करना है ज़िंदगी में कुछ बड़ा, तो सीखें इन बड़े लोगों से बड़ी-बड़ी बातें

जिंदगी से लड़े तो जीते ये बड़े-बड़े लोग

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आइंस्टीन हों या बिल गेट्स, सचिन तेंदुलकर हों या अमिताभ बच्चन, इनकी सफलता का राज इनके संघर्षों में हैं। एप्पल सीईओ टिम कुक सुबह 4 बजे से ही अपने काम में जुट जाते हैं। विप्रो चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने 21 साल में ही पूरा कारोबार अपने हाथ में ले लिया था। कड़ी मेहनत के बूते ही विजय सेल्स को नीलेश गुप्ता ने और कभी आइसक्रीम बेचकर जिंदगी चलाने वाले धनबाद के उद्योगपति प्रदीप संथालिया आज सफलता के शिखर पर हैं। इन्हीं बड़े नामों से सीखते हुए आप भी बन सकते हैं बड़े, सिर्फ ज़रूरत है तो थोड़ी-सी मेहनत और कड़ी लगन की...

फोटो क्रेडिट: अनिषा तुलिका
फोटो क्रेडिट: अनिषा तुलिका
जीवन में तरक्की के लिए आय के अलग-अलग कई सोर्स डेवेलप करें, क्रिएटिविटी में हिस्सा लेते रहें, स्किल्स अपग्रेड करें, अपनी दिमागी मशक्कत में रिपोर्ट्स, जर्नल्स, मैगजीन्स, किताबों को भी शामिल करें।

यदि कोई सिर्फ टिप्स और नुस्खे आजमा कर उद्योगपति बन जाता, तो आज दुनिया में गरीब नहीं होते, फिर भी जान लेने में हर्ज क्या है कि कामयाब होने के लिए उद्योगपति रतन टाटा की तरह सुबह जल्दी उठकर अपने ई-मेल्स चेक करें, दिन का शेड्यूल बनाएं, एप्पल सीईओ टिम कुक की तरह भोर के चार बजे से ही ईमेल्स का जवाब देने लगें अथवा थॉमस जे स्टैनले की बातों पर ध्यान देते हुए अपनी टू-डू लिस्ट जरूर बनाएं और उसे हर वक्त अपडेट करें, अपने मोबाइल स्क्रीन पर रखें, ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलें, उनसे बातचीत में रुचि लें, अपने नेटवर्क में इजाफा करें और टाइम मैनेजमेंट ठीक रखें। जीवन में तरक्की के लिए आय के अलग-अलग कई सोर्स डेवेलप करें, क्रिएटिविटी में हिस्सा लेते रहें, स्किल्स अपग्रेड करें, अपनी दिमागी मशक्कत में रिपोर्ट्स, जर्नल्स, मैगजीन्स, किताबों को भी शामिल करें।

थायरोकेयर के संस्थापक और प्रबंध निदेशक डॉ ए वेलूमनी, आम्रपाली के सह संस्थापक और प्रबंध निदेशक राजीव अरोडा, यंग इंडियन्स के क्षेत्रीय निदेशक-नॉर्थ जयदीप आहुजा, विटीफिड के सह संस्थापक शशांक वैष्णव हों अथवा सीआईआई राजस्थान के चैयरमेन बसंत खेतान, जैसे ज्यादातर सफल उद्यमी कहते हैं कि अभावग्रस्त जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है। उनके कठिनाई भरे प्रारम्भिक जीवन की शिक्षाओं ने ही उन्हे सफल उद्योगपति बनने में योगदान दिया। हमारे गांव कई मायनों में विश्वविद्यालयों से बेहतर हैं क्योंकि वहां कोई थ्योरी क्लास नहीं होती, सिर्फ प्रेक्टिकल्स होते हैं और इससे रोज सीखा जा सकता है। आईटी कंपनी विप्रो लिमिटेड के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने तो 21 साल की उम्र में ही पारिवारिक कारोबार अपने हाथों में ले लिया था। 

दुनिया की सबसे बड़े स्टील उत्पादक कंपनी आर्सेलर मित्तल के सीईओ और चेयरमैन लक्ष्मी मित्तल ने नाना प्रकार की मुश्किलों का सामना कर अपना अंपायर इतना बड़ा किया। टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज और देश के बड़े उद्योगपति शिव नादर कहते हैं कि बिना लक्ष्य के सफलता नहीं मिल सकती है। लक्ष्य पर निगाह रखते हुए क्रिकेट स्कोर, रिंगटोन, चुटकुले बेचकर आज पेटीएम के मालिक विजय शेखर शर्मा देश के पहले युवा अरबपति बन चुके हैं। नेपाल के पहले अरबपति बिनोद चौधरी अपनी आत्मकथा की बेस्टसेलर 'मेकिंग इट बिग' किताब में कहते हैं कि बुलंद हौसले और संघर्ष करने की क्षमता हो तो कोई भी सपना बड़ा नहीं होता है। वह बताते हैं कि सन् 2010 में चिली की राजधानी सेंटियागो में भयावह भूकंप के दौरान वह होटल की 12वीं मंजिल पर थे। वह डरे नहीं। आज भी वह कामयाब उद्योगपति होने के साथ ही हर उद्यमी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

