स्विट्जरलैंड में हैप्पी बर्थ डे मिस्टर खिलाड़ी

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फिल्म जगत में हर फन मौला जैसे अपनी तरह के बेजोड़ अभिनेता अक्षय कुमार का आज 50वां जन्मदिन है। अपने दम पर बॉलीवुड में शिखर पर पहुंचे मिस्टर खिलाड़ी आज स्विट्जरलैंड में अपना जन्मदिन मना रहे हैं। अक्षय कुमार अपने फिल्मी सफर से जमाने को एक सबसे बड़ा संदेश यह देते हैं कि अपनी मेहनत की बूते कोई भी शख्स फर्श से अर्श तक पहुंच सकता है। आज का मोकाम हासिल करने के लिए उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में तमाम ठोकरों का सामना करना पड़ा है। सितारों की दुनिया में वह जितने चर्चित अपने भांति-भांति के रोमांस को लेकर रहे, उससे ज्यादा अपनी मेहनत-मशक्कत के लिए।

अक्षय कुमार बॉलीवुड के उन तमाम एक्टर्स में से एक हैं, जिन्होंने बिना किसी गॉड फादर के फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक खास पहचान बनाई और आज के दौर में यदि उन्हें कामयाब हिरोज़ की श्रेणी में रखा जाये तो ये अतिश्योक्ति नहीं होगी। वह आज भी अपनी सभी फिल्मों को सिर्फ अपने दम पर हिट करवाने का माद्दा रखते हैं। 

पॉपुलर होने से पहले अक्षय कुमार ने 1987 में महेश भट्ट की फिल्म 'आज' में एक मार्शल आर्ट इंस्ट्रक्टर का रोल प्ले किया था। उस फिल्म में उनका चेहरा नहीं दिखाया गया, लेकिन उस फिल्म में उनका नाम अक्षय था। अक्षय तब राजीव भाटिया से अक्षय कुमार नहीं हुए थे और इसी फिल्म के नाम को लेकर आगे चलकर उन्होंने अपना अॉनस्क्रीन नाम अक्षय कुमार रख लिया। 

पंजाब के अमृतसर में जन्मे अक्षय कुमार का नाम उनके माता-पिता ने राजीव भाटिया रखा था। पिता सरकारी नौकरी में थे। बचपन दिल्ली में बीता। शुरू से ही खिलाड़ी-खिलंदड़ स्वभाव के अक्षय बनना तो फौजी चाहते थे लेकिन मार्शल आर्ट सीखने एक दिन बैंकॉक पहुंचे और वहीं वेटर की नौकरी करने लगे। कभी खाना बनाया तो कभी कार्ड बेचने लगे। बीच में बांग्लादेश की ओर कूच कर गए। कोलकाता में ट्रेवल एजेंसी का काम किया। चलते-चलाते 'कुंदन' के आभूषणों की तिजारत करते हुए मुंबई की ओर चल पड़े। अटकते-भटकते काम की तलाश में फिल्मी छायाकार जयेश के लाइट-कैमरे ढोने लगे, लेकिन किस्मत का दरवाजा तो खोला गोविंदा ने। टिप्स मिला कि चल, तू भी हीरो हो जा यार। और उनके करियर की राह चल निकली लेकिन हीरो होने के लिए पढ़ाई करनी पड़ी। पहली बार वर्ष 1987 में उनको महेश भट्ट की फिल्म 'आज' में चांस मिला मगर उसमें किरदारी रत्तीभर, महज सात सेकंड का रोल।

उन दिनो अक्षय कुमार के हीरो होने की मंजिल अभी काफी दूर थी। सबसे खास बात ये रही कि उसी वक्त से उन्होंने अपना नाम राजीव भाटिया से बदलकर अक्षय कुमार रख लिया। उसके बाद तो उनके जीवन में एक दिन ऐसा भी आया, जब एक साथ तीन फिल्मों में काम का ऑफर मिला। वर्ष 1991 में उन्हें पहली बार फिल्म 'सौगंध' में हीरो का रोल मिला और पहली सुपरहिट फिल्म रही 'खिलाड़ी', और वहीं से दौड़ पड़ी उनके फिल्मी करियर की तेज रफ्तार गाड़ी। फिर तो बचपन का खेल-खिलंदड़ दे दनादन शोहरत की बुलंदियं छूने लगा- 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी', 'मोहरा', 'सबसे बड़ा खिलाड़ी', 'मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी', 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' उनके करोड़ों चाहने वालों की दिलों पर छा गईं। 

