एक लड़की जिसे मोटा और भद्दा कहा गया, वो आज कार डिजाइन जैसे पुरुषप्रधान क्षेत्र में परचम लहरा रही है

0

महिलाएं लगातार इस दुनिया में बनाई गई 'मैनली प्रोफेशन' की अवधारणा को तोड़ रही हैं। लेकिन उनकी काबिलियत, मेहनत की प्रशंसा करने की बजाय हमारा समाज लगातार उन्हें हतोत्साहित करने में लगा रहता है। कभी तुम तो बहुत सॉफ्ट हो, कभी अरे तुम इतनी मर्दानी क्यों हो, कहकर उनको नकारने की कोशिश की जाती है। बावजूद इसके महिलाएं आगे बढ़ रही हैं, नित नए परचम लहरा रही हैं।

साभार: फेसबुक
साभार: फेसबुक
फराह मोलूभाई इसी कड़ी में अगला नाम हैं। फराह को उनके एथलीटिक बॉडी के कारण मोटा और भद्दा बोला गया लेकिन वो किसी भी घुड़की से नहीं डरीं।

पुरुष वर्चस्व वाले मोटर वाहन डिजाइनिंग क्षेत्र में फराह मोलूभाई नाम की महिला का सफर आपको अपने सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरणा देगा। अधिकांश पेशेवर स्थानों पर पुरुषों का वर्चस्व है, भले ही महिला समान रूप से कुशल या कड़ी मेहनत करने वाली हों। इसके बावजूद ये कहना असत्य होगा कि इन जगहों पर महिलाओं की कोई भागीदारी नहीं है। अल्प ही सही लेकिन उनका प्रतिनिधित्व वास्तविकता है।

महिलाएं लगातार इस दुनिया में बनाई गई 'मैनली प्रोफेशन' की अवधारणा को तोड़ रही हैं। लेकिन उनकी काबिलियत, मेहनत की प्रशंसा करने की बजाय हमारा समाज लगातार उन्हें हतोत्साहित करने में लगा रहता है। कभी तुम तो बहुत सॉफ्ट हो, कभी अरे तुम इतनी मर्दानी क्यों हो, कहकर उनको नकारने की कोशिश की जाती है। बावजूद इसके महिलाएं आगे बढ़ रही हैं, नित नए परचम लहरा रही हैं। फराह मोलूभाई इसी कड़ी में अगला नाम हैं। फराह को उनके एथलीटिक बॉडी के कारण मोटा और भद्दा बोला गया लेकिन वो किसी भी घुड़की से नहीं डरीं।

पुरुष वर्चस्व वाले मोटर वाहन डिजाइनिंग क्षेत्र में फराह मोलूभाई नाम की महिला का सफर आपको अपने सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरणा देगा। अधिकांश पेशेवर स्थानों पर पुरुषों का वर्चस्व है, भले ही महिला समान रूप से कुशल या कड़ी मेहनत करने वाली हों। इसके बावजूद ये कहना असत्य होगा कि इन जगहों पर महिलाओं की कोई भागीदारी नहीं है। अल्प ही सही लेकिन उनका प्रतिनिधित्व वास्तविकता है। मोटर वाहन डिजाइनर फराह मोलूभाई को एक औरत के रूप में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। फराह मुंबई की रहने वाली हैं। जब वह इसके लिए पढ़ रही थीं तो उनके पाठ्यक्रम में केवल तीन महिलाएं थीं।और 150 पुरुष थे। एक कार को हमेशा मेल डॉमिनेटिंग वस्तु माना जाता है। फराह इस सोच को बदलना चाहती हैं।

