हैदराबाद की बोलंट इंडस्ट्रीज में रतन टाटा ने किया निवेश

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बोलंट इंडस्ट्रीज के श्रीकांत बोल्ला ने 2012 में लांच किया था। यह एक ईको फ्रैंडली पेपर (पर्यावरण के अनुकूल कागज) बनाने वाली और बॉयोडेग्रेडबल उत्पाद बनाने वाली कंपनी है। इन्होने सैकड़ों शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को रोजगार देकर उन्हे समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया है। बोलंट में निवेश करने वाले उत्साही लोगों की लिस्ट में ऐंजल इंवेस्टर के रवि मान्था, एसएलएन के एसपी रेड्डी, जीएमआर ग्रुप के किरण गांधी, डा. रेड्डी लैबोरेटरीज के सतीश रेड्डी और पीपल कैपीटल के श्रीनिवास राजू शामिल हैं। बोलंट इंडस्ट्रीज में रवि मांथा कंपनी के निदेशक पद पर हैं।

श्रीकांत कहते हैं कि “हमने देखा कि भारत में पैकेजिंग का काम बहुत छोटे स्तर पर यानि की कुटीर उद्योग के रूप में हो रहा है और इसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं। यह नया निवेश हमें आगे बढ़ने के लिए एक नयी ऊर्जा और ताकत देगा”

कंपनी का दावा है कि वे 20 प्रतिशत महीने की दर से विकास कर रहे हैं। कर्नाटक और तेलंगाना के 5 चालू प्लांटों में करीब 400 लोग काम करते हैं। आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में स्थित विशेष आर्थिक जोन में इनका एक बड़ा प्लांट है। इनका कहना है कि अगले ढाई साल में इनकी योजना, निवेश में मिले 14 करोड़ से जल्द ही 100 करोड़ का राजस्व अर्जित कर लेने की है। इस समय इनकी कंपनी की वैल्यू 50 करोड़ की है।

रतन टाटा ने छोटे उद्योगों के विकास के लिए दो सालों में बहुत निवेश किया है। उन्होने यह निवेश लगभग हर क्षेत्र में जैसे कि ई-कॉमर्स, स्वास्थ्य के क्षेत्र, फूड टेक, वित्तीय क्षेत्र, प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश किया है। बोलंट जैसे उद्योगों में निवेश, निवेशकों के लिए सफलता की पहली सीढ़ी है।

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