मिस्टर खिलाड़ी अपने फिल्मी सफर से जमाने को एक सबसे बड़ा संदेश यह देते हैं कि अपनी मेहनत की बूते कोई भी व्यक्ति फर्श से अर्श पर पहुंच सकता है।

अक्षय कुमार सिर्फ हीरो ही नहीं, निजी जिंदगी में रोमांटिक किस्से-कहानियों के भी बेजोड़ तीरंदाज रहे हैं। उनके तमाम हीरोइनों से अफेयर रहे। वह अपनी गर्लफ्रेंड को भरोसे में लेने के लिए तुरंत उससे सगाई रचाने के साथ ही सिद्ध विनायक मंदिर ले जाया करते थे। बाद में उनके रोमेंटिक रिश्तों की चर्चाएं पूजा बत्रा, आयशा जुल्का, शिल्पा शेट्टी, रवीना टंडन आदि के साथ जुड़ीं। आखिरकार जिंदगी में आईं राजेश खन्ना और डिंपल कपाडिया की बेटी ट्विंकल खन्ना। बाकी अभिनेत्रियों की तरह ट्विंकल को भी वह कामचलाऊ रिश्ता मानकर चल रहे थे लेकिन इस बार रस्सी गले का सांप बन गई। वह फंस गए। निकल लेना चाहे लेकिन डिंपल कपाडिया ने एक न सुनी, बेटी की जीवन की डोर पूरी तरह उनके साथ बांधकर ही दम लिया। आज ट्विंकल और दो बच्चों के साथ उनकी पारिवारिक खुशियां सलामत हैं। हालांकि इन सब बातों को हंस कर ही टाल देना चाहिए, क्योंकि अक्षय कुमार एक जिम्मेदार पति और पिता होने के साथ-साथ जिम्मेदार बेटे और दामाद भी हैं।

फिल्म इंडस्ट्री में ऊंचा मोकाम हासिल करने के लिए अक्षय कुमार को काफी पापड़ बेलने पड़े हैं। वह यूं ही नहीं शिखर पर पहुंच गए। सितंबर 1999 में प्रीति जिंटा के साथ उनकी क्राइम साइकोलॉजी पर बनी सुपरहिट फिल्म 'संघर्ष' आई थी। अब तो फिल्म 'रुस्तम' के लिए 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के खिताब से भी उन्हे नवाजा जा चुका है। मिस्टर खिलाड़ी अपने फिल्मी सफर से जमाने को एक सबसे बड़ा संदेश यह देते हैं कि अपनी मेहनत के बूते कोई भी व्यक्ति फर्श से अर्श पर पहुंच सकता है।

अक्षय को फिल्म इंडस्ट्री में तमाम ठोकरों का सामना करना पड़ा है। सितारों की दुनिया में वह जितने चर्चित अपने भांति-भांति के रोमांस को लेकर रहे, उससे ज्यादा अपनी मेहनत-मशक्कत के लिए। अब तो उनके सितारे बुलंदी पर हैं। हर साल मिस्टर खिलाड़ी की फिल्में हिट हो रही हैं, जिनमें 'एयरलिफ्ट', 'बेबी', 'हॉलीडे', 'सिंह इज किंग', 'सिंह इज ब्लिंग', 'ब्रदर्स', 'गरम मसाला', 'हेरा फेरी', 'फिर हेरा फेरी', 'आवारा पागल दीवाना', 'मुझसे शादी करोगी', 'टॉलेटः एक प्रेम कथा', 'जॉली एलएलबी', 'रुस्तम', 'हाउसफुल' आदि के नाम लिए जा सकते हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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