साभार: फेसबुक
साभार: फेसबुक

इस यात्रा के दौरान उनरी राह में कई चुनौतियां आईं। फराह की ये प्रेरक कहानी ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे ने अपने फेसबुक पेज पर साझा की है। फराह बताती हैं, डिजाइन की दुनिया में कई महिलाएं हैं, लेकिन मैं एक मोटर वाहन डिजाइनर हूं। जो एक पुरुष प्रभुत्व वाला उद्योग है। यहां तक कि जब मैं अध्ययन कर रही थी तब भी मेरे पाठ्यक्रम में 3 महिलाएं थीं और 150 पुरुष। लेकिन मैं अपनी पूरी कोशिश करती हूं, अपने काम को एन्जॉय करती हूं। और किसी को भी मुझे डाउन फील कराने की अनुमति नहीं देती। दरअसल मैं अपने प्रोजेक्ट्स में जो फेमिनिन टच देती हूं, वो वास्तव में मुझे लाभ देता है। ये कितनी हास्यास्पद बात है कि कार एक ऐसा उत्पाद है जो हर कोई इस्तेमाल करता है। महिलाएं भी कार में जाती हैं, पुरुष भी। फिर भी कार कंपनियों के लिए लक्षित दर्शक पुरुष है! मैं इसे बदलने के लिए एक मिशन पर हूं।

क्या कुछ ऐसे उदाहरण हैं जहां यह कठिन रहा है, इस सवाल के जवाब फराह बताती हैं, कई बार... मैंने तो गिनना ही छोड़ दिया है। मैं एक खिलाड़ी हूं। मेरे बड़े शारीरिक आकार के कारण, मुझे 'मोटा' कहा जाता है। लोगों ने मेरी पर्सनालिटी का मज़ाक उड़ाया और मुझे इसके लिए जज किया। मेरे जैसे पुरुष प्रभुत्व वाले उद्योग में काम करना, प्रोज और कॉन्स दोनों के साथ आता है। मेरे साथ ऐसे भी लोग हैं जो बहुत सम्मानजनक और सहयोगी हैं, लेकिन कई ऐसे होते हैं दो सिर्फ मुझे नीचा दिखाना चाहते हैं। मुझे अभी भी याद है, एक बार जब मैं एक ओपेन डिस्कशन में थी तो एक आदमी, जिसने एक बहुत ही प्रतिष्ठित कार फर्म के लिए काम किया, गलत फैक्ट्स के साथ बोले जा रहा था। वो बोल रहा था कि 'भारतीयों को रूसी कार डिजाइनरों से बेहतर होना चाहिए।' उसकी बात बिल्कल नॉन सेंस थी। कोई मतलब नहीं बन रहा था! दरअसल फैक्ट ये है कि भारत में कार उद्योग है, जबकि रूस ने ऐसा नहीं किया। इसलिए मैंने उस पर ध्यान दिया और कहा कि हमें प्रेरणा के लिए इतालवी या जर्मन कार उद्योग देखना चाहिए! खुद को करेक्ट करने की बजाय वो उल्टा मुझ पर ही चिल्लाने लगा।

साभार: फेसबुक
साभार: फेसबुक

वह कह रहा था, 'आप जानते हैं कि मैं कौन हूं?', आप जानते हैं कि मैं किसके लिए काम करता हूं?, आप कौन हैं? वो लगातार चिल्लाए जा रहा था। वो सैकड़ों लोगों के सामने मुझ पर भड़के जा रहा था। लेकिन मुझ पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। उस इंसान की कंपनी दो साल में बंद हो गई! नियति ने खुद ही उसे जवाब दे दिया। इसलिए जब मुझे ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां मुझे 'सिर्फ इसलिए कि मैं एक औरत हूं' नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मैं इसे मजे की चुटकी के साथ लेती हूं और खुद को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करती हूं।

आप लोगों को क्या सलाह देंगी, इस प्रश्न के उत्तर में फराह कहती हैं, रोज़ाना आप एक रचनात्मक, एक्टिव दिमाग के साथ जागते हैं तो यह एक जीत है। इसे सर्वश्रेष्ठ बनाओ। सबकुछ। सवाल करने से कभी न डरें, सीखते रहें। और सबसे महत्वपूर्ण बात, हर मौके को ग्रैब करने की सोचो, जिससे आप इसे एक सफलता की सीढ़ी बना सकते हैं!

ये भी पढ़ें: यूपी की शुभांगी ने रचा इतिहास, नेवी में होंगी पहली महिला पायलट

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Related Stories

Stories by yourstory हिन्दी