संबंधी नए आदेश को लागू करने में कई सारी दिक्कतें भी आ सकती हैं।

वहीं नए आदेश के बारे में सऊदी के विदेश मंत्रालय ने ट्विटर पर इसकी घोषणा करते लिखा, 'सऊदी अरब ने महिलाओं को ड्राइव करने की अनुमति दे दी है।' यह आदेश अगले साल 23 या 24 जून से इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से लागू कर दिया जाएगा। सऊदी अरब की गिनती कट्टरपंथी देश के तौर पर होती है, जहां महिलाओं के लिए पाबंदियां बहुत ज्यादा और सख्त हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, 'यह सऊदी अरब को सही दिशा में ले जाने के लिए बड़ा कदम है।'

सऊदी की महिलाओं को जिम और स्विमिंग पूल में भी जाने की इजाजत नहीं होती है। वहां कानूनी तौर पर 1990 से महिलाओं के गाड़ी चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन वहां की कुछ महिलाओं ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया और सड़क पर गाड़ी चलाई। इसके कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। इस विरोध को 'वीमेन टू ड्राइव मूवमेंट' का नाम दिया था। सऊदी की महिलाओं को इतना कमतर माना जाता है कि वहां कोर्ट की सुनवाई में एक पुरुष का बयान दो महिलाओं के बयान के बराबर होता है। ऐसे देश में जहां महिलाएं पुरुषों के हाथ की कठपुतली हैं वहां महिलाओं को गाड़ी चलाने जैसा अधिकार मिलना भी बहुत मायने रखता है।  

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