मदद चाहती है हव्वा की बेटी

28 मई 2017 को रामपुर जिले में अपने दोस्त के साथ घूमने गई दो लड़कियों से सरेराह छेड़छाड़ और अश्लीलता का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वॉयरल कर दिया। इसके बाद पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन छेड़छाड़, गिफ्तारी और उसके बाद कुछ नहीं। इन्हीं सब पर प्रकाश डालती एक रिपोर्ट...

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12 मई 2017 को कानपुर जिले में रहने वाली एक किशोरी का आरोप है कि जीजा ने उसे नशीली चाय पिलाकर अपने भाई के साथ मिलकर बारी-बारी से कई दिनों तक बंधक बनाकर सामूहिक बलात्कार किया। 15 मई 2017 को हरदोई जिले के कोतवाली बेनीगंज क्षेत्र के एक गांव में घर में मां के साथ सो रही एक किशोरी को तमंचे के बल पर घर से उठाकर बाग में ले जाकर चार दिन तक सामूहिक दुष्कर्म किये जाने का मामला सामने आया है। वहीं 25 मई 2017 को ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में हाइवे पर 4 गैंगरेप महिलाओं के साथ गैंगरेप की वारदात हुई। इस दौरान बदमाशों ने विरोध करने पर एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी। 25 मई 2017 को झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 16 वर्षीय हाईस्कूल की छात्रा नेहा (नाम काल्पनिक) ने चार युवकों पर अपहरण के बाद गैंगरेप का आरोप लगाया। 25 मई 2017 को बाराबंकी जिले के जैदपुर थाना क्षेत्र में जमीन के विवाद में दो पक्षों में जमकर मारपीट के दौरान में एक किशोरी के साथ दरिंदगी की घटना हुई। हर दिन अखबार के पन्ने इस तरह की खबरों से पटे पड़े रहते हैं... लेकिन क्यों? कैसे दूर होगी ये समस्या?

देश में औरत की अस्मत फिर बदमाशों के निशाने पर है। रामपुर के शोहदों द्वारा राह चलती लड़कियों को खुलेआम घेर कर छेड़ते और यौन हिंसा को अंजाम देता एक विडियो, डिजिटल जगत की नयी सनसनी सोशल मीडिया पर जोरदारी से वायरल हो रहा है। इसमें खास बात ये है कि इसको वायरल करने वाले भी वही जाबांज हैं जिन बहादुरों ने यौन हिंसा के कुकृत्य को अंजाम दिया है।

जिला रामपुर के पुलिस अधीक्षक के अनुसार कुछ लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं शेष की तलाश जारी है। लेकिन क्या मसला सिर्फ इतना ही है, कि दोषियों को देर-सबेर छोटी कामचलाऊ धाराओं में निरुद्ध कर दण्डित कर दिया जाए? क्या मामला उस दुस्साहस का नहीं है जो खुलेआम सरेराह औरत की अस्मत से खिलवाड़ करने के काम को बेखौफ अंजाम ही नहीं देता बल्कि बाकायदा दुनिया को दिखाने के लिए विडियो बना कर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी करता है।

औरतों के साथ हो रही इस तरह की घटनाएं सामान्य नहीं हैं, बल्कि ये संकेत है संस्कारों के मजबूत तटबंधों के दरकते किनारों से लम्पटई और शोहदई की छिछलन के रिसाव का, जो आने वाले वक्त में एक बाढ़ की शक्ल में महिला सुरक्षा के तमाम बैरियरों को अपने प्रवाह में बहा ले जाने की आशंका को पुख्ता करता है। क्या ये सामाजिक व्यवस्था की पराजय नहीं है। सवाल यह है कि इन लम्पटों को रोकने के लिये वैधानिक रूप से जिम्मेदार पुलिस तंत्र का इकबाल क्या भूसा गाड़ी के पीछे-पीछे दौडऩे में खत्म हो गया है। क्या अब हम मध्यकालीन युग के उस दौर में प्रवेश करने की तैयारी में लग चुके हैं जहां महिलाएं या तो घर की चारदीवारी में रहती थीं अथवा जन्म लेते की कत्ल कर दी जातीं थीं। लेकिन नागरिकों से ऐसे असुरक्षित उ.प्र. का तो वायदा नहीं किया गया था। महिला सुरक्षा में लगती सेंध इस बात की दलील है कि उ.प्र. में सरकार बदली है औरत के बारे में नजरिया नहीं, मुख्यमंत्री नया है किंतु पुलिस अब भी पुरानी है। उ.प्र. में महिला सुरक्षा की तस्वीर आज भी डीजीपी कार्यालय के सामने किसी पेड़ पर एक औरत की लाश की शक्ल में क्षत-विक्षत, उल्टा टंगी दिखाई पड़ रही है। दीगर है कि स्त्री सुरक्षा के मोर्चे पर उ.प्र.सरकार हांफती हुई नजर आ रही है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि राजधानी के सबसे सुरक्षित क्षेत्र तक में स्त्री के साथ संगीन वारदात को अंजाम देने में गुरेज नहीं कर रहे हैं। पिछले 24 घंटे में हुई घटनाओं पर गौर करें तो हालात की मौजूदा तस्वीर खुद-ब-खुद चीखने लगती है।

