प्रदर्शनी के ज़रिये खादी को प्रोत्साहित किया

खादी ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के प्रतीक से लेकर फैशन तक सफर तय किया है।

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देश भर में स्थानीय कलाकारों और बुनकरों की मदद करने के लिए यहां एक प्रदर्शनी के जरिए खादी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने की अपील की गई है।

खादी ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के प्रतीक से लेकर फैशन तक सफर तय किया है।

शैली ज्योति का इंडिया हैबीटेट सेंटर में द खादी मार्च : जस्ट फाइव मीटर्स शीषर्क यह एकल शो खादी की आत्मशुद्धि, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता के प्रतीक के महत्व पर बल देती है।

महात्मा गांधी के सुझाव का पालन कर भारत की शहरी आबादी ग्रामीण कलाकारों का जीवन बदल सकता है और उनकी आजीविका को समृद्ध कर सकता है।

गांधी ने हर व्यक्ति को पांच गज खादी खरीदने का सुझाव दिया था।

उन्होंने कहा कि पांच मीटर कपड़ा एक व्यक्ति की खुद को ढंकने की जरूरत है। 

वह 30 करोड़ शहरी आबादी तलाशना चाहती हैं, जिनके लिए पांच मीटर खादी खरीदना बड़ी चीज नहीं है बल्कि उनकी कोशिश से ग्रामीण इलाकों में लाखों लोगों का जीवन संवर सकता है।

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