मुखर बयानों और बेबाक राय ने रघुराम को बनाया था  ‘रॉकस्टार राजन’

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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर पद पर रघुराम राजन का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही इस केंद्रीय बैंक के अब तक के सबसे मुखर प्रमुख की विदाई हो गई है। अपने तीन साल के कार्यकाल में राजन नीतिगत मोर्चे पर अपनी नीतियों के साथ साथ दूसरे मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के कारण कई बार उतने ही विवादों में भी रहे।

‘मेरा नाम राजन है और मैं वही करता हूं जो मुझे करना होता है’ जैसे जुमले और देश में बढ़ती ‘असहिष्णुता’ जैसे मुद्दों पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के साथ इस तीन साल के कार्यकाल में राजन ने जितने दोस्त कमाए उतने ही दुश्मन :नीतिगत मोर्चे पर: भी बनाए।

कालेज में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के लिए अर्थशास्त्र को छोड़ने वाले राजन को चाहने वालों ने ‘रॉकस्टार राजन’ तथा ‘बांड आफ द मिंट स्ट्रीट’ कहकर बुलाया तो विरोधियों ने उनकी देशभक्ति पर सवाल खड़े किए।

53 साल के राजन का तीन साल का कार्यकाल आज यानी चार सितंबर को पूरा हो गया। हाल ही के वष्रों में किसी भी गवर्नर के लिए यह सबसे छोटा कार्यकाल रहा है। जाते जाते उन्होंने कह भी दिया कि ‘अधूरे काम को पूरा करने के लिए वे कुछ और समय तक इस पद पर बने रहना चाहते थे लेकिन इस विस्तार के बारे में केंद्र सरकार के साथ उनका समझौता नहीं हो सका।’ इसके साथ ही राजन ने केंद्रीय बैंक के गवर्नर के रूप में अपनी आखिरी सार्वजनिक संबोधिन में रिजर्व बैंक की स्वायत्ता बनाए रखने की वकालत की ताकि वह जरूरत पड़ने पर सरकार को ‘ना’ कह सके।

राजन शिकागो यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर :वित्त: थे। जानकारों का कहना है कि वे अपने इस काम पर लौट सकते हैं और इस बीच कुछ और काम भी कर सकते हैं। इससे पहले वे आईएमएफ में मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके हैं। अपने छात्र जीवन में राजन दिल्ली के सेंट स्टीफन कालेज में अर्थशास्त्र की पढाई करना चाहते थे। रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में अपना आखिरी संबोधन उन्होंने इसी कालेज में दिया। हालांकि कई कारणों के चलते उन्होंने आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रिक्ल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

राजन के तीन साल के कार्यकाल की एक बड़ी उपलब्धि रपये की में स्थिरता है। चार सितंबर 2013 को जब राजन ने कार्यकाल ने कार्यभार संभाला था तो यह उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती थी। राजन रपये में स्थिरता लाने में सफल रहे और मुद्रास्फीति दर को भी घटाकर 6 प्रतिशत के दायरे मे ले आए।

राजन को 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट का पूर्वानुमान लगाने का श्रेय दिया जाता है। रिजर्व बैंक गवर्नर का पद छोड़ने से पहले सार्वजनिक तौर पर अपने आखिरी संबोधन में रघुराम राजन ने एक ऐसे मजबूत और स्वतंत्र रिजर्व बैंक की वकालत की जो कि वृहदआर्थिक स्थिरता की खातिर सरकार के शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों को ‘‘ना’’ कह सके।

राजन ने सेंट स्टीफन कालेज में ‘केन्द्रीय बैंक की स्वतंत्रता’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘केन्द्रीय बैंक को स्वतंत्र होना चाहिये और उसे आकषर्क दिखने वाले प्रस्तावों को ‘ना’ कहने में सक्षम होना चाहिये।’’ रिजर्व बैंक गर्वनर के रूप में अपने कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा कि उनके रहते भुगतान और बैंकिंग प्रणाली के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किये गये। मौद्रिक नीति संचालन, नकदी प्रबंधन, वित्तीय बाजारों, परेशानियों के निदान और खुद रिजर्व बैंक में बदलाव लाने के क्षेत्र में कई काम किये गये।

उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक गवर्नर के तौर पर यह उनका अंतिम सार्वजनिक भाषण है। उन्होंने कहा, ‘‘केवल समय ही बतायेगा कि ये सुधार कितने सफल रहे लेकिन मैंने बिना किसी डर और पक्षपात के अपनी तरफ से हर संभव बेहतर काम करने की कोशिश की है।’’

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