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जालौन जिले के कुठौंद थाना क्षेत्र के ग्राम निनावली कोठी में एक 7 साल की मासूम के साथ गैंगरेप की घटना प्रकाश में आई है। आरोप है जब बच्ची घर के बाहर अपने पिता के साथ सो रही थी तभी कुछ लोगों ने उसका मुंह दबाकर उठा लिया। बच्ची के साथ 3 लोगों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। वहीं ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के रोशनपुर गांव ने एक नाबालिग से दो युवकों ने की रेप की कोशिश की। लखनऊ जिले के बंथरा इलाके मेें घर में मौजूद किशोरी को अकेला पाकर पड़ोसी युवकों ने उसके साथ दुराचार करने की कोशिश की। लेकिन मौके पर पहुंचीं किशोरी की चाची के शोर मचाने पर दोनो आरोपी वहां से भाग निकले। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। 12 मई 2017 को कानपुर जिले में रहने वाली एक किशोरी का आरोप है कि जीजा ने उसे नशीली चाय पिलाकर अपने भाई के साथ मिलकर बारी-बारी से कई दिनों तक बंधक बनाकर सामूहिक बलात्कार किया। 15 मई 2017 को हरदोई जिले के कोतवाली बेनीगंज क्षेत्र के एक गांव में घर में मां के साथ सो रही एक किशोरी को तमंचे के बल पर घर से उठाकर बाग में ले जाकर चार दिन तक सामूहिक दुष्कर्म किये जाने का मामला सामने आया है। वहीं 25 मई 2017 को ग्रेटर नोएडा के जेवर थाना क्षेत्र में हाइवे पर 4 गैंगरेप महिलाओं के साथ गैंगरेप की वारदात हुई। इस दौरान बदमाशों ने विरोध करने पर एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी। 25 मई 2017 को झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 16 वर्षीय हाईस्कूल की छात्रा नेहा (नाम काल्पनिक) ने चार युवकों पर अपहरण के बाद गैंगरेप का आरोप लगाया। 25 मई 2017 को बाराबंकी जिले के जैदपुर थाना क्षेत्र में जमीन के विवाद में दो पक्षों में जमकर मारपीट के दौरान में एक किशोरी के साथ दरिंदगी की घटना हुई।

ताजा मामला रामपुर जिले का है। 28 मई 2017 को रामपुर जिले में अपने दोस्त के साथ घूमने गई दो लड़कियों से सरेराह छेड़छाड़ और अश्लीलता का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वॉयरल हुआ। इसके बाद पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर करीब एक दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 30 मई 2017 को फिर से रामपुर जिले में फिर एक युवती को परचून की दुकान पर छेड़छाड़ के बाद सरेराह रास्ते से अपहरण कर जंगल में खींचकर रेप की कोशिश का मामला प्रकाश में आया है।

ये तो वे आंकड़े हैं, जो पीड़िता की हिम्मत के कारण पुलिस अभिलेखों में दर्ज हैं अन्यथा बहुतायत मामले या तो मर्यादा के नाम पर दम तोड़ देते हैं या पीड़िता थाने की दहलीज तक जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाती है। व्यवस्था के चलन के मुताबकि दर्द, आंसू, कराह, बदनामी, ताने, तिजारत, प्रलोभन और धमकियों के तेजाबी सैलाब को पार करने का माद्दा हो तो महिला इंसाफ का बारे में सोचे वरना हादसा या बुरा ख्वाब समझ लेने में ही भलाई है। क्योंकि बलात्कार समेत महिलाओं के यौन उत्पीडऩ के मामलों पर विधि एवं न्याय मंत्रालय से मिले आंकड़ों पर नजर डाले तो 23 राज्यों के उच्च न्यायालयों में लंबित 32080 मामलों में सबसे ज्यादा 8215 रेप के मामले इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित हैं। जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में बलात्कार के मामलों पर निर्णय आने की स्थिति अत्यंत दयनीय हैं, यहां पर भी सर्वाधिक 15,926 मामले उत्तर प्रदेश की अदालतों में अटके पड़े हैं।

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हमारे सूबे की अदालते भी अन्याय कर रही हैं। कचहरी जहां के बारे में कहा जाता है कि, कचेहरी तो बेवा का तन देखती है, कहां से खुलेगा बटन देखती है, पुलिस थाना जहां दुराचार पीड़िता का निगाहों से ही कई बार बलात्कार हो जाता है और समाज, जिसकी मर्दानगी के किस्से एनसीआरबी के आंकड़ों में दर्ज हैं, उसके बरक्स इंसाफ की कांपती लौ सुव्यवस्थित अव्यवस्था के थपेड़ों के दरम्यान हव्वा की बेटियों को इंसाफ कैसे दिला पायेगी, यही सवाल उत्तम प्रदेश की बुनियाद की कसौटी है।

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लेखक / पत्रकार

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