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उद्योग और कारोबार में जब मेहनत रंग लाती है तो विजय सेल्स और सरगम इलेक्ट्रॉनिक कन्ज्यूमर ड्युरेबल रिटेल स्टोर मालिक नीलेश गुप्ता जैसे उद्यमी टीवी और एसी सेट बेचकर टाटा और अंबानी जैसे बिजनेस घरानों को टक्‍कर देने लगते हैं। नीलेश से पहले ये कारोबार उनके पिता नानू गुप्ता चलाते थे। उस समय वह ऊषा इंटरनेशनल के डिस्ट्रीब्यूटर थे। उन्होंने 1960 के दशक में किसी से दो हजार रुपए लेकर मुंबई के माहिम में अपने छोटे भाई के नाम पर विजय सेल्स नाम से अपना पहला स्टोर खोला। सीधे मैन्युफैक्चर से माल खरीदकर बेचने लगे। बिजनेस बढ़ने लगा। जब नीलेश ने उनका कारोबार संभाला तो नए प्रोडक्ट बेंचने लगे। उन्होंने अन्य प्रदेशों में अपने स्टोर खोल दिए। बिजनेस बढ़ने लगा। आज पूरे देश में उनके पांच दर्जन से अधिक कन्ज्यूमर ड्युरेबल स्टोर्स और उनके दस से अधिक वेयरहाउस हैं। 

एक ऐसे ही उद्योगपति हैं धनबाद के प्रदीप कुमार संथालिया, जिनका बचपन गरीबी में गिरिडीह के राजधनवार में गुजरा। उनके पिता राजधनवार में पीडीएस की दुकान चलाते थे। स्कूली शिक्षा के बाद वे अपने पैरों पर खड़े होने के लिए धनबाद आ गए। घर परिवार चलाने के लिए संघर्ष करने लगे। जितना आगे बढ़ने का जुनून था, उतनी ही लगन से कड़ी मेहनत में जुट गए। सबसे पहले साझे में आइसक्रीम पार्लर खोला। उसके बाद एसीसी कंपनी की एजेंसी लेने के साथ ही बिल्डिंग बनाने लगे। आज वह अपने शहर के बड़े उद्योगपति हैं।

जब भी देश के कामयाब लोगों की जिंदगी पर नजर डालिए, सबसे पहले उनके संघर्षों के पन्ने खुलते हैं। सचिन तेंडुलकर ऐसे ही नहीं क्रिकेट भगवान बन गए या अमिताभ बच्चन सदी के नायक, उन्हे कड़े संघर्षों से गुजरना पड़ा। संघर्ष से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है। ऐसे व्यक्ति सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति होते है जो अपने आसपास के वातावरण से ही उस सकारात्मकता को ग्रहण करते है। हमें भी में सभी पहलुओ से सकारात्मकता ग्रहण करनी चाहिए, नकारात्मक विचारों को दूर रखना चाहिए। हमें अपना दृष्टिकोण बदलना चाहिए और सकारात्मकता विकसित करनी चाहिए।

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जो व्यक्ति संघर्ष का स्वागत करते है वे ही महान बनते है। बिना संघर्ष के कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता। जीवन में आगे बढ़ना, प्रगति करना कोई आकस्मिक घटना नहीं है और न यह कोई स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसके प्रवाह में कोई आगे बढ़ ही जायेगा। आगे बढ़ना, उन्नति करना एक सुनियोजित कर्तव्य है। मनुष्य अपने बल पर संघर्ष करता हुआ एक-एक कदम ही आगे बढ़ पाता है। इस भीड़ से भरी दुनिया में जहाँ लोग एक दूसरे को ढकेल कर अपना स्थान बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं वहाँ किसी लक्षित स्थान पर पहुँच सकना कोई ऐसा काम नहीं है, जो यों ही बैठे बैठाये हो जायेगा! इसके लिये मनुष्य को परिश्रम, पुरुषार्थ तथा त्याग करना पड़ता है। 

दुनिया का सबसे बड़ा अमीर होने से पहले बिल गेट्स को हावर्ड कॉलेज से बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। जब उन्होंने बिज़नेस शुरू किया तो उसमें भी फेल हो गए लेकिन हार नहीं मानी और दुनिया पर छा गए। आइंस्टीन तक की जिंदगी का शुरुआती सफर कठिनतर रहा। स्कूल से निकाल दिए गए। लेकिन एक दिन वह दुनिया के महान वैज्ञानिक बने।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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